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अलीगढ़: चार बार सपा विधायक रह चुके वीरेश यादव को अदालत ने भेजा जेल, 25 साल पुराने हैं मुकदमे
Wed, 04 May 2022 03:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 04 May 2022 03:06 PM IST
सार
वीरेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से जानलेवा हमले की धाराओं के दो मुकदमे क्रमश: वर्ष 1997 व 1998 के दादो थाने के हैं। जिनकी सुनवाई एमपी/एमएलए मामलों की अदालत एडीजे-4 मनीषा के यहां चल रही है।
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पूर्व सपा विधायक वीरेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समाजवादी पार्टी के चार बार के पूर्व विधायक वीरेश यादव ने बुधवार को एमपी/एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से उन्हें न्यायालय ने जेल भेज दिया। हालांकि इस दौरान उनके अधिवक्ता की ओर से जमनात अर्जी दायर की गई, जिस पर अदालत ने तारीख नियत कर दी है।
बता दें कि अदालत ने दादों के 25 वर्ष पुराने दो अलग-अलग मुकदमों में लगातार जारी आदेश के बावजूद हाजिर न होने पर 26 अप्रैल को पूर्व विधायक के खिलाफ कुर्की आदेश जारी करते हुए एसएसपी को पत्र लिखा था। जिसमें कुर्की प्रक्रिया कराने के साथ-साथ 7 मई को पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। इसी क्रम में पूर्व विधायक न्यायालय में हाजिर हो गए।
बता दें कि वीरेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से जानलेवा हमले की धाराओं के दो मुकदमे क्रमश: वर्ष 1997 व 1998 के दादो थाने के हैं। जिनकी सुनवाई एमपी/एमएलए मामलों की अदालत एडीजे-4 मनीषा के यहां चल रही है। इन मुकदमों में 5 सितंबर 2019 में अदालत से कुर्की नोटिस जारी किए गए थे। ये नोटिस थाना पुलिस ने तामील करा दिए। मगर वीरेश यादव हाजिर नहीं हुए।
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इसके बाद प्रमुख सचिव गृह व डीजीसी को अदालत स्तर से पत्र लिखकर गैर जमानती वारंट जारी किए गए। जिसमें साफ कहा गया कि ये प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति हैं। इसलिए पुलिस इन्हें अदालत तक नहीं ला पा रही। इन्हें गिरफ्तार कराकर कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद 9 सितंबर 2021 में वीरेश यादव के स्तर से अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई, जिसे अदालत से खारिज कर दिया गया।
अब तक गैर जमानती वारंट जारी होने और कुर्की नोटिस जारी होने के बाद भी वीरेश यादव हाजिर नहीं हुए। इस पर 26 अप्रैल को अदालत ने दोनों मुकदमों में धारा 83 के तहत कुर्की आदेश जारी करते हुए कुर्की करने व 7 मई को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए थे। साथ में एसएसपी को पत्र लिखा गया कि उचित माध्यम से कुर्की कराकर अदालत को नियत तारीख से पहले अवगत कराया जाए। इन्हीं मुकदमों में बुधवार को पूर्व विधायक न्यायालय में अधिवक्ता संग आत्मसमर्पण करने पहुंचे।
जहां उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। उनके अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित व बार अध्यक्ष जगदीश सारस्वत की ओर से जमानत अर्जी दायर की गई, जिस पर तारीख नियत कर दी है। बता दें कि वीरेश यादव तीन बार जिले की गंगीरी सीट से और एक बार अतरौली सीट से विधायक रह चुके हैं। पिछले लगातार दो बार से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र व प्रदेश सरकार में मंत्री भाजपा के संदीप सिंह से अतरौली से चुनाव हार रहे हैं।
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बता दें कि अदालत ने दादों के 25 वर्ष पुराने दो अलग-अलग मुकदमों में लगातार जारी आदेश के बावजूद हाजिर न होने पर 26 अप्रैल को पूर्व विधायक के खिलाफ कुर्की आदेश जारी करते हुए एसएसपी को पत्र लिखा था। जिसमें कुर्की प्रक्रिया कराने के साथ-साथ 7 मई को पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। इसी क्रम में पूर्व विधायक न्यायालय में हाजिर हो गए।
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बता दें कि वीरेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से जानलेवा हमले की धाराओं के दो मुकदमे क्रमश: वर्ष 1997 व 1998 के दादो थाने के हैं। जिनकी सुनवाई एमपी/एमएलए मामलों की अदालत एडीजे-4 मनीषा के यहां चल रही है। इन मुकदमों में 5 सितंबर 2019 में अदालत से कुर्की नोटिस जारी किए गए थे। ये नोटिस थाना पुलिस ने तामील करा दिए। मगर वीरेश यादव हाजिर नहीं हुए।
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इसके बाद प्रमुख सचिव गृह व डीजीसी को अदालत स्तर से पत्र लिखकर गैर जमानती वारंट जारी किए गए। जिसमें साफ कहा गया कि ये प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति हैं। इसलिए पुलिस इन्हें अदालत तक नहीं ला पा रही। इन्हें गिरफ्तार कराकर कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद 9 सितंबर 2021 में वीरेश यादव के स्तर से अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई, जिसे अदालत से खारिज कर दिया गया।
अब तक गैर जमानती वारंट जारी होने और कुर्की नोटिस जारी होने के बाद भी वीरेश यादव हाजिर नहीं हुए। इस पर 26 अप्रैल को अदालत ने दोनों मुकदमों में धारा 83 के तहत कुर्की आदेश जारी करते हुए कुर्की करने व 7 मई को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए थे। साथ में एसएसपी को पत्र लिखा गया कि उचित माध्यम से कुर्की कराकर अदालत को नियत तारीख से पहले अवगत कराया जाए। इन्हीं मुकदमों में बुधवार को पूर्व विधायक न्यायालय में अधिवक्ता संग आत्मसमर्पण करने पहुंचे।
जहां उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। उनके अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित व बार अध्यक्ष जगदीश सारस्वत की ओर से जमानत अर्जी दायर की गई, जिस पर तारीख नियत कर दी है। बता दें कि वीरेश यादव तीन बार जिले की गंगीरी सीट से और एक बार अतरौली सीट से विधायक रह चुके हैं। पिछले लगातार दो बार से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र व प्रदेश सरकार में मंत्री भाजपा के संदीप सिंह से अतरौली से चुनाव हार रहे हैं।