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देश की राष्ट्रीय चेतना जगाने की जरूरत: प्रो. सदानंद-City
Updated Thu, 09 Nov 2017 07:22 PM IST
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देश की राष्ट्रीय चेतना जगाने की जरूरत: प्रो. सदानंद
- बीयू में हुए एकल व्याख्यान में बोले हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष
- लक्ष्य और कर्मनिष्ठा स्पष्ट तो हर लक्ष्य पा सकता है मनुष्य: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारतीय साहित्य ने राष्ट्रीय चेतना के विकास में अहम भूमिका निभाई है। यद्यपि हम राजनैतिक रूप से स्वतंत्र हो गए हैं लेकिन चेतना के स्तर पर आज भी स्वतंत्र नहीं हैं। आज जरूरत अतीत के स्मरण के द्वारा देश की राष्ट्रीय चेतना जगाने की है। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित एकल व्याख्यान एवं नागरिक अभिनंदन समारोह में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कही।
उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं से राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया। बोले कि साहित्य हमारे दिल और मन को विस्तार देता है, साथ ही मनुष्यत्व को भी जगाता है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि यदि मनुष्य का लक्ष्य और कर्मनिष्ठा स्पष्ट हो, तो वह हर लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। अत: हमें अपने लक्ष्य के निर्धारण व प्राप्ति के लिए किए जा रहे कार्यों के प्रति सजग रहना होगा। विशिष्ट अतिथि रविंद्र शुक्ला ने कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि संघर्षों का इतिहास है। यह तो कर्नल टॉड, लार्ड मैकाले और मैक्समूलर की तिकड़ी का कमाल है, जिसने भारतीय संस्कृति व इतिहास को पूरी तरह बदलकर रख दिया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद और हिंदी विभाग ने प्रो. सदानंद का नागरिक सम्मान किया। संचालन डॉ. पुनीत बिसारिया ने और आभार डॉ. मुन्ना तिवारी ने जताया। महाकवि अवधेश, पन्नालाल असर, साकेत सुमन चतुर्वेदी, कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव, प्रो. एमएल मौर्या, प्रो. सीबी सिंह, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. संतोष पांडेय, डॉ. यतींद्र मिश्रा, डॉ. विनम्रसेन सिंह, डॉ. हरि त्रिपाठी, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, डॉ. नेहा मिश्रा मौजूद रहीं।
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देश की राष्ट्रीय चेतना जगाने की जरूरत: प्रो. सदानंद
- बीयू में हुए एकल व्याख्यान में बोले हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष
- लक्ष्य और कर्मनिष्ठा स्पष्ट तो हर लक्ष्य पा सकता है मनुष्य: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारतीय साहित्य ने राष्ट्रीय चेतना के विकास में अहम भूमिका निभाई है। यद्यपि हम राजनैतिक रूप से स्वतंत्र हो गए हैं लेकिन चेतना के स्तर पर आज भी स्वतंत्र नहीं हैं। आज जरूरत अतीत के स्मरण के द्वारा देश की राष्ट्रीय चेतना जगाने की है। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित एकल व्याख्यान एवं नागरिक अभिनंदन समारोह में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कही।
उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं से राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया। बोले कि साहित्य हमारे दिल और मन को विस्तार देता है, साथ ही मनुष्यत्व को भी जगाता है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि यदि मनुष्य का लक्ष्य और कर्मनिष्ठा स्पष्ट हो, तो वह हर लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। अत: हमें अपने लक्ष्य के निर्धारण व प्राप्ति के लिए किए जा रहे कार्यों के प्रति सजग रहना होगा। विशिष्ट अतिथि रविंद्र शुक्ला ने कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि संघर्षों का इतिहास है। यह तो कर्नल टॉड, लार्ड मैकाले और मैक्समूलर की तिकड़ी का कमाल है, जिसने भारतीय संस्कृति व इतिहास को पूरी तरह बदलकर रख दिया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद और हिंदी विभाग ने प्रो. सदानंद का नागरिक सम्मान किया। संचालन डॉ. पुनीत बिसारिया ने और आभार डॉ. मुन्ना तिवारी ने जताया। महाकवि अवधेश, पन्नालाल असर, साकेत सुमन चतुर्वेदी, कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव, प्रो. एमएल मौर्या, प्रो. सीबी सिंह, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. संतोष पांडेय, डॉ. यतींद्र मिश्रा, डॉ. विनम्रसेन सिंह, डॉ. हरि त्रिपाठी, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, डॉ. नेहा मिश्रा मौजूद रहीं।
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