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मानदेय वृद्धि को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
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झांसी। सोमवार को शहरी क्षेत्र में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय वृद्धि को लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में आशाओं ने अहम भूमिका अदा की है। लेकिन मानदेय के रूप में सिर्फ दो हजार रुपये ही दिए जाते हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में दो सौ से अधिक आशा कार्यकर्ता हैं। आशाओं को टीकाकरण, गर्भवतियों की जांच, गर्भवतियों के प्रसव, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ ही नवजातों के टीकाकरण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके एवज में उनको मानदेय के रूप में दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाता है। आशा काफी समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहीं हैं। मानदेय नहीं बढ़ाने पर सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसमें मानदेय बीस हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई।
दो हजार रुपये में घर चलाना बड़ा मुश्किल होता है। कई आशा आर्थिक रूप से काफी परेशान हैं। मानदेय बढ़ाने के साथ ही आशाओं का बीमा भी होना चाहिए।
ऊषा वर्मा
कोरोना काल के दौरान रोजाना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा था। तबहम लोगों ने कोरोना मरीजों को घर जाकर दवाएं वितरित करने के साथ ही हालचाल भी लिया है।
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वंदना यादव
आशाओं के मानदेय को लेकर कई बार जन प्रतिनिधियों के साथ ही प्रशासनिक अफसरों से मांग की जा चुकी है। लेकिन कोई भी अहम कदम नहीं उठाया गया है।
रुखसार आब्दी
दो हजार मानदेय दिया जाता है, वह भी समय पर नहीं आता है। जिससे सभी आशाओं को परेशानी के दौर से गुजरना पड़ता है। मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए।
रश्मि प्रजापति
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में दो सौ से अधिक आशा कार्यकर्ता हैं। आशाओं को टीकाकरण, गर्भवतियों की जांच, गर्भवतियों के प्रसव, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ ही नवजातों के टीकाकरण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके एवज में उनको मानदेय के रूप में दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाता है। आशा काफी समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहीं हैं। मानदेय नहीं बढ़ाने पर सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसमें मानदेय बीस हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई।
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दो हजार रुपये में घर चलाना बड़ा मुश्किल होता है। कई आशा आर्थिक रूप से काफी परेशान हैं। मानदेय बढ़ाने के साथ ही आशाओं का बीमा भी होना चाहिए।
ऊषा वर्मा
कोरोना काल के दौरान रोजाना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा था। तबहम लोगों ने कोरोना मरीजों को घर जाकर दवाएं वितरित करने के साथ ही हालचाल भी लिया है।
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वंदना यादव
आशाओं के मानदेय को लेकर कई बार जन प्रतिनिधियों के साथ ही प्रशासनिक अफसरों से मांग की जा चुकी है। लेकिन कोई भी अहम कदम नहीं उठाया गया है।
रुखसार आब्दी
दो हजार मानदेय दिया जाता है, वह भी समय पर नहीं आता है। जिससे सभी आशाओं को परेशानी के दौर से गुजरना पड़ता है। मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए।
रश्मि प्रजापति