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बाप रे! हाउस टैक्स का बिल सवा छह लाख रुपये
Jhansi
Updated Tue, 11 Nov 2014 05:30 AM IST
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झांसी। नगर निगम ने एक व्यक्ति को हाउस टैक्स का बिल सवा छह लाख रुपये भेज दिया है। अब गृहस्वामी परेशान है और सुधार के लिए विभाग के चक्कर लगा रहा है। लेकिन, स्टाफ ‘सेटिंग’ के चक्कर में है।
मार्च नजदीक आने के कारण नगर निगम का टैक्स विभाग गृहस्वामियों को हाउस टैक्स के बिल तैयार कर भेज रहा है, ताकि मार्च के पहले लक्ष्य के सापेक्ष वसूली हो जाए। लेकिन, बिल भेजने के नाम पर गृहस्वामियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। मनमाने तरीके से बिल की फीडिंग हो रही है। परिणाम स्वरूप गृहस्वामियों को लाखों का बकायेदार दिखाया जा रहा है।
ऐसे ही एक मामले में हंसारी निवासी राजेंद्र सिंह यादव को जब हाउस टैक्स बकाया का बिल मिला तो वह घबरा गए। उन्होंने बताया कि उनका मकान महज 1800 वर्ग फीट में एक मंजिल का बना है। मकान उन्होंने वर्ष 2010 में बनवाया था, लेकिन विभाग ने उनके ऊपर 6,24,456 रुपये गृहकर बकाया का बिल भेज दिया है। वह बिल सही कराने के लिए विभाग में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी सेटिंग के माध्यम से बिल कम करने का झांसा दे रहे हैं। वह सोमवार को नगर आयुक्त से मामले की शिकायत करने आए थे, लेकिन वह कार्यालय में नहीं मिले।
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गृहकर के ‘दलाल’ सक्रिय
झांसी। मार्च नजदीक आते ही गृहकर के बिल भेजे जाने लगते हैं। जानबूझकर लोगों को बढ़ा हुआ बिल भेजा जाता है। जब पीड़ित पक्ष परेशान होकर नगर निगम के चक्कर लगाता है तो कर्मियों के ‘दलाल’ सक्रिय हो जाते हैं और मामला सेट कर लेते हैं। बिल वितरण के सीजन में कर्मचारियों की प्रत्येक वर्ष बल्ले- बल्ले होती है। पिछले दिनों एक पूर्व पार्षद और बिल कलेक्टर के बीच इसी तरह का विवाद हो गया था। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
‘दलालों’ से बचने को स्वकर पुस्तिका पढ़ें
झांसी। दलालों से बचने के लिए गृहकर दाताओं को बीस रुपये खर्च कर स्वकर की किताब पढ़नी चाहिए। इसमें मकान पर लगने वाले हाउस टैक्स की पूरी जानकारी दी गई है। किस वार्ड में और कितने फीट चौड़ी सड़क पर मकान है, उसका वार्ड के हिसाब से रेट तय हैं। मकान मारबल का है या सादा फर्श है या फिर पत्थर की छत पड़ी है। पुस्तिका में पूरा ब्योरा है। यह पुस्तिका नगर निगम में उपलब्ध है।
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मार्च नजदीक आने के कारण नगर निगम का टैक्स विभाग गृहस्वामियों को हाउस टैक्स के बिल तैयार कर भेज रहा है, ताकि मार्च के पहले लक्ष्य के सापेक्ष वसूली हो जाए। लेकिन, बिल भेजने के नाम पर गृहस्वामियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। मनमाने तरीके से बिल की फीडिंग हो रही है। परिणाम स्वरूप गृहस्वामियों को लाखों का बकायेदार दिखाया जा रहा है।
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ऐसे ही एक मामले में हंसारी निवासी राजेंद्र सिंह यादव को जब हाउस टैक्स बकाया का बिल मिला तो वह घबरा गए। उन्होंने बताया कि उनका मकान महज 1800 वर्ग फीट में एक मंजिल का बना है। मकान उन्होंने वर्ष 2010 में बनवाया था, लेकिन विभाग ने उनके ऊपर 6,24,456 रुपये गृहकर बकाया का बिल भेज दिया है। वह बिल सही कराने के लिए विभाग में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी सेटिंग के माध्यम से बिल कम करने का झांसा दे रहे हैं। वह सोमवार को नगर आयुक्त से मामले की शिकायत करने आए थे, लेकिन वह कार्यालय में नहीं मिले।
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गृहकर के ‘दलाल’ सक्रिय
झांसी। मार्च नजदीक आते ही गृहकर के बिल भेजे जाने लगते हैं। जानबूझकर लोगों को बढ़ा हुआ बिल भेजा जाता है। जब पीड़ित पक्ष परेशान होकर नगर निगम के चक्कर लगाता है तो कर्मियों के ‘दलाल’ सक्रिय हो जाते हैं और मामला सेट कर लेते हैं। बिल वितरण के सीजन में कर्मचारियों की प्रत्येक वर्ष बल्ले- बल्ले होती है। पिछले दिनों एक पूर्व पार्षद और बिल कलेक्टर के बीच इसी तरह का विवाद हो गया था। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
‘दलालों’ से बचने को स्वकर पुस्तिका पढ़ें
झांसी। दलालों से बचने के लिए गृहकर दाताओं को बीस रुपये खर्च कर स्वकर की किताब पढ़नी चाहिए। इसमें मकान पर लगने वाले हाउस टैक्स की पूरी जानकारी दी गई है। किस वार्ड में और कितने फीट चौड़ी सड़क पर मकान है, उसका वार्ड के हिसाब से रेट तय हैं। मकान मारबल का है या सादा फर्श है या फिर पत्थर की छत पड़ी है। पुस्तिका में पूरा ब्योरा है। यह पुस्तिका नगर निगम में उपलब्ध है।