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रेलवे: 25 दिन में बने 25 कार्ड,,,-Lalitpur
Updated Wed, 05 Jul 2017 08:31 PM IST
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‘स्मार्ट’ क्यों नहीं बनते रेल यात्री?
सब हेड: स्टेशन पर ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन का लाभ उठाएं
क्रासर
25 दिन पहले लगी थी, पर सिर्फ 25 लोगों ने ही ली यह सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जनरल टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्री स्मार्ट बनने को तैयार नहीं है। स्टेशन पर लगाई गईं छह ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों से पिछले पच्चीस दिन में मात्र 25 लोगों ने ही टिकट बनवाई हैं। यहां टिकट खिड़की पर लगने वाली लंबी लाइनों से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए रेलवे ने यह मशीनें लगवाई हैं।
रेलवे स्टेशन 10 जून से छह ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन का संचालन शुरू हो गया था। इसके लिए यात्री को 70 रुपये में स्मार्ट कार्ड बनवाने के बाद मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना है और इसके बाद वह देश के किसी भी स्टेशन के लिए मशीन से जनरल टिकट निकाल सकता है। इस व्यवस्था को चालू हुए 25 दिन बीत गए हैं, इसके बाद भी यात्री स्मार्ट बनने को तैयार नहीं है। अब तक सिर्फ 25 यात्रियों ने ही स्मार्ट कार्ड बनवाए। मशीनों का उद्देश्य पूरा न होने से रेल प्रशासन भी परेशान हैं।
तैनात होंगे टिकट सहायक
यात्रियों को जागरूक और टिकट लेने में मदद करने के लिए प्रत्येक मशीन पर दो टिकट सहायकों की तैनाती करने की योजना बनाई गई हैं। टिकट सहायक 60 से 65 वर्ष उम्र के सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी होंगे। टिकट सहायक को रीचार्ज का पांच प्रतिशत मिलेगा। यानी स्मार्ट कार्ड में दस हजार रुपये रीचार्ज कराने पर पांच प्रतिशत के हिसाब से पांच सौ रुपये मिलेंगे। इनकी तैनाती शाम पांच बजे से सुबह नौ बजे के बीच होगी। यह प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है।
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दुर्गेश दुबे, सीनियर डीसीएम।
फोटो
गाइड होना चाहिए
मशीन देखकर मुझे अच्छा लगा, लेकिन टिकट निकालने की जानकारी नहीं है। मशीन पर गाइड की तैनाती हो जाए, तो यात्री इसका लाभ लेना शुरू कर देंगे।
विमलेश, भोपाल।
फोटो
खिड़की से टिकट भरोसेमंद
मुझे खिड़की से टिकट लेने पर ज्यादा भरोसा है। अगर मशीन से उल्टे-सीधे पैसे कट गए तो फिर शिकायत करते रहो। खिड़की से टिकट लेने में थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन कोई टेंशन तो नहीं रहती।
बृजेश, ललितपुर।
प्रतिदिन बिकते हैं 20 हजार टिकट
झांसी रेलवे स्टेशन पर औसतन प्रतिदिन 20 हजार अनारक्षित टिकट बिकते हैं। इनमें 12 हजार के करीब बुंदेलखंड के अलग- अलग हिस्सों से आने वाले गरीब यात्री रहते हैं।
23 स्टेशनों पर लगना है
रेल मंडल में झांसी समेत 24 स्टेशनों पर 49 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगनी हैं। सभी स्टेशनों के लिए मशीनें आ चुकी हैं, लेकिन बिजली और इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अपने हिस्से का काम पूरा नहीं किए जाने के कारण झांसी को छोड़ सभी स्टेशनों पर मशीनें धूल खा रही हैं। इसमें बांदा, मुरैना, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट धाम, उरई के अलावा मानिकपुर, बबीना, डबरा, दतिया, अतर्रा, खजुराहो, हरपालपुर, शंकरगढ़, मऊरानीपुर, भिंड, रागौल, भरूआ सुमेरपुर, पुखरायां, घाटमपुर, डभौरा और बिरलानगर स्टेशन पर मशीन लगनी है।
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‘स्मार्ट’ क्यों नहीं बनते रेल यात्री?
