{"_id":"59a420794f1c1b7c018b456d","slug":"81503928441-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सदभावना गणेश-City","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सदभावना गणेश-City
Updated Mon, 28 Aug 2017 08:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
----
सद्भावना के प्रतीक है गणेश जी
सब हेड: सीपरी बाजार की कोयला वाली गली में हिन्दू और मुस्लिम मिलकर करते हैं आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सीपरी बाजार के कोयले वाली गली में स्थापित होने वाली भगवान गजानन की प्रतिमा को सद्भावना गणेश कहा जाता है। इसका कारण यह है कि आयोजन कमेटी में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग हैं, जो पूरे उत्साह के साथ गणेश जी की स्थापना और विसर्जन करते हैं।
करीब 22 साल पहले कोयले वाली गली के लोगों ने सबका मालिक एक नाम से कमेटी बनाई थी। इसमें गली के हिंदू व मुस्लिम युवा सदस्य बने। यही लोग हर साल यहां गणेश जी की स्थापना करते हैं। कमेटी के सदस्य इस्लाम भाई अल्लू बताते हैं कि गणेशोत्सव दोनों समुदायों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। हम हर साल पूरे उत्साह के साथ आयोजन करते हैं। यही वजह है कि हमारे पंडाल में विराजने वाले सद्भावना गणेश कहलाते हैं। कमेटी के संयोजक मुकेश सेठी बताते हैं कि भगवान के भंडारे का भोजन हलवाई नहीं बनाता है, दोनों समुदाय क ी महिलाएं और पुरुष मिलकर इसे बनाते है। रात में पंडाल की सुरक्षा के लिए सभी की बराबर ड्यूटी लगती है। यहां के निवासी साजिद पूरे सात दिन पंडाल में ही बिताते हैं। गणेश उत्सव समापन के बाद जो भी पैसा बचता है, उसे कमेटी किसी गरीब कन्या की शादी के लिए दे देता है।
विज्ञापन
----
सद्भावना के प्रतीक है गणेश जी
सब हेड: सीपरी बाजार की कोयला वाली गली में हिन्दू और मुस्लिम मिलकर करते हैं आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सीपरी बाजार के कोयले वाली गली में स्थापित होने वाली भगवान गजानन की प्रतिमा को सद्भावना गणेश कहा जाता है। इसका कारण यह है कि आयोजन कमेटी में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग हैं, जो पूरे उत्साह के साथ गणेश जी की स्थापना और विसर्जन करते हैं।
करीब 22 साल पहले कोयले वाली गली के लोगों ने सबका मालिक एक नाम से कमेटी बनाई थी। इसमें गली के हिंदू व मुस्लिम युवा सदस्य बने। यही लोग हर साल यहां गणेश जी की स्थापना करते हैं। कमेटी के सदस्य इस्लाम भाई अल्लू बताते हैं कि गणेशोत्सव दोनों समुदायों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। हम हर साल पूरे उत्साह के साथ आयोजन करते हैं। यही वजह है कि हमारे पंडाल में विराजने वाले सद्भावना गणेश कहलाते हैं। कमेटी के संयोजक मुकेश सेठी बताते हैं कि भगवान के भंडारे का भोजन हलवाई नहीं बनाता है, दोनों समुदाय क ी महिलाएं और पुरुष मिलकर इसे बनाते है। रात में पंडाल की सुरक्षा के लिए सभी की बराबर ड्यूटी लगती है। यहां के निवासी साजिद पूरे सात दिन पंडाल में ही बिताते हैं। गणेश उत्सव समापन के बाद जो भी पैसा बचता है, उसे कमेटी किसी गरीब कन्या की शादी के लिए दे देता है।
विज्ञापन