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तीन महीने में प्रशासकों ने खर्च कर दिए ग्राम पंचायतों के 25 करोड़
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झांसी। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद तीन महीने के लिए ग्राम पंचायतों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया गया था। इस अल्प अवधि के कार्यकाल में ही प्रशासकों ने पंचायतों की 25 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च कर डाली। इसका खुलासा लेखा परीक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे ऑडिट में हुआ है। विभाग की टीमें सभी पंचायतों से पाई-पाई का हिसाब लेने में जुटी हुईं हैं। अगले महीने ये काम पूरा कर लिया जाएगा।
जिले में 496 ग्राम पंचायतें हैं, जिनका पिछला कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को पूरा हो गया था। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिए गए थे। ग्राम पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी बतौर प्रशासक सहायक विकास अधिकारियों को सौंपी गई थी। एक-एक सहायक विकास अधिकारी को कई-कई ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाया गया था। इनमें से तमाम प्रशासकों ने खुले हाथ से ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध बजट को खर्च किया। इसका खुलासा ऑडिट में हुआ है। दरअसल, लेखा परीक्षा विभाग द्वारा जिले की सभी 496 ग्राम पंचायतों का ऑडिट किया जा रहा है, जिसमें अब तक सामने आया है कि प्रशासकों के कार्यकाल में जमकर पैसा खर्च हुआ। प्रशासकों ने ग्राम पंचायत निधि से 25 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च कर डाली। इतनी कम अवधि में प्रशासक बजट व्यय में प्रधानों से कहीं आगे रहे। ये तथ्य सामने आने के बाद ऑडिट टीमें प्रशासकों के कार्यकाल का पाई-पाई का हिसाब लेने में जुटी हुईं हैं।
ग्राम पंचायतों का ऑडिट अगस्त में शुरू किया गया था और ये जनवरी में पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान काफी बजट खर्च हुआ है। इसका ब्योरा जुटाया जा रहा है।
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- नरेंद्र सिंह, ज्येष्ठ लेखा परीक्षक
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जिले में 496 ग्राम पंचायतें हैं, जिनका पिछला कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को पूरा हो गया था। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिए गए थे। ग्राम पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी बतौर प्रशासक सहायक विकास अधिकारियों को सौंपी गई थी। एक-एक सहायक विकास अधिकारी को कई-कई ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाया गया था। इनमें से तमाम प्रशासकों ने खुले हाथ से ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध बजट को खर्च किया। इसका खुलासा ऑडिट में हुआ है। दरअसल, लेखा परीक्षा विभाग द्वारा जिले की सभी 496 ग्राम पंचायतों का ऑडिट किया जा रहा है, जिसमें अब तक सामने आया है कि प्रशासकों के कार्यकाल में जमकर पैसा खर्च हुआ। प्रशासकों ने ग्राम पंचायत निधि से 25 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च कर डाली। इतनी कम अवधि में प्रशासक बजट व्यय में प्रधानों से कहीं आगे रहे। ये तथ्य सामने आने के बाद ऑडिट टीमें प्रशासकों के कार्यकाल का पाई-पाई का हिसाब लेने में जुटी हुईं हैं।
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ग्राम पंचायतों का ऑडिट अगस्त में शुरू किया गया था और ये जनवरी में पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान काफी बजट खर्च हुआ है। इसका ब्योरा जुटाया जा रहा है।
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- नरेंद्र सिंह, ज्येष्ठ लेखा परीक्षक