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टेंडर प्रक्रिया में फंसा बच्चों का आहार

Tue, 24 Apr 2018 12:50 AM IST
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:50 AM IST
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टेंडर प्रक्रिया में फंसा बच्चों का आहार
टेंडर प्रक्रिया में फंसा बच्चों का पौष्टिक आहार
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ललितपुर। जिले के 1124 आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहाल बच्चों को बांटे जाने वाला पौष्टिक आहार टेेंडर प्रक्रिया में फंस गया है। इसकी वजह से पिछले दो माह से जिले में आहार की आपूर्ति नहीं हुई है। इसके चलते केंद्रों पर पुष्टाहार का नियमित वितरण ठप हो गया है। इससे केंद्रों पर बच्चों की संख्या बराबर कम होती जा रही है।
छह माह से पांच वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों को कुपोषण से छुटकारा दिलाने के लिए गांव/वार्ड में आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, इनमें करीब 1 लाख 53 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन सभी बच्चों को पांच, पंद्रह, पच्चीस तारीख को पंजीरी बांटी जाती है, जिन बच्चों में कुपोषण होता है, उन्हें एक महीने में पंजीरी के पांच पैकेट दिए जाते है। वहीं, गर्भवती महिलाओं को दो महीने में सात पैकेट बांटे जाते हैं। लेकिन, यह वितरण फरवरी माह से बंद हो गया है। शासन स्तर से पौष्टिक आहार की आपूर्ति नहीं हुई है। इसमें टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी मुख्य वजह मानी जा रही है। इसके अलावा पौष्टिक आहार के मेन्यू में बदलाव की भी चर्चा है। इससे पहले तत्कालीन सरकार में कुपोषित बच्चों को हौसला पोषण मिशन योजना में घी व अन्य पौष्टिक सामग्री वितरित की जाती थी। वहीं, हॉट कुक्ड योजना (पका खाने) में साप्ताहिक मेन्यू बना था, वह भी गुजरे जमाने की बात हो गई है। मौजूदा सरकार में एक मर्तबा ही आंगनबाड़ी केंद्रों को इस मद में धनराशि प्राप्त हो सकी है। जब से पौष्टिक आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंद हुआ है, तब से बच्चों की उपस्थिति में बड़ी गिरावट आई है। इस समय आंगनबाड़ी केंद्रों पर बमुश्किल दस से बारह बच्चे ही पहुंच रहे हैं, जो प्री स्कूल की शिक्षा पाकर घर लौट जाते हैं। उधर, आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष प्रतिभा कौशिक का कहना है कि एक तरफ सरकार कुपोषण को समाप्त करना चाह रही है। वहीं, जो पौष्टिक आहार मिलता था, उसे भी बंद कर दिया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अंतिम बार जनवरी माह में पोषाहार की बोरियां मिली थीं। इसके बाद से पुष्टाहार नहीं मिला है। कार्यकत्रियों को दो माह से मानदेय भी नहीं मिला है। इससे कार्यकत्रियों, सहायिकाओं में रोष व्याप्त है।
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अभी नहीं आ रहा पुष्टाहार
इस समय आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार का वितरण नहीं हो रहा है। शासन स्तर से ही आपूर्ति नहीं हो रही है। अगले माह से पुष्टाहार की आपूर्ति होने की संभावना जताई जा रही है।
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देवेंद्र प्रताप
जिला विकास अधिकारी
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ये है हॉट कुक्ड का मेन्यू
छह माह से तीन साल के अति क ुपोषित बच्चों का हॉट कुक्ड देने के लिए साप्ताहिक मेन्यू बनाया गया है। इसमें सोमवार को मीठा दलिया, मंगलवार को खिचड़ी, बुधवार को हलुआ, बृहस्पतिवार को तहरी, शुक्रवार को मीठा दलिया, शनिवार को हलुआ का वितरण किया जाता है। इसके अलावा मौसमी फल भी दिए जाते हैं। वर्तमान में शासन से इस मद में धनराशि नहीं मिली है।
39 गांव ही हो सके कुपोषण मुक्त
पिछले वित्तीय वर्ष में 50 गांवों को कुपोषण से मुक्त करने की योजना बनाई गई थी। जिनमें 39 गांवों को ही कुपोषण से छुटकारा दिलाया जा सका है। वर्तमान में 11 गांव अभी भी कुपोषण से मुक्त होना शेष हैं। इनमें ब्लाक जखौरा के ग्राम बादरौन, बुधेड़ी, बरौदा स्वामी, ब्लाक तालबेहट में पूराबिरधा, पवा, सुनौरी, ब्लाक महरौनी में सिलावन, खिरिया लटकनजू, ब्लाक मडावरा में भीकमपुर, रनगांव, गौना शामिल हैं। बता दें कि जिले में करीब दस हजार अल्प वजन पाए गए है।

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आदर्श गांव भी है कुपोषण की चपेट में
क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ब्लॉक तालबेहट के ग्राम पवा को गोद ले रखा है। यह गांव ओडीएफ तो हो गया लेकिन अभी कुपोषण मुक्त होना बाकी है।
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