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मीटर में कारस्तानी करने वाले हो जाएं सावधान
Jhansi
Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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झांसी। मीटर में कारस्तानी करने वाले सावधान हो जाएं। बिजली विभाग ने महानगर में शत प्रतिशत इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने के बाद भी राजस्व न बढ़ने के कारणों की जांच का निर्णय लिया है। इसके लिए अधिशासी अभियंता प्रथम व द्वितीय के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें जनवरी माह में मीटरों की चेकिंग करेंगी।
विद्युत विभाग ने पिछले डेढ़ साल में शहर के करीब बीस हजार मेेकेनिकल मीटरों की जगह इलेक्ट्रानिक मीटर लगवाए। इसके बाद भी राजस्व साढ़े ग्यारह से बारह करोड़ के बीच अटका हुआ है। जबकि महानगर में एक माह में चौदह करोड़ की बिजली का उपयोग हा रहा है। ऐसे में अफसरों का मानना है कि तमाम उपभोक्ताओं ने खपत कम दिखाकर बिजली चोरी करने के चक्कर में मीटरों को धीमा करा लिया है, जिससे विभाग को लाखों की चपत लग रही है। पिछले चार माह में विद्युत विजिलेंस व अवर अभियंताओं द्वारा की गई चेकिंग में सौ से अधिक मामले मीटर में कारस्तानी के पकड़े भी गए। इस तरह हो रही बिजली चोरी को पकड़ने के लिए विद्युत अधिकारियों ने अब जनवरी माह से मीटर चेकिंग कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए विद्युत वितरण खंड प्रथम व द्वितीय के अधिशासी अभियंताओं के नेतृृत्व में टीम का गठन किया गया है। यह टीम सबसे पहले ऐसे उपभोक्ताओं के संयोजन चेक करेगी, जिनके बिल कम यूनिट के आ रहे हैं। जैसे कि एक किलोवाट के संयोजन पर कम से कम सौ यूनिट का बिल अवश्य आना चाहिए।
पहले आठ सौ मीटरों में पकड़ी गई थी कारस्तानी
वर्ष 2008 में दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने उपभोक्ताओं के मीटरों में कारस्तानी पकड़ने के लिए मीटर बनाने वाली सिक्योर कंपनी को जांच का ठेका दिया था। कंपनी की एक्सपर्ट टीम ने दो माह में पांच हजार मीटर चेक किए थे, जिनमें से आठ सौ में कारस्तानी पकड़ी गई थी। इन उपभोक्ताओं को नोटिस जारी करने के बाद उनके मीटर बदल दिए गए थे और करीब एक करोड़ रुपये शमन शुल्क वसूला गया था।
विद्युत विभाग ने पिछले डेढ़ साल में शहर के करीब बीस हजार मेेकेनिकल मीटरों की जगह इलेक्ट्रानिक मीटर लगवाए। इसके बाद भी राजस्व साढ़े ग्यारह से बारह करोड़ के बीच अटका हुआ है। जबकि महानगर में एक माह में चौदह करोड़ की बिजली का उपयोग हा रहा है। ऐसे में अफसरों का मानना है कि तमाम उपभोक्ताओं ने खपत कम दिखाकर बिजली चोरी करने के चक्कर में मीटरों को धीमा करा लिया है, जिससे विभाग को लाखों की चपत लग रही है। पिछले चार माह में विद्युत विजिलेंस व अवर अभियंताओं द्वारा की गई चेकिंग में सौ से अधिक मामले मीटर में कारस्तानी के पकड़े भी गए। इस तरह हो रही बिजली चोरी को पकड़ने के लिए विद्युत अधिकारियों ने अब जनवरी माह से मीटर चेकिंग कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए विद्युत वितरण खंड प्रथम व द्वितीय के अधिशासी अभियंताओं के नेतृृत्व में टीम का गठन किया गया है। यह टीम सबसे पहले ऐसे उपभोक्ताओं के संयोजन चेक करेगी, जिनके बिल कम यूनिट के आ रहे हैं। जैसे कि एक किलोवाट के संयोजन पर कम से कम सौ यूनिट का बिल अवश्य आना चाहिए।
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पहले आठ सौ मीटरों में पकड़ी गई थी कारस्तानी
वर्ष 2008 में दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने उपभोक्ताओं के मीटरों में कारस्तानी पकड़ने के लिए मीटर बनाने वाली सिक्योर कंपनी को जांच का ठेका दिया था। कंपनी की एक्सपर्ट टीम ने दो माह में पांच हजार मीटर चेक किए थे, जिनमें से आठ सौ में कारस्तानी पकड़ी गई थी। इन उपभोक्ताओं को नोटिस जारी करने के बाद उनके मीटर बदल दिए गए थे और करीब एक करोड़ रुपये शमन शुल्क वसूला गया था।
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