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क्रीड़ा श्री ने मांगा 12,000 रुपये मानदेय
Jhansi
Updated Tue, 13 Aug 2013 05:36 AM IST
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झांसी। भारत सरकार के खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान योजना (पायका) के तहत गांवों में कार्यरत क्रीड़ा श्री ने सोमवार को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा, जिसके जरिये उन्होंने विभिन्न मांगें रखीं।
क्रीड़ा श्री ने बताया कि ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए उनकी तैनाती की गई है। सरकार के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वह पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। खेल उपकरणों व खेल मैदानों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन पर है। बावजूद, सरकार का रुख उदासीन है, जिससे वह बदहाली की स्थिति में हैं। मानदेय के रूप में प्रतिमाह उन्हें महज 500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह भत्ता नाकाफी है। उन्होंने सरकार से मानदेय बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने, प्रति वर्ष नवीनीकरण की प्रक्रिया समाप्त किए जाने, व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति में क्रीड़ा श्री को वरीयता दिए जाने व प्रत्येक क्रीड़ा श्री को न्यूनतम छह माह का प्रशिक्षण, मानदेय सीधा बैंक खाते में भेजे जाने, चयनित ग्रामों में स्टोर रूम व व्यायामशालाओं का निर्माण कराए जाने, खेल उपकरणों की खरीदारी क्रीड़ा श्री के माध्यम से किए जाने, योजना के खाते का संचालन क्रीड़ा श्री व क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षरों से किए जाने, खेल मैदानों पर बाउंड्रीवाल निर्माण व समतलीकरण किए जाने, खेल प्रतियोगिताओं में क्रीड़ा श्री को निर्णायक बनाए जाने आदि मांगें रखीं।
ज्ञापन देने वालों में कमलेश सेन, रामप्रताप सिंह, अनिल कुमार, रामनारायण, रामबाबू सिंह, कोमल चंद्र, संजीव यादव, कल्पना दुबे, जामन प्रसाद, भूपेंद्र कुमार, जितेंद्र द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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क्रीड़ा श्री ने बताया कि ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए उनकी तैनाती की गई है। सरकार के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वह पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। खेल उपकरणों व खेल मैदानों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन पर है। बावजूद, सरकार का रुख उदासीन है, जिससे वह बदहाली की स्थिति में हैं। मानदेय के रूप में प्रतिमाह उन्हें महज 500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह भत्ता नाकाफी है। उन्होंने सरकार से मानदेय बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने, प्रति वर्ष नवीनीकरण की प्रक्रिया समाप्त किए जाने, व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति में क्रीड़ा श्री को वरीयता दिए जाने व प्रत्येक क्रीड़ा श्री को न्यूनतम छह माह का प्रशिक्षण, मानदेय सीधा बैंक खाते में भेजे जाने, चयनित ग्रामों में स्टोर रूम व व्यायामशालाओं का निर्माण कराए जाने, खेल उपकरणों की खरीदारी क्रीड़ा श्री के माध्यम से किए जाने, योजना के खाते का संचालन क्रीड़ा श्री व क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षरों से किए जाने, खेल मैदानों पर बाउंड्रीवाल निर्माण व समतलीकरण किए जाने, खेल प्रतियोगिताओं में क्रीड़ा श्री को निर्णायक बनाए जाने आदि मांगें रखीं।
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ज्ञापन देने वालों में कमलेश सेन, रामप्रताप सिंह, अनिल कुमार, रामनारायण, रामबाबू सिंह, कोमल चंद्र, संजीव यादव, कल्पना दुबे, जामन प्रसाद, भूपेंद्र कुमार, जितेंद्र द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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