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प्रीमियम चुकाने के बावजूद 38 हजार किसानों को नहीं मिला बीमा

Tue, 16 Jun 2020 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2020 12:45 AM IST
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38 thousand farmer will not insurance crop
झांसी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 38 हजार किसान ऐसे सामने आए हैं जिनके खाते से बैंकों ने प्रीमियम राशि काट ली लेकिन, उनको बीमा का लाभ नहीं मिला। पड़ताल में बैंकों की बड़ी लापरवाही सामने आई। कर्मचारियों द्वारा केंद्रीय बीमा पोर्टल पर तय समय में किसानों के नाम ही दर्ज नहीं किए गए।
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पिछले खरीफ सीजन में दो लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया था। बैंकों ने इनका प्रीमियम दो फीसदी प्रति हेक्टेयर की दर से काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया लेकिन, 38 हजार किसान ऐसे सामने आए जिनका प्रीमियम काटने के बावजूद बैंकों ने उनका पैसा बीमा कंपनियों को नहीं दिया। पड़ताल में बैंकों की लापरवाही सामने आई। मालूम चला कि इन किसानों के नाम केंद्रीय बीमा पोर्टल पर तयशुदा समय तक अपलोड ही नहीं किए गए। इस वजह से बीमा कंपनी ने इन सभी के दावे खारिज कर दिए। अब इस मामले के सामने आने के बाद कृषि अफसरों के भी होश उड़े हैं। बताया जाता है कि दिसंबर माह तक केंद्रीय पोर्टल पर बीमित किसानों के नाम दर्ज कराने थे लेकिन, स्थानीय स्तर पर बैंकों ने इसमें जमकर लेटलतीफी की। बैंकों की ओर से यह काम ही दिसंबर महीने में शुरू हुआ। एक माह में दो लाख नामों की फीडिंग नहीं हो सकी और इसी बीच पोर्टल बंद हो गया। आधार के मामलों में गड़बड़ी से भी कई किसान लाभ से वंचित हो गए। उधर, प्रीमियम देने के बाद बीमा लाभ न मिलने से किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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शासन को इस प्रकरण से अवगत कराया गया है। उसके दिशा-निर्देश के मुताबिक जल्द ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
कमल कटियार, उपनिदेशक, कृषि
काफी दांवपेंच के बाद जारी हुई थी बीमा राशि
झांसी। खरीफ फसल की बीमा राशि को लेकर पहले से भी विवाद था। शुरूआत में बीमा कंपनी ने सिर्फ 152 करोड़ रुपये ही बीमा क्लेम के तौर पर माना। कंपनी ने मूंगफली समेत कई दलहनी फसल को इसमें शमिल नहीं किया था। इस पर जब बवाल मचा तब जाकर इन सभी को शामिल किया गया। इसके बाद बीमा राशि बढ़कर 209 करोड़ रुपये हो गई। पहली बार बीमा कंपनी को जितना प्रीमियम मिला उससे करीब 75 करोड़ रुपये अधिक जारी करना पड़ा। नेशनल बीमा कंपनी को 135 करोड़ ही प्रीमियम के तौर पर मिले थे।
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