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सब करें सहयोग तो होंगे नंबर-वन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 May 2017 01:28 AM IST
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शहर के लोग खुश हो सकते हैं कि साफ-सफाई के मामले में झांसी यूपी में तीसरे पर है, लेकिन यदि पहले पायदान पर पहुंचना है तो अभी खासी मशक्कत करनी होगी। अधिकार के साथ कर्तव्यों का भी पालन करना होगा। 2014 में जब स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू हुआ था, तब झांसी 269 वें नंबर पर था। इस हिसाब से देखें तो शहर ने तीन साल में 103 प्वाइंट की ग्रोथ हासिल की है।
अव्वल आने के लिए उन लोगों को अपनी आदतें सुधारनी होंगी जो हर कहीं कचरा फेंक देते हैं या फिर गंदगी फैलाते हैं। वे खुद तो अपनी देहरी साफ रखें साथ ही मोहल्ले वालों को भी इसके लिए जागरूक करें। साथ ही नगर निगम को भी पूरी दम से काम करना होगा। दस करोड़ रुपये सालाना सफाई कर्मियों के वेतन, 90 लाख रुपये नाला सफाई, 40 लाख रुपये शौचालय की सफाई, 30 लाख रुपये सफाई जागरूकता अभियान, चूना और फिनायल सफाई पर 60 लाख रुपये सालाना खर्च किया जाता है। इसके बाद भी सफाई के प्रति लोगों की सोच स्मार्ट नहीं है। दुकान के बाहर से निकली नाली पर दुकान का सामान इकट्ठा रख देने से कचरा नालियों में इकट्ठा होता रहता है। बहुत से दुकानदारों और मकानों के बाहर पक्के रैंप बन गए हैं, जिससे नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। यदि सफाई कर्मी नाली के ऊपर से अतिक्रमण हटाने को कहते हैं तो दुकानदार लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। इन आदतों को छोड़ना होगा।
इन इलाकों में अभी भी गंदगी
- गुदरीपुरा, कपूर टेकरी, मोहनी बाबा, मदकखाना, नईबस्ती, अलीगोल, मुकरयाना, बाहर ओरछा गेट, सैंयर गेट, मैला की टौरिया मुहल्लों में गंदगी रहती है।
ये साफ-सुथरे
- सिविल लाइन, गोंदू कंपाउंड, प्रेमगंज, नंदनपुरा, दादामियां, वीरांगना नगर, आजाद गंज, तालपुरा, नाल गंज मुहल्ले आमतौर पर साफ रहते हैं।
बोले शहर के लोग
---------------
जागरूकता जरूरी
झांसी को सफाई के मामले में भिंड और सतना से भी कम नंबर मिले हैं। ऐसा लोगों में जागरूकता की कमी के कारण हुआ है। जब तक हम सभी लोग व्यक्तिगत रूप से यह नहीं समझेंगे कि शहर हमारा है और इसे साफ- सुथरा रखना हम सब की जिम्मेदारी है, तब तक शहर को पूर्ण रूप से स्वच्छ नहीं रखा जा सकता है।
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- डा. कल्पना सिंह
स्त्री रोग विशेषज्ञ, नई बस्ती
नगर निगम भी जिम्मेदार
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने कर्मचारी आता है। मुहल्ले के दस लोग पैसा देते हैं, चार लोग नहीं देते हैं। उनका कचरा सड़क पर फैलता रहता है, इसलिए जो लोग कचरा का पैसा देते हैं उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता है। सड़क पर कचरा पड़ा रहने से स्वच्छता का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
- विनीत खरे
शिक्षक, मेंहदी बाग
डस्टबिन रखे जाएं
जगह- जगह डस्टबिन रखे जाएं और लिखा जाए कि कचरा डस्टबिन में ही डालें। इधर- उधर कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिक इसकी अहमियत समझें। लोगों की यह आदत बन चुकी है कि कंटेनर में कचरा नहीं डालते हैं, बल्कि दूर से फेंक कर चले जाते हैं।
- विनीत जैन
व्यापारी, पुराना रोडवेज कार्यालय
तय स्थान पर फेंके कचरा
कचरा घरों के कारण गंदगी फैल रही है। यदि कचरा घर समाप्त हो जाएंगे तो लोगों को अहसास होने लगेगा कि अब कचरा इधर- उधर नहीं फेंकना चाहिए। इसलिए नगर निगम सख्ती से ध्यान दे। नंदनपुरा की पुलिया पर गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। इसी तरह कोतवाली की ढाल पर कचरे का ढेर लगा रहता है।
- इमरान खान
व्यापारी, जीवनशाह
मानसिकता में बदलाव जरूरी
