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माता-पिता के समक्ष सिर झुकाने से मिटते हैं पाप
Jhansi
Updated Sun, 23 Nov 2014 05:30 AM IST
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झांसी। कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि बच्चों को जीवन में अच्छे संस्कार सीखने के लिए श्रीराम के चरित्र का अध्ययन करना चाहिए। सत्संग व धार्मिक आयोजनों में युवाओं व बच्चों को शामिल करने का प्रयास करें, ताकि वे चरित्रवान बन सकें।
खातीबाबा स्थित श्री सिद्धाश्रम गौड़ बाबा में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में शनिवार को उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कई आदर्श उदाहरण हैं, जिन्हें युवा व बच्चों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। हमारी संस्कृति में कहा गया है कि माता-पिता व बुजुर्गों से सिर झुकाकर आशीष लेने वाले बच्चे जीवन में बुलंदियों को छूते हैं। उन्हें अपने माता-पिता व बुजुर्गों से आत्मिक भाव से आशीर्वाद मिलता है। सिर झुकाकर आशीष लेना इसलिए भी आवश्यक है, क्यों कि पाप सिर पर हावी रहता है, जब हम माता-पिता और भगवान के चरणों में सिर झुकाते है, तब यह पाप स्वत: खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि झुकना शान है और अकड़ना मृत समान है। कथा श्रवण व सत्संग से बच्चों एवं बड़ों को निष्पाप बनने की प्रेरणा मिलती है। यह धर्म का बोध कराती है और चरित्र का निर्माण इसी से होता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसे धार्मिक आयोजनों में साथ लेकर आएं, ताकि वे ज्ञान की बातें समझ सकें।
इस अवसर पर मनोज गुप्ता, मैथिली शरण मुदगिल, सियाराम शरण चतुर्वेदी, बंटू मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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खातीबाबा स्थित श्री सिद्धाश्रम गौड़ बाबा में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में शनिवार को उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कई आदर्श उदाहरण हैं, जिन्हें युवा व बच्चों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। हमारी संस्कृति में कहा गया है कि माता-पिता व बुजुर्गों से सिर झुकाकर आशीष लेने वाले बच्चे जीवन में बुलंदियों को छूते हैं। उन्हें अपने माता-पिता व बुजुर्गों से आत्मिक भाव से आशीर्वाद मिलता है। सिर झुकाकर आशीष लेना इसलिए भी आवश्यक है, क्यों कि पाप सिर पर हावी रहता है, जब हम माता-पिता और भगवान के चरणों में सिर झुकाते है, तब यह पाप स्वत: खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि झुकना शान है और अकड़ना मृत समान है। कथा श्रवण व सत्संग से बच्चों एवं बड़ों को निष्पाप बनने की प्रेरणा मिलती है। यह धर्म का बोध कराती है और चरित्र का निर्माण इसी से होता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसे धार्मिक आयोजनों में साथ लेकर आएं, ताकि वे ज्ञान की बातें समझ सकें।
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इस अवसर पर मनोज गुप्ता, मैथिली शरण मुदगिल, सियाराम शरण चतुर्वेदी, बंटू मिश्रा आदि मौजूद रहे।