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ईओडब्ल्यू जांच में फंसने से 788 करोड़ रुपये महंगी हुई एरच सिंचाई परियोजना
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झांसी। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) जांच में फंसनेे से महत्वाकांक्षी एरच सिंचाई परियोजना लगातार पिछड़ती जा रही है। इस वजह से इसकी लागत में भी भारी-भरकम इजाफा हो चुका। लेटलतीफी के चलते प्रोजेक्ट की लागत में 788 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इजाफा हो चुका। इसकी शुरुआती लागत महज 612 करोड़ रुपये थी लेकिन, अब यह लागत बढ़कर 1400 करोड़ रुपये पहुंच गई है। निर्माण अभी तक दुबारा आरंभ न होने से इसकी लागत में और भी इजाफा होना तय है।
पारीछा बांध से करीब चालीस किलोमीटर नीचे एरच के जुझार गांव में वर्ष 2015 में 612 करोड़ की लागत से इस बांध परियोजना का काम आंरभ हुआ। इसकी मदद से गरौठा समेत आसपास के असिंचित इलाके तक पानी पहुंचाने के साथ ही प्रस्तावित डिफेंस कॉरीडोर को भी पानी दिया जाना था। करीब 19 मीटर ऊंचा एवं 1400 मीटर लंबाई वाले इस बांध में 29 एमसीएम पीने का पानी एवं 950 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए रखा गया। वर्ष 2018 तक परियोजना पर 401 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इस रकम से परियोजना का साठ प्रतिशत काम पूरा हो गया। बांध का स्ट्राक्चर भी तैयार कर लिया गया लेकिन, इसी बीच डिजाइन समेत अन्य गड़बड़ियों के चलते परियोजना पर सवाल खड़े होने लगे। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे। योगी सरकार ने इन आरोपों के चलते काम बंद कराके ईओडब्ल्यू को जांच करने के निर्देश दिए। इसके बाद से परियोजना पर ग्रहण लग गया हालांकि परियोजना की आवश्यकता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पिछले झांसी दौरे के दौरान इसे जल्द आरंभ कराने की बात कही थी लेकिन, दो साल बाद भी दुबारा काम आरंभ नहीं हुआ। सिंचाई अभियंताओं का कहना है 1400 करोड़ रुपये की लागत भी वर्ष 2018 के मुताबिक की गई थी। अब इस लागत मेें भी इजाफा होना तय है। वहीं, अधीक्षण अभियंता शीलचंद्र उपाध्याय का कहना है कि इस बारे में शासन को ही निर्णय करना है।
1850 हेक्टेयर असिंचित इलाके को मिलना था पानी
इस महत्वाकांक्षी बांध परियोजना के जरिए गरौठा, बामौर, गुरसराय, बड़ागांव तक पानी पहुुंचाना था। इसके जरिए कुल 1850 हेक्टेयर इलाके में सिंचाई के साथ कुल 378 गांवों के करीब छह लाख लोगों तक पेयजल पहुंचाने का भी लक्ष्य था लेकिन, पिछले पांच साल से इन इलाकों के लोग सिर्फ परियोजना पूरी होने का ही इंतजार कर रहे।
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ईओडल्ब्यू ने साढ़े सोलह करोड़ रुपये के घपले की जताई आशंका
बांध निर्माण के दौरान नीचे से निकले पत्थरों को बिना टेंडर कराए मनमाने दाम पर बिक्री करने का आरोप है। इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराई गई। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब साढ़े सोलह करोड़ रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट में माना गया कि खुदाई में निकले पत्थरों की नीलामी नहीं कराई गई। तत्कालीन अभियंताओं ने इस खनिज को मनमाने तरीके से खुद ही बेच दिया। जांच में सामने आया कि जिस खनिज की कीमत उस दौरान सवा दो सौ रुपये थी उसे आधी से भी कम कीमत पर चहेतों ठेकेदारों को दे दिया गया। यह रिपोर्ट शासन के पास है। इसमें एक एसई, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई से रिकवरी की भी संस्तुति हुई है।
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पारीछा बांध से करीब चालीस किलोमीटर नीचे एरच के जुझार गांव में वर्ष 2015 में 612 करोड़ की लागत से इस बांध परियोजना का काम आंरभ हुआ। इसकी मदद से गरौठा समेत आसपास के असिंचित इलाके तक पानी पहुंचाने के साथ ही प्रस्तावित डिफेंस कॉरीडोर को भी पानी दिया जाना था। करीब 19 मीटर ऊंचा एवं 1400 मीटर लंबाई वाले इस बांध में 29 एमसीएम पीने का पानी एवं 950 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए रखा गया। वर्ष 2018 तक परियोजना पर 401 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इस रकम से परियोजना का साठ प्रतिशत काम पूरा हो गया। बांध का स्ट्राक्चर भी तैयार कर लिया गया लेकिन, इसी बीच डिजाइन समेत अन्य गड़बड़ियों के चलते परियोजना पर सवाल खड़े होने लगे। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे। योगी सरकार ने इन आरोपों के चलते काम बंद कराके ईओडब्ल्यू को जांच करने के निर्देश दिए। इसके बाद से परियोजना पर ग्रहण लग गया हालांकि परियोजना की आवश्यकता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पिछले झांसी दौरे के दौरान इसे जल्द आरंभ कराने की बात कही थी लेकिन, दो साल बाद भी दुबारा काम आरंभ नहीं हुआ। सिंचाई अभियंताओं का कहना है 1400 करोड़ रुपये की लागत भी वर्ष 2018 के मुताबिक की गई थी। अब इस लागत मेें भी इजाफा होना तय है। वहीं, अधीक्षण अभियंता शीलचंद्र उपाध्याय का कहना है कि इस बारे में शासन को ही निर्णय करना है।
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1850 हेक्टेयर असिंचित इलाके को मिलना था पानी
इस महत्वाकांक्षी बांध परियोजना के जरिए गरौठा, बामौर, गुरसराय, बड़ागांव तक पानी पहुुंचाना था। इसके जरिए कुल 1850 हेक्टेयर इलाके में सिंचाई के साथ कुल 378 गांवों के करीब छह लाख लोगों तक पेयजल पहुंचाने का भी लक्ष्य था लेकिन, पिछले पांच साल से इन इलाकों के लोग सिर्फ परियोजना पूरी होने का ही इंतजार कर रहे।
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ईओडल्ब्यू ने साढ़े सोलह करोड़ रुपये के घपले की जताई आशंका
बांध निर्माण के दौरान नीचे से निकले पत्थरों को बिना टेंडर कराए मनमाने दाम पर बिक्री करने का आरोप है। इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराई गई। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब साढ़े सोलह करोड़ रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट में माना गया कि खुदाई में निकले पत्थरों की नीलामी नहीं कराई गई। तत्कालीन अभियंताओं ने इस खनिज को मनमाने तरीके से खुद ही बेच दिया। जांच में सामने आया कि जिस खनिज की कीमत उस दौरान सवा दो सौ रुपये थी उसे आधी से भी कम कीमत पर चहेतों ठेकेदारों को दे दिया गया। यह रिपोर्ट शासन के पास है। इसमें एक एसई, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई से रिकवरी की भी संस्तुति हुई है।