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Jhansi Fake Ghee News: आलू और कोलतार डाई बन रहा ‘शुद्ध’ देसी घी, कहीं आप भी तो नहीं हो रहे शिकार?
Sat, 10 Oct 2020 01:35 PM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 01:35 PM IST
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झांसी नकली घी
- फोटो : अमर उजाला
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झांसी। अगर आप भी देसी घी खाने के शौकीन हैं, तो जरा संभल जाइए। इन दिनों बाजार में असली के नाम पर मिलावटी घी का कारोबार खूब फलफूल रहा है। असली घी की तरह दिखने वाला मिलावटी घी बिना लेबलिंग के टीन के डिब्बों और खुले में भी बिक रहा है। ऐसे में लोगों को घी भी खरीदते समय बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। जानकार बताते हैं कि मिलावटी देशी घी तैयार करने के लिए 40 प्रतिशत रिफाइंड ऑयल और 60 प्रतिशत फार्चून वनस्पति को मिलाते हैं। इसके अलावा उबला हुआ आलू और कोलतार डाई का भी प्रयोग किया जाता है। मिलावटी घी फार्चून वनस्पति से ही तैयार करते हैं क्योंकि यह दानेदार होता है। क्वालिटी को अच्छा करने के लिए 5 से 10 प्रतिशत असली देशी घी भी मिलाते हैं। देशी घी स्वाद के साथ कड़कपन लाता है। एक क्विंटल तैयार मिलावटी माल में 10 ग्राम घी की महक वाला सेंट भी मिलाया जाता है। फिर निश्चित तापमान तक गरम करते हैं। इसकी मशीन से पैकिंग की जाती है।
डॉक्टर बोले, दमा, खांसी व अन्य बीमारी हो सकती
इस प्रकार से बनाया गया मिलावटी देसी घी लोगों के स्वास्थ पर बुरा असर डालता है। मिलावटी देसी घी की खास पहचान यह है कि लगभग दो सप्ताह बाद इसकी खुशबू कम होने के साथ-साथ स्वाद भी बदल जाता है। इस संबंध में डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि नकली देसी घी लोगों के पेट तथा फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर बुरा असर डालता है। इसका सेवन करने से दमा, खांसी जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं।
यहां कर सकते शिकायत
आप देसी घी खरीद रहे हैं तो सबसे पहले उस पर पूरी लेबलिंग देखें। उस पर छपे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर को भी जरूर चेक करें। पैकिंग पर लिखे कंटेंट को भी जांचें। खुला घी खरीदने से बचें। अगर मिलावट का अंदेशा है तो कलक्ट्रेट स्थित फूड विभाग में किसी भी कार्य दिवस पर लिखित में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
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ऐसे करें जांच
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डॉक्टर बोले, दमा, खांसी व अन्य बीमारी हो सकती
इस प्रकार से बनाया गया मिलावटी देसी घी लोगों के स्वास्थ पर बुरा असर डालता है। मिलावटी देसी घी की खास पहचान यह है कि लगभग दो सप्ताह बाद इसकी खुशबू कम होने के साथ-साथ स्वाद भी बदल जाता है। इस संबंध में डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि नकली देसी घी लोगों के पेट तथा फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर बुरा असर डालता है। इसका सेवन करने से दमा, खांसी जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं।
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यहां कर सकते शिकायत
आप देसी घी खरीद रहे हैं तो सबसे पहले उस पर पूरी लेबलिंग देखें। उस पर छपे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर को भी जरूर चेक करें। पैकिंग पर लिखे कंटेंट को भी जांचें। खुला घी खरीदने से बचें। अगर मिलावट का अंदेशा है तो कलक्ट्रेट स्थित फूड विभाग में किसी भी कार्य दिवस पर लिखित में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
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ऐसे करें जांच
- देसी घी की पहचान के लिए हाथ को उल्टा करके रगड़ें। अगर घी में दाने आएं तो समझ जाएं यह नकली है। असली घी हाथ पर लगाते ही समाहित हो जाता है। यही पहचान का सबसे आसान तरीका है।
- एक चम्मच घी में चार-पांच बूंदें आयोडीन की मिलाएं। अगर रंग नीला हो जाता है तो घी के अंदर उबले आलू की मिलावट है।
- एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें डालडा की मिलावट है।
- थोड़ा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें, अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है।