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बुंदेलखंड के नौ हजार किसानों पर सहकारी बैंकाें का 57 करोड़ बकाया

Tue, 31 May 2022 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 12:48 AM IST
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57 crores of cooperative banks trapped on nine thousand farmers of Bundelkhand
झांसी। बुंदेलखंड के नौ हजार किसानों पर सहकारी बैंकों का 57 करोड़ फंस गया है। इस पैसे की वसूली के लिए लंबे समय से प्रयास हो रहे हैं मगर हासिल कुछ नहीं हो रहा। तमाम बकायेदार तो ढूंढे भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिनकी मौत हो चुकी है। कई किसानों की आरसी भी जारी की गई थी लेकिन तहसील से यह कहकर वापस कर दी गई कि बकायेदार किसानों का जो पता बताया गया है उस पते पर कोई मिला ही नहीं है।
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बुंदेलखंड में झांसी के 2885 किसान 24.25 करोड़, ललितपुर के 1853 किसान 3.73 करोड़ एवं जालौन के 4311 किसान 29.69 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें कई किसान ऐसे हैं जो या तो कोरोनाकाल में मर गए हैं, जिससे इनके परिवारों की आर्थिक स्थिति चुकाने लायक नहीं हैं। वहीं, क इयों की फसल बर्बाद होने से घाटा हो गया है। किसानों का पैसा न चुका पाने की वजह से बैंक का पैसा डूबने की कगार पर है।
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जनपद किसान बकाया (पैक्स/सहकारी बैंक) किसान/सदस्य सहकारी ग्रामीण विकास बैंक (बकाया)
झांसी 2583 17,73 करोड़ 302 6.52 करोड़
ललितपुर 1723 1.59 करोड़ 130 2.14 करोड़
जालौन 3879 18.23 करोड़ 432 11.46 करोड़
लगातार चलाया जा रहा है अभियान
बैंकों द्वारा लगातार वसूली अभियान चलाया जा रहा है, इसके लिए बैंकों द्वारा किसानों को नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस के बाद भी किसान पैसा जमा नहीं करता है तो उनसे वसूली के लिए प्रशासनिक कार्रवाई कुर्की आदि की जाएगी। अगर इसके बाद भी किसान पैसा जमा नहीं क रता है तो उसको जेल तक हो सकती है। अभियान चलाकर 334 किसानों से सवा तीन करोड़ की ही वसूली हो पाई है। यह अभियान जून तक चलाया जाएगा। किसानों ने जो पैसा लिया है उसे अगले वित्तीय वर्ष या फिर निर्धारित सीमा तक चुकाना होता है। वरना इन पैसों पर ब्याज बढ़ता जाता है। फिर अंत में कुर्की और कानूनी कार्रवाई होती है।
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किसानों को कृषि उपकरण और खेती किसानी के लिए खाद-बीज खरीदने के लिए पैसा दिया जाता है लेकिन कुछ किसान ऐसे होते हैं जो चुकाने की मंशा नहीं रखते हैं, वहीं, कुछ किसानों की आर्थिक हालत खराब हो जाती है या फसल खराब हो जाती है। जिससे वह पैसे को जमा नहीं कर पाते हैं। - उदयभानु सिंह, उपायुक्त निबंधक सहकारिता
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