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Jhansi News: -कपड़े जलने पर कारोबारी को कंपनी ने नहीं दी थी क्षतिपूर्ति राशि, अब मय ब्याज के देने होंगे 8.47 लाख
Sun, 23 Aug 2026 02:32 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:32 AM IST
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झांसी। करीब आठ साल पहले शहर के कपड़ा कारोबारी संजय जैन के एसके ट्रेडर्स में आग लगने से हुए नुकसान की राशि इफ्को टोक्यो कंपनी ने नहीं दी थी। स्थायी लोक अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मय ब्याज के 8.47 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही वादव्यय व मानसिक कष्ट की राशि भी अदा करने को कहा।
वाद के मुताबिक 31 दिसंबर, 2018 में शहर के चतुर्याना इलाके में एसके ट्रेडर्स में आग लग गई थी। इसमें करीब 30 लाख रुपये का नुकसान बताया गया था। उस वक्त दुकान और माल का बीमा इफ्को टोक्यो कंपनी ने यूको बैंक के माध्यम से कराया था। पीड़ित ने क्लेम मांगा, तो कंपनी द्वारा सर्वे कराया था। सर्वे में यह नुकसान करीब 8.47 लाख का निकला था। संतुष्ट न होने पर कंपनी ने फिर से सर्वे कराया, लेकिन कारोबारी को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी। पीड़ित ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। शुक्रवार को सुनवाई करते हुए पीएलए के अध्यक्ष विजयकृष्ण सिंह व सदस्यगण डॉ. कपिल नाथ शृंगीऋषि और डॉ. सुरुचि सिंह ने इसे आंशिक स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आठ फीसदी ब्याज के साथ वादी को 8 लाख 47 हजार 237 रुपये अदा करे। साथ ही वाद व्यय और मानसिक कष्ट के रूप में 28 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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वाद के मुताबिक 31 दिसंबर, 2018 में शहर के चतुर्याना इलाके में एसके ट्रेडर्स में आग लग गई थी। इसमें करीब 30 लाख रुपये का नुकसान बताया गया था। उस वक्त दुकान और माल का बीमा इफ्को टोक्यो कंपनी ने यूको बैंक के माध्यम से कराया था। पीड़ित ने क्लेम मांगा, तो कंपनी द्वारा सर्वे कराया था। सर्वे में यह नुकसान करीब 8.47 लाख का निकला था। संतुष्ट न होने पर कंपनी ने फिर से सर्वे कराया, लेकिन कारोबारी को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी। पीड़ित ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। शुक्रवार को सुनवाई करते हुए पीएलए के अध्यक्ष विजयकृष्ण सिंह व सदस्यगण डॉ. कपिल नाथ शृंगीऋषि और डॉ. सुरुचि सिंह ने इसे आंशिक स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आठ फीसदी ब्याज के साथ वादी को 8 लाख 47 हजार 237 रुपये अदा करे। साथ ही वाद व्यय और मानसिक कष्ट के रूप में 28 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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