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मासूमों को मिलेगा सहारा,-City
Updated Sun, 26 Aug 2018 02:56 AM IST
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अनाथ मासूमों का सहारा बनेगा अस्पताल का पालना
- ‘कारा’ टीम ने किया महिला अस्पताल का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अनाथ और बेसहारा मासूमों के लिए अब जिला महिला चिकित्सालय में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) द्वारा पालना सिस्टम लगाया जाएगा। बिना पहचान के कोई भी व्यक्ति किसी भी नवजात को इस पालने में रखकर जा सकता है। इसके लिए ‘कारा’ और बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर लिया है।
अनचाहे बच्चे को नालियों और झाड़ियों में फेंकने से बचाने के लिए भारत सरकार के महिला बाल विकास मंत्रालय के सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी ने व्यवस्था बनाई है कि जिला महिला चिकित्सालय में आश्रय योजना के अंतर्गत पालना लगाया जाएगा। इसमें कोई भी व्यक्ति नवजात को रखकर जा सकता है। नवजात को रखने वाले माता पिता की पहचान गुप्त रखी जाती है। यह इसलिए किया गया है ताकि लोक लाज के भय से नवजात को झाड़ियों या कचरे में न फेंका जा सके। जिला अस्पताल में एकांत स्थल पर पालना रखा जाएगा। इस पालने में कोई भी व्यक्ति बिना पहचान बताए किसी भी नवजात को लिटाकर जा सकता है। नवजात को पालने में लिटाने के बाद निर्धारित समय के बाद पालने में लगे सिस्टम के तहत अलार्म बजेगा, जिसके वजने से अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचेगा और नवजात को ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराएगा। किसी तरह की कमी या बीमारी होने पर उसका इलाज किया जाएगा। इसके बाद नवजात को कारा के सुपुर्द कर दिया जाएगा। कारा इस नवजात को अपनी सुपुर्दगी में लेकर पालन पोषण करेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी भी नवजात को गोद लेना चाहेगा तो कानूनी प्रक्रिया के तहत नवजात को उसके सुपुर्द कर दिया जाएगा। जिला बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट मोहम्मद आबिद ने बताया कि यह पालना जिला अस्पताल में इसी महीने शुरू होगा।
प्रभारी सीएमएस डा. वसुधा अग्रवाल ने बताया कि योजना का मकसद नवजातों की जान बचाना है। इसके माध्यम से लोगों के बीच फेंको मत हमें दे दो का संदेश दिया जाएगा, जिससे अनचाहे नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।
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- ‘कारा’ टीम ने किया महिला अस्पताल का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अनाथ और बेसहारा मासूमों के लिए अब जिला महिला चिकित्सालय में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) द्वारा पालना सिस्टम लगाया जाएगा। बिना पहचान के कोई भी व्यक्ति किसी भी नवजात को इस पालने में रखकर जा सकता है। इसके लिए ‘कारा’ और बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर लिया है।
अनचाहे बच्चे को नालियों और झाड़ियों में फेंकने से बचाने के लिए भारत सरकार के महिला बाल विकास मंत्रालय के सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी ने व्यवस्था बनाई है कि जिला महिला चिकित्सालय में आश्रय योजना के अंतर्गत पालना लगाया जाएगा। इसमें कोई भी व्यक्ति नवजात को रखकर जा सकता है। नवजात को रखने वाले माता पिता की पहचान गुप्त रखी जाती है। यह इसलिए किया गया है ताकि लोक लाज के भय से नवजात को झाड़ियों या कचरे में न फेंका जा सके। जिला अस्पताल में एकांत स्थल पर पालना रखा जाएगा। इस पालने में कोई भी व्यक्ति बिना पहचान बताए किसी भी नवजात को लिटाकर जा सकता है। नवजात को पालने में लिटाने के बाद निर्धारित समय के बाद पालने में लगे सिस्टम के तहत अलार्म बजेगा, जिसके वजने से अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचेगा और नवजात को ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराएगा। किसी तरह की कमी या बीमारी होने पर उसका इलाज किया जाएगा। इसके बाद नवजात को कारा के सुपुर्द कर दिया जाएगा। कारा इस नवजात को अपनी सुपुर्दगी में लेकर पालन पोषण करेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी भी नवजात को गोद लेना चाहेगा तो कानूनी प्रक्रिया के तहत नवजात को उसके सुपुर्द कर दिया जाएगा। जिला बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट मोहम्मद आबिद ने बताया कि यह पालना जिला अस्पताल में इसी महीने शुरू होगा।
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प्रभारी सीएमएस डा. वसुधा अग्रवाल ने बताया कि योजना का मकसद नवजातों की जान बचाना है। इसके माध्यम से लोगों के बीच फेंको मत हमें दे दो का संदेश दिया जाएगा, जिससे अनचाहे नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।
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