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अंधाधुंध एंटीबायोटिक का सेवन भी ब्लैक फंगस के लिए जिम्मेदार
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अंधाधुंध एंटीबायोटिक का सेवन भी ब्लैक फंगस के लिए जिम्मेदार
झांसी। ब्लैक फंगस को लेकर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शोध कार्य शुरू कर दिया है। 20 मरीजों पर की गई जांच-पड़ताल में शुरूआती दौर में यह बात सामने आई है कि स्टेरॉयड और हाई शुगर के साथ-साथ एंटीबायोटिक के अंधाधुंध सेवन से भी ब्लैक फंगस हो रहा है। ज्यादा एंटीबायोटिक खाने से नाक और मुंह के अंदर के सामान्य जीवाणु मर जाते हैं, जिससे ब्लैक फंगस पनप जाता है।
झांसी में दो सप्ताह में लगभग 50 मामले ब्लैक फंगस के सामने आ चुके हैं। इस बीमारी पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शोध शुरू कर दिया है।
मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य और एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि म्यूकोर और राइजोपास दो मुख्य प्रजातियां हैं जो ब्लैक फंगस ( म्यूकर माइकोसिस) का कारण बनती हैं। यह फंगस वातावरण में होते हैं। हालांकि, ये मनुष्यों के लिए तब तक हानिकारक नहीं हैं, जब तक कि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर न हो। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर फंगस के बीजाणुओं से सांस लेने में फेफड़ों या साइनस में संक्रमण हो सकता है, जो शरीर के अन्य भागों में फैल जाता है।
डॉ. अंशुल के मुताबिक कोविड में स्टेरॉयड का तर्कहीन उपयोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल भी गलत है। नाक और मुंह के अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे यह बीमारी पनप रही है। हालांकि अभी पूरा शोध नहीं हुआ है, लेकिन एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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ऐसे कर रहे जांच
ब्लैक फंगस के मरीजों के नाक का स्वैब बैक्टीरियल कल्चर के लिए भी लिया जा रहा है और देखा जा रहा है कि इन मरीजों का बैक्टीरियल फ्लोरा (जीवाणुओं का समूह) अन्य लोगों की तरह है या नहीं। नाक में कई तरह के जीवाणु रहते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकते हैं।
इन दावों को किया खारिज
उप प्राचार्य ने औद्योगिक ऑक्सीजन के इस्तेमाल या फिर किसी खास कंपनी का मास्क पहनने से ब्लैक फंगस पनपने के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन कारणों से यह बीमारी नहीं होती है।
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झांसी। ब्लैक फंगस को लेकर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शोध कार्य शुरू कर दिया है। 20 मरीजों पर की गई जांच-पड़ताल में शुरूआती दौर में यह बात सामने आई है कि स्टेरॉयड और हाई शुगर के साथ-साथ एंटीबायोटिक के अंधाधुंध सेवन से भी ब्लैक फंगस हो रहा है। ज्यादा एंटीबायोटिक खाने से नाक और मुंह के अंदर के सामान्य जीवाणु मर जाते हैं, जिससे ब्लैक फंगस पनप जाता है।
झांसी में दो सप्ताह में लगभग 50 मामले ब्लैक फंगस के सामने आ चुके हैं। इस बीमारी पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शोध शुरू कर दिया है।
मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य और एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि म्यूकोर और राइजोपास दो मुख्य प्रजातियां हैं जो ब्लैक फंगस ( म्यूकर माइकोसिस) का कारण बनती हैं। यह फंगस वातावरण में होते हैं। हालांकि, ये मनुष्यों के लिए तब तक हानिकारक नहीं हैं, जब तक कि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर न हो। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर फंगस के बीजाणुओं से सांस लेने में फेफड़ों या साइनस में संक्रमण हो सकता है, जो शरीर के अन्य भागों में फैल जाता है।
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डॉ. अंशुल के मुताबिक कोविड में स्टेरॉयड का तर्कहीन उपयोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल भी गलत है। नाक और मुंह के अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे यह बीमारी पनप रही है। हालांकि अभी पूरा शोध नहीं हुआ है, लेकिन एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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ऐसे कर रहे जांच
ब्लैक फंगस के मरीजों के नाक का स्वैब बैक्टीरियल कल्चर के लिए भी लिया जा रहा है और देखा जा रहा है कि इन मरीजों का बैक्टीरियल फ्लोरा (जीवाणुओं का समूह) अन्य लोगों की तरह है या नहीं। नाक में कई तरह के जीवाणु रहते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकते हैं।
इन दावों को किया खारिज
उप प्राचार्य ने औद्योगिक ऑक्सीजन के इस्तेमाल या फिर किसी खास कंपनी का मास्क पहनने से ब्लैक फंगस पनपने के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन कारणों से यह बीमारी नहीं होती है।