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इलाज के अभाव में एक बछड़े की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:18 AM IST
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cow, jhansi news
- फोटो : demo
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शहर के पशु अस्पताल में इलाज के अभाव में एक बछड़े की मौत हो गई। सड़क हादसे में घायल होने पर बछड़े को शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह अस्पताल स्टाफ को बछड़ा मृत मिला। दवाएं खत्म होने के कारण अस्पताल में गोवंश की स्थिति काफी खराब है।
जनपद में 22 पशु चिकित्सालय बने हुए हैं। सभी अस्पतालों दवाओं का टोटा है। पशु विभाग को नई सरकार के गठन के बाद से बजट नहीं मिला है। इस कारण दवाएं खरीदी नहीं जा सकी हैं। शनिवार के अंक में अमर उजाला ने ‘बजट का टोटा, अस्पताल में गोमाता का इलाज नहीं होता’ शीर्षक से प्रमुखता से पशु अस्पताल की बदहाली को उजागर किया था। अस्पताल में इलाज के अभाव में पडे़-पड़े एक बछड़े ने दम तोड़ दिया। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि बछड़ा शुक्रवार को ही लाया गया था। उसके शरीर में कई हिस्सों पर जख्म थे। डॉक्टर ने बताया कि किसी वाहन से जोर से टकराने के चलते पेट में काफी गंभीर चोटें आई थीं। बछड़े की मरहम पट्टी चल रही थी। शनिवार की सुबह जब स्टाफ ने देखा तो वह मृत मिला। अस्पताल में कुछ गायों की स्थिति अभी भी खराब है। शनिवार को एक गाय की पैर की थोड़ी हड्डी काटनी पड़ी।
हंसा गो सेवा समिति कर रही मदद
गायों के इलाज के लिए हंसा गो सेवा समिति लगातार मदद कर रही है। समिति की सदस्य रीता राय रोज अस्पताल पहुंचकर दवाएं व अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने बताया कि समिति में रितु अग्रवाल, अनीता राय, रंजना गुप्ता, वंदना राय समेत कई सदस्याएं खुद के पैसे से गायों का इलाज करवा रही हैं। इसके अलावा ओरछा में गौशाला बनाई है, जिसमें 50-60 गायों का इलाज कर उन्हें ठीक किया जाता है।
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जल्द बजट जारी कराएंगे
जानवरों की दवाइयों के लिए बजट की जरूरत है। इसे सरकार महसूस कर रही है लेकिन यह मामला नीतिगत है। इसलिए थोड़ी देर हो रही है। जल्द बजट जारी कराने का प्रयास किया जाएगा। - राजेंद्र प्रताप सिंह, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री
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जनपद में 22 पशु चिकित्सालय बने हुए हैं। सभी अस्पतालों दवाओं का टोटा है। पशु विभाग को नई सरकार के गठन के बाद से बजट नहीं मिला है। इस कारण दवाएं खरीदी नहीं जा सकी हैं। शनिवार के अंक में अमर उजाला ने ‘बजट का टोटा, अस्पताल में गोमाता का इलाज नहीं होता’ शीर्षक से प्रमुखता से पशु अस्पताल की बदहाली को उजागर किया था। अस्पताल में इलाज के अभाव में पडे़-पड़े एक बछड़े ने दम तोड़ दिया। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि बछड़ा शुक्रवार को ही लाया गया था। उसके शरीर में कई हिस्सों पर जख्म थे। डॉक्टर ने बताया कि किसी वाहन से जोर से टकराने के चलते पेट में काफी गंभीर चोटें आई थीं। बछड़े की मरहम पट्टी चल रही थी। शनिवार की सुबह जब स्टाफ ने देखा तो वह मृत मिला। अस्पताल में कुछ गायों की स्थिति अभी भी खराब है। शनिवार को एक गाय की पैर की थोड़ी हड्डी काटनी पड़ी।
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हंसा गो सेवा समिति कर रही मदद
गायों के इलाज के लिए हंसा गो सेवा समिति लगातार मदद कर रही है। समिति की सदस्य रीता राय रोज अस्पताल पहुंचकर दवाएं व अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने बताया कि समिति में रितु अग्रवाल, अनीता राय, रंजना गुप्ता, वंदना राय समेत कई सदस्याएं खुद के पैसे से गायों का इलाज करवा रही हैं। इसके अलावा ओरछा में गौशाला बनाई है, जिसमें 50-60 गायों का इलाज कर उन्हें ठीक किया जाता है।
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जल्द बजट जारी कराएंगे
जानवरों की दवाइयों के लिए बजट की जरूरत है। इसे सरकार महसूस कर रही है लेकिन यह मामला नीतिगत है। इसलिए थोड़ी देर हो रही है। जल्द बजट जारी कराने का प्रयास किया जाएगा। - राजेंद्र प्रताप सिंह, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री