अभी शहर के लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। वह जहां मर्जी कचरा फेंक देते हैं। जहां से भी शिकायत आती है, सफाई करा दी जाती है। सफाई तभी कारगर होगी, जब लोग सफाई की अहमियत समझेंगे।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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अव्वल आने के लिए उन लोगों को अपनी आदतें सुधारनी होंगी जो हर कहीं कचरा फेंक देते हैं या फिर गंदगी फैलाते हैं। वे खुद तो अपनी देहरी साफ रखें साथ ही मोहल्ले वालों को भी इसके लिए जागरूक करें। साथ ही नगर निगम को भी पूरी दम से काम करना होगा। दस करोड़ रुपये सालाना सफाई कर्मियों के वेतन, 90 लाख रुपये नाला सफाई, 40 लाख रुपये शौचालय की सफाई, 30 लाख रुपये सफाई जागरूकता अभियान, चूना और फिनायल सफाई पर 60 लाख रुपये सालाना खर्च किया जाता है। इसके बाद भी सफाई के प्रति लोगों की सोच स्मार्ट नहीं है। दुकान के बाहर से निकली नाली पर दुकान का सामान इकट्ठा रख देने से कचरा नालियों में इकट्ठा होता रहता है। बहुत से दुकानदारों और मकानों के बाहर पक्के रैंप बन गए हैं, जिससे नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। यदि सफाई कर्मी नाली के ऊपर से अतिक्रमण हटाने को कहते हैं तो दुकानदार लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। इन आदतों को छोड़ना होगा।
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इन इलाकों में अभी भी गंदगी
- गुदरीपुरा, कपूर टेकरी, मोहनी बाबा, मदकखाना, नईबस्ती, अलीगोल, मुकरयाना, बाहर ओरछा गेट, सैंयर गेट, मैला की टौरिया मुहल्लों में गंदगी रहती है।
ये साफ-सुथरे
- सिविल लाइन, गोंदू कंपाउंड, प्रेमगंज, नंदनपुरा, दादामियां, वीरांगना नगर, आजाद गंज, तालपुरा, नाल गंज मुहल्ले आमतौर पर साफ रहते हैं।
बोले शहर के लोग
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जागरूकता जरूरी
झांसी को सफाई के मामले में भिंड और सतना से भी कम नंबर मिले हैं। ऐसा लोगों में जागरूकता की कमी के कारण हुआ है। जब तक हम सभी लोग व्यक्तिगत रूप से यह नहीं समझेंगे कि शहर हमारा है और इसे साफ- सुथरा रखना हम सब की जिम्मेदारी है, तब तक शहर को पूर्ण रूप से स्वच्छ नहीं रखा जा सकता है।
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- डा. कल्पना सिंह
स्त्री रोग विशेषज्ञ, नई बस्ती
नगर निगम भी जिम्मेदार
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने कर्मचारी आता है। मुहल्ले के दस लोग पैसा देते हैं, चार लोग नहीं देते हैं। उनका कचरा सड़क पर फैलता रहता है, इसलिए जो लोग कचरा का पैसा देते हैं उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता है। सड़क पर कचरा पड़ा रहने से स्वच्छता का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
- विनीत खरे
शिक्षक, मेंहदी बाग
डस्टबिन रखे जाएं
जगह- जगह डस्टबिन रखे जाएं और लिखा जाए कि कचरा डस्टबिन में ही डालें। इधर- उधर कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिक इसकी अहमियत समझें। लोगों की यह आदत बन चुकी है कि कंटेनर में कचरा नहीं डालते हैं, बल्कि दूर से फेंक कर चले जाते हैं।
- विनीत जैन
व्यापारी, पुराना रोडवेज कार्यालय
तय स्थान पर फेंके कचरा
कचरा घरों के कारण गंदगी फैल रही है। यदि कचरा घर समाप्त हो जाएंगे तो लोगों को अहसास होने लगेगा कि अब कचरा इधर- उधर नहीं फेंकना चाहिए। इसलिए नगर निगम सख्ती से ध्यान दे। नंदनपुरा की पुलिया पर गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। इसी तरह कोतवाली की ढाल पर कचरे का ढेर लगा रहता है।
- इमरान खान
व्यापारी, जीवनशाह
मानसिकता में बदलाव जरूरी
अभी शहर के लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। वह जहां मर्जी कचरा फेंक देते हैं। जहां से भी शिकायत आती है, सफाई करा दी जाती है। सफाई तभी कारगर होगी, जब लोग सफाई की अहमियत समझेंगे।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी