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जल हम बना नहीं सकते, बचाना ही होगा
Tue, 16 Jul 2019 11:26 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: राजेश सैनी
Updated Tue, 16 Jul 2019 11:26 PM IST
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झांसी में आयोजित अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत ‘जल है, तो कल है’ विषय पर महिला संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं ने कहा कि जीवन के लिए जल सबसे जरूरी तत्व है।
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जल हम बना तो नहीं सकते हैं, लेकिन बचा जरूर सकते हैं। भावी पीढ़ी को विरासत में देने के लिए हमें इसका संरक्षण करना होगा। इस दौरान नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ ली गई है।
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आवास विकास रस विहार कॉलोनी में आयोजित संगोष्ठी में ममता राय ने कहा कि हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए विरासत में धन-संपदा तो छोड़कर जाते हैं, लेकिन क्या केवल इससे ही काम चल पाएगा, ऐसे में जरूरी है कि हम उन्हें पर्यावरण की विरासत भी देकर जाएं।
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रेखा सिंह बोलीं कि हम पानी बचाएं और बच्चों को अभी से इसकी आदत डालें। अलका श्रीवास्तव ने कहा कि बारिश में बहकर बेकार हो जाने वाले छतों के पानी को बड़े बर्तनों में भरकर हमें इसका उपयोग घरेलू कामकाज में करना चाहिए।
वंदना द्विवेदी ने कहा कि जल संरक्षण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बेहद कारगर साबित हो सकता है। इसे शत प्रतिशत लागू किया जाना चाहिए। इस दौरान चित्रा सिंह, किरण श्रीवास्तव, शारदा गुप्ता, शिवांगी, ज्योति शर्मा, सीमा, निशा श्रीवास्तव, मंजू मिश्रा, नेहा आदि ने भी विचार प्रकट किए।