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चौकरी और कुरैठा में बनेंगे छुट्टा जानवरों के बाड़े
Fri, 21 Dec 2018 02:18 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Fri, 21 Dec 2018 02:18 AM IST
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- फोटो : demo
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बंगरा ब्लाक के चौकरी और बामौर ब्लाक के कुरैठा गांवों में छुट्टा (गाय) जानवरों के लिए बाड़े बनेंगे। इसके लिए एक लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं।
बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों पर लगाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने पिछले दिनों हुई गोसंरक्षण समितियों की बैठकों में कहा था कि जो ग्राम प्रधान सबसे पहले गांव सभा में छुट्टा जानवरों के लिए बाड़ा बनवाने को जगह देगा, उसे प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसी क्रम में बंगरा ब्लाक के चौकरी गांव में 250 जानवरों की क्षमता का बाड़ा बनाने के लिए जमीन दे दी गई है। बाड़े में पानी की समस्या थी, इसलिए जिला गोसंरक्षण समिति ने अपने फंड से एक लाख रुपये जारी कर दिए हैं। इसी तरह बामौर ब्लाक के कुरैठा ग्राम पंचायत ने सौ जानवरों की क्षमता का बाड़ा बनाने के लिए जमीन दे दी है। एक अन्य ग्राम पंचायत मऊरानीपुर ब्लाक के बम्हौरी में भी प्रस्ताव पारित हो चुका है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत स्तर पर जन सहभागिता से छुट्टा जानवरों के संरक्षण करने की बात कही थी, उसका असर दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायतें बाड़ा के लिए जमीन देने को तैयार हो रही हैं।
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बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों पर लगाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने पिछले दिनों हुई गोसंरक्षण समितियों की बैठकों में कहा था कि जो ग्राम प्रधान सबसे पहले गांव सभा में छुट्टा जानवरों के लिए बाड़ा बनवाने को जगह देगा, उसे प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसी क्रम में बंगरा ब्लाक के चौकरी गांव में 250 जानवरों की क्षमता का बाड़ा बनाने के लिए जमीन दे दी गई है। बाड़े में पानी की समस्या थी, इसलिए जिला गोसंरक्षण समिति ने अपने फंड से एक लाख रुपये जारी कर दिए हैं। इसी तरह बामौर ब्लाक के कुरैठा ग्राम पंचायत ने सौ जानवरों की क्षमता का बाड़ा बनाने के लिए जमीन दे दी है। एक अन्य ग्राम पंचायत मऊरानीपुर ब्लाक के बम्हौरी में भी प्रस्ताव पारित हो चुका है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत स्तर पर जन सहभागिता से छुट्टा जानवरों के संरक्षण करने की बात कही थी, उसका असर दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायतें बाड़ा के लिए जमीन देने को तैयार हो रही हैं।
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