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असमंजस में हैं नगर निगम के संविदा कर्मी
Jhansi
Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। नगर निगम में तैनात दो दर्जन संविदा कर्मियों को हटाने को लेकर असमंजस के हालात हैं। शासन के आदेश के क्रम में स्थानीय प्रशासन द्वारा कर्मचारियों को कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया, ऐसे में एक अगस्त से उनकी ड्यूटी को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव प्रवीर कुमार ने पिछले दिनों आदेश जारी किया था कि निकायों में नियम विरुद्ध तैनात किए गए संविदा कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए और किसी भी स्थिति में उनका अगस्त माह का वेतन आहरित न किया जाए। आदेश में संविदा पर तैनात सफाई कर्मियों और कोर्ट के आदेश से काम कर रहे संविदा कर्मियों को न हटाने के लिए कहा गया था। इस हिसाब से नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग में तैनात 22 कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। निगम प्रशासन ने इन कर्मियों के बारे में शासन में सूचना भेज दी थी। साथ ही 134 सफाई मजदूरों का ब्योरा भी भेज दिया था। इधर, 31 जुलाई की शाम तक निगम प्रशासन द्वारा संविदा कर्मियों को हटाने संबंधी कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। इन हालातों में कर्मचारी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह एक अगस्त से ड्यूटी करेंगे या नहीं। दरअसल, अगर ड्यूटी करते हैं तो शासनादेश के हिसाब से उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। वहीं, बिना लिखित आदेश के वह ड्यूटी पर आना बंद नहीं करेंगे। ऐसे में असमंजस बरकरार है। माना जा रहा है कि एक अगस्त को नगर आयुक्त के लखनऊ से लौटने के बाद ही कोई आदेश जारी किया जाएगा।
कार्य प्रभावित होगा
झांसी। मार्ग प्रकाश विभाग में पहले से ही कर्मचारियों की कमी चल रही है। अगर, एक साथ 22 कर्मचारी और हट जाएंगे तो व्यवस्था पटरी से उतर जाएगी। खासकर स्ट्रीट लाइटें जलाने और बुझाने की प्रक्रिया लगभग ठप हो जाएगी। बताते चलें कि 22 कर्मचारी हट जाने से विभाग में नौ स्थायी कर्मचारी और कोर्ट के आदेश पर तैनात एक कर्मी ही शेष बचेगा।
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आउट सोर्सिंग पर रखे जाएंगे
झांसी। यदि संविदा कर्मियों को हटाया जाता है तो कार्य को सुचारु रखने के लिए आउट सोर्सिंग पर कर्मचारी रखने पड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि अफसरों ने इन्हीं संविदा कर्मियों को आउट सोर्सिंग (ठेके) पर रखने की रणनीति तय की है।
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उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव प्रवीर कुमार ने पिछले दिनों आदेश जारी किया था कि निकायों में नियम विरुद्ध तैनात किए गए संविदा कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए और किसी भी स्थिति में उनका अगस्त माह का वेतन आहरित न किया जाए। आदेश में संविदा पर तैनात सफाई कर्मियों और कोर्ट के आदेश से काम कर रहे संविदा कर्मियों को न हटाने के लिए कहा गया था। इस हिसाब से नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग में तैनात 22 कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। निगम प्रशासन ने इन कर्मियों के बारे में शासन में सूचना भेज दी थी। साथ ही 134 सफाई मजदूरों का ब्योरा भी भेज दिया था। इधर, 31 जुलाई की शाम तक निगम प्रशासन द्वारा संविदा कर्मियों को हटाने संबंधी कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। इन हालातों में कर्मचारी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह एक अगस्त से ड्यूटी करेंगे या नहीं। दरअसल, अगर ड्यूटी करते हैं तो शासनादेश के हिसाब से उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। वहीं, बिना लिखित आदेश के वह ड्यूटी पर आना बंद नहीं करेंगे। ऐसे में असमंजस बरकरार है। माना जा रहा है कि एक अगस्त को नगर आयुक्त के लखनऊ से लौटने के बाद ही कोई आदेश जारी किया जाएगा।
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कार्य प्रभावित होगा
झांसी। मार्ग प्रकाश विभाग में पहले से ही कर्मचारियों की कमी चल रही है। अगर, एक साथ 22 कर्मचारी और हट जाएंगे तो व्यवस्था पटरी से उतर जाएगी। खासकर स्ट्रीट लाइटें जलाने और बुझाने की प्रक्रिया लगभग ठप हो जाएगी। बताते चलें कि 22 कर्मचारी हट जाने से विभाग में नौ स्थायी कर्मचारी और कोर्ट के आदेश पर तैनात एक कर्मी ही शेष बचेगा।
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आउट सोर्सिंग पर रखे जाएंगे
झांसी। यदि संविदा कर्मियों को हटाया जाता है तो कार्य को सुचारु रखने के लिए आउट सोर्सिंग पर कर्मचारी रखने पड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि अफसरों ने इन्हीं संविदा कर्मियों को आउट सोर्सिंग (ठेके) पर रखने की रणनीति तय की है।