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Jhansi News: 6500 भवन स्वामियों को पानी के लिए ढीली करनी होगी जेब
Sun, 29 Oct 2023 11:57 PM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 29 Oct 2023 11:57 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। कोछाभांवर, गेड़ा कॉलोनी, गुरु विहार कॉलोनी, शिक्षक कॉलोनी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रताप नगर, करगुवांजी और सिंधी कॉलोनी समेत आसपास के करीब 6500 भवनों से जल संस्थान अब वाटर टैक्स वसूलेगा। इस वजह से भवन स्वामियों को पानी के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। पिछले दिनों बराठा बेसिन परियोजना को जल निगम ने जल संस्थान के हवाले कर दिया। अब जल संस्थान इस पूरी परियोजना का संचालन करेगा।
अभी तक इन सभी इलाकों में जल निगम जलापूर्ति व्यवस्था संभालता था। जल निगम भवनों से न्यूनतम 120 रुपए प्रतिमाह की दर से जल मूल्य वसूलता था। पिछले सप्ताह परियोजना का काम जल संस्थान को सौंप दिया गया। अब जल संस्थान इस पूरे इलाके में जलापूर्ति व्यवस्था संभालेगा। इसके साथ ही जल संस्थान अफसरों ने टैक्स वसूली व्यवस्था में भी बदलाव कर दिया। 120 रुपये न्यूनतम की जगह अब वह भवनों के वार्षिक मूल्यांकन (एआरबी) के 12.5 प्रतिशत की दर से पानी की कीमत वसूलेंगे। जल संस्थान अफसरों का कहना है कि परियोजना के रखरखाव में काफी खर्च होगा। इस वजह से यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। उधर, अधिशासी अभियंता संजीव कुमार के मुताबिक नए साल से यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे राजस्व बढ़ेगा। इसकी तैयारी की जा रही है।
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झांसी। कोछाभांवर, गेड़ा कॉलोनी, गुरु विहार कॉलोनी, शिक्षक कॉलोनी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रताप नगर, करगुवांजी और सिंधी कॉलोनी समेत आसपास के करीब 6500 भवनों से जल संस्थान अब वाटर टैक्स वसूलेगा। इस वजह से भवन स्वामियों को पानी के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। पिछले दिनों बराठा बेसिन परियोजना को जल निगम ने जल संस्थान के हवाले कर दिया। अब जल संस्थान इस पूरी परियोजना का संचालन करेगा।
अभी तक इन सभी इलाकों में जल निगम जलापूर्ति व्यवस्था संभालता था। जल निगम भवनों से न्यूनतम 120 रुपए प्रतिमाह की दर से जल मूल्य वसूलता था। पिछले सप्ताह परियोजना का काम जल संस्थान को सौंप दिया गया। अब जल संस्थान इस पूरे इलाके में जलापूर्ति व्यवस्था संभालेगा। इसके साथ ही जल संस्थान अफसरों ने टैक्स वसूली व्यवस्था में भी बदलाव कर दिया। 120 रुपये न्यूनतम की जगह अब वह भवनों के वार्षिक मूल्यांकन (एआरबी) के 12.5 प्रतिशत की दर से पानी की कीमत वसूलेंगे। जल संस्थान अफसरों का कहना है कि परियोजना के रखरखाव में काफी खर्च होगा। इस वजह से यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। उधर, अधिशासी अभियंता संजीव कुमार के मुताबिक नए साल से यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे राजस्व बढ़ेगा। इसकी तैयारी की जा रही है।
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