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Jhansi News: बस में सफर कर रही आदिवासी महिला ने सड़क किनारे दिया बच्ची को जन्म
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- मामले की जानकारी लगते ही कलेक्टर ने तत्काल मौके पर पहुंचाई एंबुलेंस
ओरछा। झांसी मार्ग पर सातार नदी किनारे सामने सोमवार को बस में सफर कर रही आदिवसी महिला छोटी कुमारी ने तेज प्रसव पीड़ा होने पर सड़क किनारे बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान कुछ अजनबी महिलाओं ने मानवीयता की मिसाल पेश की और मदद के लिए आगे आईं। जैसे ही मामले की जानकारी निवाड़ी कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ को लगी। उन्होंने तत्काल मौके पर एंबुलेंस पहुंचाई।
छोटी कुमारी आदिवासी अपने पति सनी और चचेरी बहन चंदी बहेलिया के साथ फर्रुखाबाद से झांसी आई थी। झांसी में उसकी डिलिवरी होनी थी, लेकिन डॉक्टरों ने पहले अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। आर्थिक या अन्य कारणों से उन्होंने अल्ट्रासाउंड नहीं कराया और झांसी से टीकमगढ़ के लिए केजीएल बस से रवाना हो गई। बस से यात्रा के दौरान जब वह सोमवार सुबह करीब 9.50 बजे ओरछा के सातार स्मारक के पास पहुंचीं तो उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। दर्द असहनीय होता गया, जिससे मजबूर होकर बस से उतरना पड़ा। सड़क किनारे स्थित एमजी ढाबा और सातार स्मारक के बीच उन्होंने बच्ची को जन्म दिया। यह समय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ओरछा के स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से इसे संभाल लिया गया। जैसे ही इसकी जानकारी कलेक्टर लोकेश कुमार को लगी उन्होंने तत्काल एम्बुलेंस मौके पर पहुंचाई।
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ओरछा। झांसी मार्ग पर सातार नदी किनारे सामने सोमवार को बस में सफर कर रही आदिवसी महिला छोटी कुमारी ने तेज प्रसव पीड़ा होने पर सड़क किनारे बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान कुछ अजनबी महिलाओं ने मानवीयता की मिसाल पेश की और मदद के लिए आगे आईं। जैसे ही मामले की जानकारी निवाड़ी कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ को लगी। उन्होंने तत्काल मौके पर एंबुलेंस पहुंचाई।
छोटी कुमारी आदिवासी अपने पति सनी और चचेरी बहन चंदी बहेलिया के साथ फर्रुखाबाद से झांसी आई थी। झांसी में उसकी डिलिवरी होनी थी, लेकिन डॉक्टरों ने पहले अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। आर्थिक या अन्य कारणों से उन्होंने अल्ट्रासाउंड नहीं कराया और झांसी से टीकमगढ़ के लिए केजीएल बस से रवाना हो गई। बस से यात्रा के दौरान जब वह सोमवार सुबह करीब 9.50 बजे ओरछा के सातार स्मारक के पास पहुंचीं तो उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। दर्द असहनीय होता गया, जिससे मजबूर होकर बस से उतरना पड़ा। सड़क किनारे स्थित एमजी ढाबा और सातार स्मारक के बीच उन्होंने बच्ची को जन्म दिया। यह समय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ओरछा के स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से इसे संभाल लिया गया। जैसे ही इसकी जानकारी कलेक्टर लोकेश कुमार को लगी उन्होंने तत्काल एम्बुलेंस मौके पर पहुंचाई।
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