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Jhansi News: आंधी की जरा सी थपकी और बिजली झपकी, जगह-जगह टूटे जुगाड़ से जोड़े तार

Fri, 16 May 2025 01:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 01:57 AM IST
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A slight thump of the storm and lightning struck, the wires connected by Jugaad got torn into pieces
संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। जरा सी आंधी आने पर भी शहर में घंटों बिजली गुल हो रही है। एक-दो मोहल्लों में नहीं, शहर के बड़े हिस्से की आबादी को आपूर्ति ठप होने से परेशानी उठानी पड़ रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि विभाग के अफसरों के पास एक तो मैन पावर की कमी है, वहीं पर्याप्त संसाधन भी नहीं है। मजबूरी में कर्मचारियों को बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर आदि की मरम्मत में जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है।

15 मई को दोपहर एक बजे थोड़ी देर के लिए चली तेज हवा से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई। लाइन टूटने से क्षेत्र में करीब तीन घंटे तक बत्ती गुल रही। 11 मई को शहर में आई आंधी-बारिश में सुधार कार्य की कलई खुल गई। हाल यह रहा कि देर रात तक आधे शहर की बिजली गुल रही। आपूर्ति शुरू हुई तो ट्रिपिंग की समस्या ने लोगों को परेशान कर रखा। इसके अलावा, तीन और पांच मई को आई आंधी के बाद भी इसी प्रकार से लोगों को कटौती का सामना करना पड़ा था।
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बिजली विभाग आंधी-बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदा में हुए नुकसान की मरम्मत के लिए हर साल अधिशासी अभियंता स्तर पर 5 लाख रुपये खर्च करता है। इसके अलावा, सप्लाई ऑर्डर मद में भी हर माह डेढ़ लाख रुपये खर्च किए जा सकते हैं। यह काम टेंडर के माध्यम से होता है। यह प्रक्रिया वित्तीय वर्ष की शुरुआत में हो जानी चाहिए, लेकिन अप्रैल के साथ मई का एक पखवाड़ा गुजरने वाला है, इस मद से खर्च का कहीं कुछ अता-पता नहीं है।
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उधर, आउटसोर्स कर्मचारियों की भी छंटनी कर दी गई है। इसका असर बिजली सुधार कार्य पर पड़ रहा है। जो कार्य दो घंटे में सुधर सकता था, उसके लिए पूरे-पूरे दिन लग जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई-कई दिनों तक फाल्ट सुधर नहीं पा रहे हैं। मरम्मत या किसी कार्य के लिए सामग्री विभागीय स्टोर से प्राप्त की जाती है, लेकिन सामान को लाने-ले जाने और कार्य कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया अभी तक अपनाई नहीं गई है।



शिकायतों में 10 गुना इजाफा



पिछले दो माह पूर्व बिजली कटौती की शिकायतें कम थीं। कंट्रोल रूम में भी 10-15 शिकायतें बमुश्किल प्राप्त हो रही थीं, लेकिन आज स्थिति यह है कि कंट्रोल रूम में शिकायतों का अंबार है। रोजाना 100 से अधिक शिकायतें यहां पहुंच रही हैं। सभी उपभोक्ता बिजली न आने की शिकायतें कर रहे हैं।



बॉक्स में -

मरम्मत कार्य में ये सामग्री रहती है महत्वपूर्ण

इंसुलेटर : आंधी-बारिश में इंसुलेटर ही सबसे ज्यादा खराब होते हैं। इन्हें बदलना बेहद जरूरी होता है क्योंकि तार इन्हीं के सहारे बंधे होते हैं, जो अर्थ फाल्ट होने से बचाते हैं।

कंडक्टर वायर : कंडक्टर वायर मौके पर उपलब्ध न होने पर तारों में तार का टुकड़ा डालकर सतही तौर पर लाइन चालू कर दिया जाता है। आंधी-बारिश में यही लाइन अक्सर टूटती है और फाल्ट आ जाता है।


डिस्क : गोलाकार चीनी मिट्टी का बना यह उपकरण तारों को बांधने के काम आता है। इससे तार आपस में टकराते नहीं हैं।

क्रॉस आर्म : क्रॉस आर्म तारों को आपस में टकराने से बचाने का काम करता है। इसके न होने से तार आपस में टकराते हैं और फाल्ट होता है।



वर्जन -

बारिश और तेज हवा का चलना प्राकृतिक आपदा है। लाइनों पर पेड़ गिरेंगे तो स्वाभाविक है आपूर्ति बाधित होगी। मरम्मत कराने की जिम्मेदारी जेई-एसडीओ की है। दैवीय आपदा के तहत पांच लाख रुपये सालाना खर्च किए जाते हैं, लेकिन अभी वह टेंडर नहीं हुआ है। - चंद्रजीत प्रसाद, अधीक्षण अभियंता नगर, विद्युत वितरण मंडल, झांसी
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