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...और वह हार गया जिंदगी की जंग
ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2016 01:04 AM IST
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झांसी। अपनी जिंदगी की जंग में वह हार गया। उसे स्वाइन फ्लू से निजात नहीं मिल सकी। एक निजी अस्पताल में सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद शुक्रवार को पीड़ित ने दम तोड़ दिया। स्वाइन फ्लू से हुई इस मौत से जहां स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है, वहीं जनपद में फिलहाल इस घातक बीमारी का कोई भी दूसरा मरीज सामने न आने का दावा भी विभाग कर रहा है।
गौरतलब है कि सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के बृह्मनगर निवासी संजीव मोहन खरे (47) पुत्र स्व. बाबूलाल खरे एलआईसी में सर्वेयर व अधिवक्ता थे। कुछ समय पूर्व उनको सर्दी, जुकाम व बुखार की शिकायत हुई। इस पर वे सीपरी बाजार स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे।
वहां हालत में सुधार न होने पर 17 फरवरी को उन्हें कानपुर रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें सीने में संक्रमण बताकर उपचार शुरू कर दिया गया। जब उपचार से स्वास्थ्य लाभ नहीं मिला तो परिजनों ने उनकी जांच रिपोर्ट भोपाल के एक चिकित्सक को दिखाई। चिकित्सक ने उन रिपोर्ट के आधार पर उन्हें स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने का अंदेशा जताया।
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संजीव के परिजनों ने कानपुर रोड स्थित नर्सिंग होम के चिकित्सक से इस संबंध में बात की। चिकित्सक ने जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श किया और स्वाइन फ्लू की किट के माध्यम से संजीव के रक्त के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए लखनऊ भेज दिया। वहां से रिपोर्ट सकारात्मक आई।
परिजनों के अनुसार सरकारी अस्पताल से उन्हें उपचार के नाम पर टैमीफ्लू नामक कुछ गोलियां दी गईं। जो सुबह-शाम खिलाई गईं। एक सप्ताह पूर्व हालत बिगड़ने पर संजीव को वेंटिलेटर पर ले जाया गया। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही और शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
उधर, सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव का कहना है कि संजीव मोहन खरे के परिजनों से कहा गया था कि उन्हें सरकारी अस्पताल मेें अथवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दें, लेकिन वह नहीं माने। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और भी चौकन्ना हो गया है। रैपिड एक्शन टीमों को एलर्ट रहने को कहा गया है। जहां भी सूचना मिलेगी, वहां टीम जांच करेगी और रक्त का नमूना लेकर उसे लखनऊ भेजा जाएगा।
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गौरतलब है कि सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के बृह्मनगर निवासी संजीव मोहन खरे (47) पुत्र स्व. बाबूलाल खरे एलआईसी में सर्वेयर व अधिवक्ता थे। कुछ समय पूर्व उनको सर्दी, जुकाम व बुखार की शिकायत हुई। इस पर वे सीपरी बाजार स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे।
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वहां हालत में सुधार न होने पर 17 फरवरी को उन्हें कानपुर रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें सीने में संक्रमण बताकर उपचार शुरू कर दिया गया। जब उपचार से स्वास्थ्य लाभ नहीं मिला तो परिजनों ने उनकी जांच रिपोर्ट भोपाल के एक चिकित्सक को दिखाई। चिकित्सक ने उन रिपोर्ट के आधार पर उन्हें स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने का अंदेशा जताया।
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संजीव के परिजनों ने कानपुर रोड स्थित नर्सिंग होम के चिकित्सक से इस संबंध में बात की। चिकित्सक ने जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श किया और स्वाइन फ्लू की किट के माध्यम से संजीव के रक्त के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए लखनऊ भेज दिया। वहां से रिपोर्ट सकारात्मक आई।
परिजनों के अनुसार सरकारी अस्पताल से उन्हें उपचार के नाम पर टैमीफ्लू नामक कुछ गोलियां दी गईं। जो सुबह-शाम खिलाई गईं। एक सप्ताह पूर्व हालत बिगड़ने पर संजीव को वेंटिलेटर पर ले जाया गया। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही और शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
उधर, सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव का कहना है कि संजीव मोहन खरे के परिजनों से कहा गया था कि उन्हें सरकारी अस्पताल मेें अथवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दें, लेकिन वह नहीं माने। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू से हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और भी चौकन्ना हो गया है। रैपिड एक्शन टीमों को एलर्ट रहने को कहा गया है। जहां भी सूचना मिलेगी, वहां टीम जांच करेगी और रक्त का नमूना लेकर उसे लखनऊ भेजा जाएगा।