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जीआरपी को कई घंटे किशोरी ने छकाया
Jhansi
Updated Sun, 04 May 2014 05:30 AM IST
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झांसी। भटकते हुए जीआरपी थाने पहुंची एक किशोरी अपना सही पता बताने में घंटों पुलिस को छकाती रही। सात घंटे की मशक्कत के बाद जीआरपी किशोरी के पिता तक पहुंच सकी। बाद में किशोरी को नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे आवश्यक कार्रवाई के बाद मऊरानीपुर में रहने वाले अधिवक्ता पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
शनिवार सुबह एक खूबसूरत किशोरी जीआरपी थाने पहुंच गई। उसने अपना नाम माया द्विवेदी निवासी चांदनी चौक नई दिल्ली बताया। उसने बताया कि उसके पिता चांदनी चौक में ही एक चप्पल की दुकान में काम करते हैं। परसों सुबह वह बिना बताए घर से निकल आई और भटकती हुई यहां तक आ गई। अब उसे घर की याद आ रही है। चूंकि, मामला किशोरी से जुड़ा था, इस कारण जीआरपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। तुरंत ही इंस्पेक्टर एन एस सेंगर ने चांदनी चौक थाना प्रभारी निरीक्षक से संपर्क कर किशोरी के पिता से संपर्क करने का आग्रह किया। चांदनी चौक इंस्पेक्टर ने टीम भेजकर जानकारी हासिल की, मगर न तो उस नाम का व्यक्ति मिला और न ही पता। यह बात इंस्पेक्टर ने जब किशोरी को बताई, तो वह अपने बयान से पलट गई। इस बार उसने बताया कि वह भोपाल में रहती थी, मगर मां बाप के मरने के बाद पुलिया नंबर नौ में रहने वाले बहन जीजा के पास रह रही है। दो दिन पहले बहन की सास से झगड़ा होने पर वह घर छोड़कर चली आई। अब वह वापस जाना चाहती है। जीआरपी की एक टीम के साथ उसे पुलिया नंबर नौ भेजा गया। जीआरपी को काफी समय तक इधर- उधर भटकाने के बाद उसने बताया कि वह पुलिया नंबर नौ नहीं इलाइट के पास स्थित एक होटल के पास रहती है। जीआरपी उसे वहां भी लेकर पहुंची, लेकिन वहां भी वह अपने बयान से पलट गई। इस बार उसने अपने को सकरार में रहने वाले एक दलित परिवार का बताया। उसने कहा कि सकरार में रहने वाले उसके मां बाप दो साल पहले मर चुके हैं। वह सकरार में ही अपनी बहन के पास रह रही है। घर से भूल वश यहां तक आ गई।
इस पर सकरार थाने से संपर्क किया गया, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। पूछताछ के दौरान किशोरी ने कुछ मोबाइल नंबर भी बताए। इनमें एक मोबाइल नंबर अमृतसर का तो दूसरा वाराणसी का निकला। आखिर में उसने एक मोबाइल नंबर बताया, जो मऊरानीपुर में रहने वाले एक अधिवक्ता का निकला। अधिवक्ता ने बताया कि वह उसी की बेटी है और परसों से गायब चल रही थी। सूचना पर किशोरी के पिता झांसी आ गए।
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शनिवार सुबह एक खूबसूरत किशोरी जीआरपी थाने पहुंच गई। उसने अपना नाम माया द्विवेदी निवासी चांदनी चौक नई दिल्ली बताया। उसने बताया कि उसके पिता चांदनी चौक में ही एक चप्पल की दुकान में काम करते हैं। परसों सुबह वह बिना बताए घर से निकल आई और भटकती हुई यहां तक आ गई। अब उसे घर की याद आ रही है। चूंकि, मामला किशोरी से जुड़ा था, इस कारण जीआरपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। तुरंत ही इंस्पेक्टर एन एस सेंगर ने चांदनी चौक थाना प्रभारी निरीक्षक से संपर्क कर किशोरी के पिता से संपर्क करने का आग्रह किया। चांदनी चौक इंस्पेक्टर ने टीम भेजकर जानकारी हासिल की, मगर न तो उस नाम का व्यक्ति मिला और न ही पता। यह बात इंस्पेक्टर ने जब किशोरी को बताई, तो वह अपने बयान से पलट गई। इस बार उसने बताया कि वह भोपाल में रहती थी, मगर मां बाप के मरने के बाद पुलिया नंबर नौ में रहने वाले बहन जीजा के पास रह रही है। दो दिन पहले बहन की सास से झगड़ा होने पर वह घर छोड़कर चली आई। अब वह वापस जाना चाहती है। जीआरपी की एक टीम के साथ उसे पुलिया नंबर नौ भेजा गया। जीआरपी को काफी समय तक इधर- उधर भटकाने के बाद उसने बताया कि वह पुलिया नंबर नौ नहीं इलाइट के पास स्थित एक होटल के पास रहती है। जीआरपी उसे वहां भी लेकर पहुंची, लेकिन वहां भी वह अपने बयान से पलट गई। इस बार उसने अपने को सकरार में रहने वाले एक दलित परिवार का बताया। उसने कहा कि सकरार में रहने वाले उसके मां बाप दो साल पहले मर चुके हैं। वह सकरार में ही अपनी बहन के पास रह रही है। घर से भूल वश यहां तक आ गई।
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इस पर सकरार थाने से संपर्क किया गया, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। पूछताछ के दौरान किशोरी ने कुछ मोबाइल नंबर भी बताए। इनमें एक मोबाइल नंबर अमृतसर का तो दूसरा वाराणसी का निकला। आखिर में उसने एक मोबाइल नंबर बताया, जो मऊरानीपुर में रहने वाले एक अधिवक्ता का निकला। अधिवक्ता ने बताया कि वह उसी की बेटी है और परसों से गायब चल रही थी। सूचना पर किशोरी के पिता झांसी आ गए।
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