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पांच सालों में 520 बच्चों की दूर हुईं 4डी बीमारियां

Wed, 24 Mar 2021 01:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Mar 2021 01:04 AM IST
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520 child treatment 4d ill
झांसी। पांच सालों में झांसी समेत बुंदेलखंड के 520 बच्चों ने 4डी बीमारी से निजात पाई है। इनमें से कई बच्चों का महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ही इलाज हुआ है, तो कइयों को सर्जरी के लिए एसजीपीआई और केजीएमयू लखनऊ या फिर अलीगढ़ के एएमयू भेजा गया है। सबसे ज्यादा क्लब फुट (टेढ़े पैर) और फिर कान की समस्या दूर हुई है।
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बच्चों की सभी 30 प्रकार की बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को 4-डी का नाम दिया गया है। 4-डी में पहला डिफिसिएंसीज यानी पोषाहार की कमी की वजह से होने वाली बीमारियां, दूसरा डिसीज यानी बच्चों की सामान्य बीमारियां, तीसरा डिफेक्ट यानी जन्मजात विकृतियों से उत्पन्न रोग और चौथा डेवलपमेंटट डिसीज यानी विकास में कमी वाले रोग शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि पिछले पांच सालों में अब तक 4डी बीमारियों से ग्रसित जिले में 660 रोगी चिह्नित किए गए हैं, इनमें से 520 की सर्जरी कराई जा चुकी है। वहीं, डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि इस बीमारी के तहत इलाज पूरी तरह निशुल्क होता है।
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ऐसे किया जाता है श्रेणीबद्ध
1: डायरिया: गर्मी या फिर ठंड दोनों ही मौसम में डायरिया के कई केस जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में प्रवेश होते हैं। वहीं, ऐसे में डायरिया ग्रसित बच्चे जिनके परिजन समय पर बच्चे को भर्ती नहीं कराते हैं। जांच के दौरान बच्चे की हालत गंभीर होनेे पर उसे एक कैटेगिरी यानी डायरिया में रखकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
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2: डिमेंशिया: इस कैटेगरी में ऐसे बच्चों को रखा जाता है जो कि जन्म के बाद ही मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। लंबे इलाज के बाद भी जब फायदा नहीं होता है तो उन्हें डिमेंशिया कैटेगरी में रखकर रेफर किया जाता है।
3: डर्मेटाइटिस: इसमें बच्चे के पैदा होने के बाद गंभीर त्वचा संक्रमण की परेशानी होती हैं। यहां सरकारी स्किन स्पेशलिस्ट का टोटा कम होने पर बच्चों को हायर सेंटर भेजा गया है।

4: डेथ: इस कैटेगरी में सबसे अधिक गंभीर हालत के बच्चों को रखा जाता है। इसमें कोई भी बीमारी हो सकती है, जिसमें भर्ती के दौरान बच्चे की हालत काफी गंभीर पाई जाती है।
इन बीमारियों के इतने मरीज
बीमारी ठीक हुए
हर्निया 1
कम सुनाई देना 6
जले हुए 7
हार्ट सर्जरी 8
जन्मजात ह्रदय की बीमारी 14
जुड़ी हुई उंगलियां 15
अन्य सर्जरी 20
मोतियाबिंद 33
रीढ़ की हड्डी या दिमागी फोड़ा 44
होंठ कटे फटे 92
कान के संक्रमण 106
जन्मजात टेढ़े पैर 174
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