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Jhansi News: मुकदमा होने के 72 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ नहीं आया बालू कारोबारी
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झांसी। जनपद में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन ने एक मजदूर की जान ले ली। पुलिस ने अवैध खनन के आरोप में पट्टेधारक सिविल लाइंस निवासी सत्यम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था लेकिन, 72 घंटे बाद भी वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। हालांकि पुलिस अफसरों का कहना है कि तलाश की जा रही है। उधर, घटना के बाद से एरच के डेरा घाट पर बालू खोदाई का काम फिलहाल ठप पड़ा हुआ है।
योगी सरकार ने अवैध खनन पर सख्त रवैया अपनाया है लेकिन, नेता और अफसरों के गठजोड़ के सामने सरकार की इस सख्ती ने दम तोड़ दिया है। हालात यह हैं कि खनिज विभाग ने जनपद में महज 25 पट्टे ही जारी किए हैं लेकिन, जनपद में 60 से अधिक घाटों से नदी का सीना चीरकर धड़ल्ले से बालू निकाली जा रही है। इससे सालाना करीब सौ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। अवैध खनन से न सिर्फ नदी की सेहत बिगड़ रही बल्कि सरकारी खजाने को भी चोट पहुंच रही है। बालू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि बारिश के सीजन में खनन बंद रखने का नियम है लेकिन, उसके बावजूद यहां अवैध खनन लगातार जारी रहता है। वहीं, एसपी आरए नैपाल सिंह का कहना है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपी की तलाश की जा रही है।
बालू के स्टॉक में भी खेल
एक जुलाई से 30 सितंबर तक बालू खनन प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान सिर्फ पट्टा धारकों को स्टॉक में रखी बालू बेचने की इजाजत होती है लेकिन, इसमें बड़ा खेल होता है। स्टॉक में रखी बालू का विवरण पट्टेधारकों को देना होता है। जानकारों का कहना है कि दिन में स्टॉक में रखी बालू बेची जाती है। रात में नदी से बालू निकालकर उस स्टॉक को पूरा कर दिया जाता है।
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योगी सरकार ने अवैध खनन पर सख्त रवैया अपनाया है लेकिन, नेता और अफसरों के गठजोड़ के सामने सरकार की इस सख्ती ने दम तोड़ दिया है। हालात यह हैं कि खनिज विभाग ने जनपद में महज 25 पट्टे ही जारी किए हैं लेकिन, जनपद में 60 से अधिक घाटों से नदी का सीना चीरकर धड़ल्ले से बालू निकाली जा रही है। इससे सालाना करीब सौ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। अवैध खनन से न सिर्फ नदी की सेहत बिगड़ रही बल्कि सरकारी खजाने को भी चोट पहुंच रही है। बालू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि बारिश के सीजन में खनन बंद रखने का नियम है लेकिन, उसके बावजूद यहां अवैध खनन लगातार जारी रहता है। वहीं, एसपी आरए नैपाल सिंह का कहना है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपी की तलाश की जा रही है।
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बालू के स्टॉक में भी खेल
एक जुलाई से 30 सितंबर तक बालू खनन प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान सिर्फ पट्टा धारकों को स्टॉक में रखी बालू बेचने की इजाजत होती है लेकिन, इसमें बड़ा खेल होता है। स्टॉक में रखी बालू का विवरण पट्टेधारकों को देना होता है। जानकारों का कहना है कि दिन में स्टॉक में रखी बालू बेची जाती है। रात में नदी से बालू निकालकर उस स्टॉक को पूरा कर दिया जाता है।
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