सब हेड: स्टेशन पर ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन का लाभ उठाएं
क्रासर
25 दिन पहले लगी थी, पर सिर्फ 25 लोगों ने ही ली यह सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जनरल टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्री स्मार्ट बनने को तैयार नहीं है। स्टेशन पर लगाई गईं छह ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों से पिछले पच्चीस दिन में मात्र 25 लोगों ने ही टिकट बनवाई हैं। यहां टिकट खिड़की पर लगने वाली लंबी लाइनों से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए रेलवे ने यह मशीनें लगवाई हैं।
रेलवे स्टेशन 10 जून से छह ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन का संचालन शुरू हो गया था। इसके लिए यात्री को 70 रुपये में स्मार्ट कार्ड बनवाने के बाद मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना है और इसके बाद वह देश के किसी भी स्टेशन के लिए मशीन से जनरल टिकट निकाल सकता है। इस व्यवस्था को चालू हुए 25 दिन बीत गए हैं, इसके बाद भी यात्री स्मार्ट बनने को तैयार नहीं है। अब तक सिर्फ 25 यात्रियों ने ही स्मार्ट कार्ड बनवाए। मशीनों का उद्देश्य पूरा न होने से रेल प्रशासन भी परेशान हैं।
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तैनात होंगे टिकट सहायक
यात्रियों को जागरूक और टिकट लेने में मदद करने के लिए प्रत्येक मशीन पर दो टिकट सहायकों की तैनाती करने की योजना बनाई गई हैं। टिकट सहायक 60 से 65 वर्ष उम्र के सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी होंगे। टिकट सहायक को रीचार्ज का पांच प्रतिशत मिलेगा। यानी स्मार्ट कार्ड में दस हजार रुपये रीचार्ज कराने पर पांच प्रतिशत के हिसाब से पांच सौ रुपये मिलेंगे। इनकी तैनाती शाम पांच बजे से सुबह नौ बजे के बीच होगी। यह प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है।
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दुर्गेश दुबे, सीनियर डीसीएम।
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गाइड होना चाहिए
मशीन देखकर मुझे अच्छा लगा, लेकिन टिकट निकालने की जानकारी नहीं है। मशीन पर गाइड की तैनाती हो जाए, तो यात्री इसका लाभ लेना शुरू कर देंगे।
विमलेश, भोपाल।
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खिड़की से टिकट भरोसेमंद
मुझे खिड़की से टिकट लेने पर ज्यादा भरोसा है। अगर मशीन से उल्टे-सीधे पैसे कट गए तो फिर शिकायत करते रहो। खिड़की से टिकट लेने में थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन कोई टेंशन तो नहीं रहती।
बृजेश, ललितपुर।
प्रतिदिन बिकते हैं 20 हजार टिकट
झांसी रेलवे स्टेशन पर औसतन प्रतिदिन 20 हजार अनारक्षित टिकट बिकते हैं। इनमें 12 हजार के करीब बुंदेलखंड के अलग- अलग हिस्सों से आने वाले गरीब यात्री रहते हैं।
23 स्टेशनों पर लगना है
रेल मंडल में झांसी समेत 24 स्टेशनों पर 49 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगनी हैं। सभी स्टेशनों के लिए मशीनें आ चुकी हैं, लेकिन बिजली और इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अपने हिस्से का काम पूरा नहीं किए जाने के कारण झांसी को छोड़ सभी स्टेशनों पर मशीनें धूल खा रही हैं। इसमें बांदा, मुरैना, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट धाम, उरई के अलावा मानिकपुर, बबीना, डबरा, दतिया, अतर्रा, खजुराहो, हरपालपुर, शंकरगढ़, मऊरानीपुर, भिंड, रागौल, भरूआ सुमेरपुर, पुखरायां, घाटमपुर, डभौरा और बिरलानगर स्टेशन पर मशीन लगनी है।