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950 हेक्टेयर में लगेंगे 8.65 लाख पौधे
ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2016 01:09 AM IST
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झांसी। पूरे प्रदेश में एक दिन में छह करोड़ पौधों का रोपण कर गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकार्ड में सरकार नाम दर्ज कराएगी। शासन के इस संकल्प में सहभागिता निभाने के लिए जिले में आठ लाख पैंसठ हजार पौधों का रोपण होगा। पौधरोपण वन विभाग की 950 हेक्टेयर भूमि में किया जाएगा।
पौधरोपण के लिए मनरेगा से वन विभाग के लिए दो करोड़ बीस लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। अभियान में मनरेगा से छह लाख सोलह हजार तीन सौ पौधे तथा वन विभाग द्वारा दो लाख अड़तालीस हजार सात सौ पौधे रोपित किए जाएंगे। पौधरोपण के लिए जुलाई माह में कोई एक तिथि घोषित की जाएगी। पौधरोपण भले ही जुलाई माह में हो, लेकिन उसकी तैयारी अगले माह नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही कर दी जाएगी।
जिन स्थानों पर पौधरोपण किया जाना है, वहां मजदूरों की उपलब्धता की जानकारी एकत्र की जा रही है। रोपवलियों के पास कौन-कौन से गांव हैं, वहां कितने जॉब कार्ड धारक हैं, इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर ही काम की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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मजदूर चयन के बाद रोपवलियों में गड्ढा खुदवाने का काम शुरू किया जाएगा, जिसे जून माह तक पूरा करने का लक्ष्य है। गड्ढा खोदने का काम शुरू करने से पहले वन विभाग से इस बात का प्रमाणपत्र लिया जाएगा कि उस स्थान पर पहले पौधरोपण नहीं किया गया है।
साठ हजार से अधिक फलों के पौधे सूखे
जिले में जुलाई 2015 में मनरेगा द्वारा एक लाख सात हजार फलदार पौधों का रोपण किया गया था। जिले के 330 लाभार्थियों के खेतों पर उद्यानीकरण योजना के तहत नींबू, आंवला, अमरूद आदि के पौधे रोपे गए थे। बारिश न होने और सूखा पड़ने के कारण इनमें साठ हजार से अधिक पौधे सूख गए हैं।
मनरेगा उपायुक्त ने बताया कि योजना में एक साल के अंदर पौधे सूखने पर 25 फीसदी पौधों का पुन: रोपण कराने का प्रावधान है। निदेशालय से निर्देश मिलते ही पौधरोपण का काम शुरू करा दिया जाएगा।
लंबित न रखें मनरेगा के प्रपोजल
नवागत जिलाधिकारी अजय शुक्ला ने मनरेगा के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन्हें लंबित न रखा जाए। मनरेगा के नियमानुसार चार दिन में प्रस्तावों को पास करें अथवा आपत्ति होने पर संबंधित को भेज दें। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं से अधिक से अधिक काम मनरेगा के तहत कराने को कहा।
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पौधरोपण के लिए मनरेगा से वन विभाग के लिए दो करोड़ बीस लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। अभियान में मनरेगा से छह लाख सोलह हजार तीन सौ पौधे तथा वन विभाग द्वारा दो लाख अड़तालीस हजार सात सौ पौधे रोपित किए जाएंगे। पौधरोपण के लिए जुलाई माह में कोई एक तिथि घोषित की जाएगी। पौधरोपण भले ही जुलाई माह में हो, लेकिन उसकी तैयारी अगले माह नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही कर दी जाएगी।
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जिन स्थानों पर पौधरोपण किया जाना है, वहां मजदूरों की उपलब्धता की जानकारी एकत्र की जा रही है। रोपवलियों के पास कौन-कौन से गांव हैं, वहां कितने जॉब कार्ड धारक हैं, इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर ही काम की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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मजदूर चयन के बाद रोपवलियों में गड्ढा खुदवाने का काम शुरू किया जाएगा, जिसे जून माह तक पूरा करने का लक्ष्य है। गड्ढा खोदने का काम शुरू करने से पहले वन विभाग से इस बात का प्रमाणपत्र लिया जाएगा कि उस स्थान पर पहले पौधरोपण नहीं किया गया है।
साठ हजार से अधिक फलों के पौधे सूखे
जिले में जुलाई 2015 में मनरेगा द्वारा एक लाख सात हजार फलदार पौधों का रोपण किया गया था। जिले के 330 लाभार्थियों के खेतों पर उद्यानीकरण योजना के तहत नींबू, आंवला, अमरूद आदि के पौधे रोपे गए थे। बारिश न होने और सूखा पड़ने के कारण इनमें साठ हजार से अधिक पौधे सूख गए हैं।
मनरेगा उपायुक्त ने बताया कि योजना में एक साल के अंदर पौधे सूखने पर 25 फीसदी पौधों का पुन: रोपण कराने का प्रावधान है। निदेशालय से निर्देश मिलते ही पौधरोपण का काम शुरू करा दिया जाएगा।
लंबित न रखें मनरेगा के प्रपोजल
नवागत जिलाधिकारी अजय शुक्ला ने मनरेगा के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन्हें लंबित न रखा जाए। मनरेगा के नियमानुसार चार दिन में प्रस्तावों को पास करें अथवा आपत्ति होने पर संबंधित को भेज दें। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं से अधिक से अधिक काम मनरेगा के तहत कराने को कहा।