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रोजेदार नेकियां करें और गुनाहों से बचें

Sun, 19 May 2019 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2019 02:00 AM IST
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रोजेदार नेकियां करें और गुनाहों से बचें
रोजेदार नेकियां करें और गुनाहों से बचें
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झांसी। रमजानुल मुबारक का दूसरा अशरा चल रहा है। इस अशरे में रोजेदार इबादत कर मगफिरत की भी दुआ मांग रहे हैं। इस अशरे में शहर में कई स्थानों पर तरावीह में कुरान की तिलावत पूरी होने पर जलसे का भी आयोजन किया गया। इन जलसों में उलमा ने कहा कि रोजेदारों को नेकियां करने के साथ गुनाहों से भी बचना चाहिए। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा लोग कुरान की तिलावत करें और गरीबों की मदद करें। रमजान में इफ्तार कराने का भी बहुत सवाब है। रमजान में तरावीह तो चांद देखकर ही शुरू होती है और ईद के चांद के साथ खत्म होती है लेकिन कुछ लोगों को जरूरी काम से कहीं बाहर जाना होता है तो वह जल्द ही तरावीह में कुरान की तिलावत सुन लेते हैं। ऐसे लोग भी जहां पर भी मौका मिले 20 रकात तरावीह जरूर पढ़ें।
मौलाना मुफ्ती साबिर कासमी ने कहा कि रमजान की महीना इम्तहान का है। तीस दिन भूखा, प्यासा रहकर गरीबों की भूख महसूस करें। रोजे में कोई भी बुरा ख्याल तक भी जेहन में न आने दें। अपनी आंखें भी नीचे कर के चलें। ताकि किसी गैर औरत पर भी नजर न पड़े। मौलाना ने कहा कि अमीरों की दौलत पर गरीबों का भी हक है। अमीरों के बच्चे तो ईद पर महंगे कपड़े पहन लेते हैं लेकिन गरीबों के बच्चे इससे महरूम रह जाते हैं। इसलिए उनके बच्चों का भी ख्याल रखें। वह भी अच्छे कपड़े पहन सकें। जकात और फितरे का पैसा जल्दी दे दें।
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मौलाना हाफिज राशिद ने कहा कि रमजान के तीसरे अशरे में ताक रातें (नक्की) बहुत अहम हैं। 21, 23, 25, 27 और 29 की रात को इबादत करने का सवाब हजार रातों के बराबर है। इन्हीं ताक रातों में ही कुरान नाजिल हुआ था। अल्लाह के रसूल ने कहा कि इन ताक रातों में शबेकद्र ढूंढो। इसलिए इन रातों में जागकर इबादत करना चाहिए। औरतें भी घरों में नफिल नमाज के साथ कुरान की तिलावत कर सकती हैं। जामा मस्जिद के पेश इमाम काजी हाशिम ने कहा कि अभी भी बहुत से लोग इस पास महीने से महरूम हैं। वह कोई न कोई बहाना बनाकर रोजे नहीं रख रहे हैं। ऐसे लोगों पर गुनाह पड़ता है। उन्होंने कहा कि अभी भी वक्त है। वह लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तोबा मांगें और रोजों के साथ सभी नमाजों की पाबंदी करें।
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