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खाद्य पदार्थों के 41 नमूने फेल
ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2015 12:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महंगाई की आग में झुलस रहे उपभोक्ताओं पर मिलावट की दोहरी मार पड़ रही है। मुनाफाखोरी के चलते खाद्य पदार्थों में व्यापक पैमाने पर मिलावट जारी है। इसका अंदाजा क्षेत्रीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में आने वाले नमूनों की जांच से लगाया जा सकता है। यहां अब तक 41 नमूने फेल हो चुके हैं। जबकि, 56 नमूनों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
बाजार में इन दिनों महंगाई की आग लगी हुई। खाद्य पदार्थ कीमतों के नित नये आयाम गढ़ रहे हैं, जिसमें आम आदमी झुलस रहा है। इतना ही नहीं, लोगों पर मिलावट की भी दोहरी मार पड़ रही है। पूरी कीमत अदा करने के बाद भी लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ हासिल नहीं हो पा रहे हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज परिसर स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की क्षेत्रीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हो रहे हैं।
जून माह से शुरू हुई इस प्रयोगशाला में अब तक खाद्य पदार्थों के 252 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 41 में मिलावट पकड़ी जा चुकी है। प्राथमिक जांच में फेल होने वाले नमूनों को जांच के लिए प्रदेश की अन्य प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। वहां मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेता /निर्माता के खिलाफ कार्रवाई होगी। जबकि, उच्च स्तरीय संसाधन व समुचित रसायन न होने की वजह से 56 नमूनों को यहां से जांच के लिए लखनऊ स्थित विशेष प्रयोगशाला में भेजा गया है।
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एक भी प्राइवेट नमूना जांच को नहीं आया
झांसी। मेडिकल कालेज परिसर में स्थित खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) द्वारा एकत्र किए जाने वाले नमूनों की जांच की जाती है। इसके अलावा यहां कोई भी व्यक्ति मिलावट का शक होने पर संबंधित खाद्य पदार्थ की जांच करा सकता है। इसके लिए उसे एक हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। लेकिन, अब तक यहां एक भी प्राइवेट नमूना जांच के लिए नहीं आया है, जिससे आम जनमानस को मिलावट की जांच के लिए दी गई यह सुविधा अब तक सिफर साबित हो रही है।
प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों की जांच का काम तेजी से जारी है। अब तक 41 नमूने फेल हो चुके हैं। जबकि, 56 नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। यहां आम आदमी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट की जांच निर्धारित शुल्क अदा कर करा सकता है।
- एसके चौरसिया, प्रयोगशाला प्रभारी
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झांसी। महंगाई की आग में झुलस रहे उपभोक्ताओं पर मिलावट की दोहरी मार पड़ रही है। मुनाफाखोरी के चलते खाद्य पदार्थों में व्यापक पैमाने पर मिलावट जारी है। इसका अंदाजा क्षेत्रीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में आने वाले नमूनों की जांच से लगाया जा सकता है। यहां अब तक 41 नमूने फेल हो चुके हैं। जबकि, 56 नमूनों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
बाजार में इन दिनों महंगाई की आग लगी हुई। खाद्य पदार्थ कीमतों के नित नये आयाम गढ़ रहे हैं, जिसमें आम आदमी झुलस रहा है। इतना ही नहीं, लोगों पर मिलावट की भी दोहरी मार पड़ रही है। पूरी कीमत अदा करने के बाद भी लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ हासिल नहीं हो पा रहे हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज परिसर स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की क्षेत्रीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हो रहे हैं।
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जून माह से शुरू हुई इस प्रयोगशाला में अब तक खाद्य पदार्थों के 252 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 41 में मिलावट पकड़ी जा चुकी है। प्राथमिक जांच में फेल होने वाले नमूनों को जांच के लिए प्रदेश की अन्य प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। वहां मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेता /निर्माता के खिलाफ कार्रवाई होगी। जबकि, उच्च स्तरीय संसाधन व समुचित रसायन न होने की वजह से 56 नमूनों को यहां से जांच के लिए लखनऊ स्थित विशेष प्रयोगशाला में भेजा गया है।
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एक भी प्राइवेट नमूना जांच को नहीं आया
झांसी। मेडिकल कालेज परिसर में स्थित खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) द्वारा एकत्र किए जाने वाले नमूनों की जांच की जाती है। इसके अलावा यहां कोई भी व्यक्ति मिलावट का शक होने पर संबंधित खाद्य पदार्थ की जांच करा सकता है। इसके लिए उसे एक हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। लेकिन, अब तक यहां एक भी प्राइवेट नमूना जांच के लिए नहीं आया है, जिससे आम जनमानस को मिलावट की जांच के लिए दी गई यह सुविधा अब तक सिफर साबित हो रही है।
प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों की जांच का काम तेजी से जारी है। अब तक 41 नमूने फेल हो चुके हैं। जबकि, 56 नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। यहां आम आदमी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट की जांच निर्धारित शुल्क अदा कर करा सकता है।
- एसके चौरसिया, प्रयोगशाला प्रभारी