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युवा: दीक्षांत समारोह: पदकों की खबर-City
Updated Wed, 08 Nov 2017 08:46 PM IST
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पचास ग्राम के पदक में एक ग्राम सोना, बाकी चांदी
- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिए जाएंगे 74 पदक
- 76758 उपाधियां भी दी जाएंगी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शुक्रवार को होने वाले दीक्षांत समारोह में 74 पदक और 76758 उपाधियां बांटी जाएंगी। समस्त परीक्षाओं में सर्वाधिक नंबर पाने वाले विद्यार्थी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया दिया जाएगा। 50 ग्राम वजन वाले इस पदक में एक ग्राम सोना और 49 ग्राम चांदी होती है।
दीक्षांत समारोह में बांटे जाने वाले पदकों के लिए आर्डर दे दिया गया है। इन्हें इंदौर में तैयार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले सभी पदकों का वजन 50 ग्राम है। सबसे ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थी को दिया जाने वाला कुलाधिपति स्वर्ण पदक 49 ग्राम चांदी का बना होता है, इसमें एक ग्राम सोने की पॉलिश कराई जाती है। रजत पदक पूरी तरह चांदी का बना होता है और कास्य पदक कांसे का। इन दोनों का वजन भी 50 ग्राम होता है। स्वर्ण पदक की कीमत लगभग 2500 से 3000 रुपये के बीच होती है। वहीं, अन्य पदकों की कीमत 500 से 1000 रुपये होती है। दीक्षांत समारोह में प्रदान किए जाने वाले मेडल एक दिन पहले बनकर ही विश्वविद्यालय पहुंचते हैं।
पुरस्कार की कीमत नहीं होती
उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को कोई मूल्य देकर सम्मानित नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय या कोई भी संस्था अच्छे विद्यार्थियों को स्मृति में बनाए रखने के लिए पदक या चिन्ह प्रदान करती है। जिससे विद्यार्थी अपने ऊपर गर्व करें और उनका उत्साह बना रहे। किसी भी पुरस्कार को पैसे की कीमत से नहीं देखा जाना चाहिए।
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- प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलपति
धोती-कुर्ते में नजर आएंगे छात्र, सलवार-सूट में छात्राएं
झांसी। दीक्षांत समारोह में पदक पाने वाले विद्यार्थी पारंपरिक धोती-कुर्ता, सलवार सूट में नजर आएंगे। कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली छात्रा मनीषा राय ने कहा कि लोगों ने मानसिकता बना ली है कि मॉडर्न मतलब वेस्टर्न कल्चर को अपनाना। उनके जैसे रहना और उन्हीं के जैसे कपड़े पहनना। हम भारतीय परिधान पहनकर भी खुद को मॉडर्न बना सकता हैं। गौरतलब हो कि दो वर्ष पूर्व कुलाधिपति राम नाईक ने इस परंपरा की शुरूआत कराई थी। लक्ष्य वेस्टर्न कल्चर की ओर बढ़ रही युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के बारे में बताना था।
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- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिए जाएंगे 74 पदक
- 76758 उपाधियां भी दी जाएंगी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शुक्रवार को होने वाले दीक्षांत समारोह में 74 पदक और 76758 उपाधियां बांटी जाएंगी। समस्त परीक्षाओं में सर्वाधिक नंबर पाने वाले विद्यार्थी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया दिया जाएगा। 50 ग्राम वजन वाले इस पदक में एक ग्राम सोना और 49 ग्राम चांदी होती है।
दीक्षांत समारोह में बांटे जाने वाले पदकों के लिए आर्डर दे दिया गया है। इन्हें इंदौर में तैयार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले सभी पदकों का वजन 50 ग्राम है। सबसे ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थी को दिया जाने वाला कुलाधिपति स्वर्ण पदक 49 ग्राम चांदी का बना होता है, इसमें एक ग्राम सोने की पॉलिश कराई जाती है। रजत पदक पूरी तरह चांदी का बना होता है और कास्य पदक कांसे का। इन दोनों का वजन भी 50 ग्राम होता है। स्वर्ण पदक की कीमत लगभग 2500 से 3000 रुपये के बीच होती है। वहीं, अन्य पदकों की कीमत 500 से 1000 रुपये होती है। दीक्षांत समारोह में प्रदान किए जाने वाले मेडल एक दिन पहले बनकर ही विश्वविद्यालय पहुंचते हैं।
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पुरस्कार की कीमत नहीं होती
उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को कोई मूल्य देकर सम्मानित नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय या कोई भी संस्था अच्छे विद्यार्थियों को स्मृति में बनाए रखने के लिए पदक या चिन्ह प्रदान करती है। जिससे विद्यार्थी अपने ऊपर गर्व करें और उनका उत्साह बना रहे। किसी भी पुरस्कार को पैसे की कीमत से नहीं देखा जाना चाहिए।
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- प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलपति
धोती-कुर्ते में नजर आएंगे छात्र, सलवार-सूट में छात्राएं
झांसी। दीक्षांत समारोह में पदक पाने वाले विद्यार्थी पारंपरिक धोती-कुर्ता, सलवार सूट में नजर आएंगे। कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली छात्रा मनीषा राय ने कहा कि लोगों ने मानसिकता बना ली है कि मॉडर्न मतलब वेस्टर्न कल्चर को अपनाना। उनके जैसे रहना और उन्हीं के जैसे कपड़े पहनना। हम भारतीय परिधान पहनकर भी खुद को मॉडर्न बना सकता हैं। गौरतलब हो कि दो वर्ष पूर्व कुलाधिपति राम नाईक ने इस परंपरा की शुरूआत कराई थी। लक्ष्य वेस्टर्न कल्चर की ओर बढ़ रही युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के बारे में बताना था।