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स्कूल में टॉप नहीं किया, लेकिन आज हैं टॉप पर
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स्कूल में टॉप नहीं किया, लेकिन आज हैं ऊंचे मुकाम पर
झांसी। किसी जमाने में प्रथम श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक होती थी। लेकिन, हाल ही में घोषित हुए दसवीं और बारहवीं कक्षा के नतीजों में विद्यार्थियों के बीच नंबरों की जबरदस्त होड़ नजर आई। जिले के विद्यार्थी भी 99 प्रतिशत तक का आंकड़ा छूने में सफल रहे। इन परिस्थितियों में 70-80 फीसदी जैसे शानदार अंक हासिल करने वाले कई विद्यार्थी अपने को पिछड़ा मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये स्थिति ठीक नहीं है। अच्छे अंकों से परीक्षा पास करना अच्छी बात है, लेकिन जिनके परीक्षा में कम अंक आए हैं, उन्हें भी निराश होने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने ऐसे तमाम उदाहरण मौजूद हैं, जिन्होंने कभी कक्षा या स्कूल में टॉप नहीं किया, लेकिन आज अपने कॅरियर में टॉप पर हैं। इन्हीं में से हैं झांसी के जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी, जो औसत विद्यार्थी रहे, लेकिन अपनी मेहनत और ज्ञान के बलबूते आईएएस की परीक्षा में देश में 34वां स्थान हासिल किया।
किताबी कीड़ा न बनें, सर्वांगीण ज्ञान हासिल करें
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी की स्कूली शिक्षा सीतापुर में सामान्य से हिंदी माध्यम विद्यालय में हुई थी। इंटरमीडिएट के बाद बीए में दाखिला लिया और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में जुट गए। दसवीं से लेकर स्नातक तक की परीक्षाएं उन्होंने 59 से 61 फीसदी अंकों के साथ पास कीं। 2009 में उनका चयन पीसीएस में हुआ और पहली पोस्टिंग जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर हुई। लेकिन, ये महज पड़ाव था, मंजिल अभी दूर थी। नौकरी के साथ- साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। 2011 में 26 साल की उम्र में उनका आईएएस में चयन हुआ। इस परीक्षा में उन्होंने देश में 34वां स्थान हासिल किया। जबकि, हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में वे देश में पहले स्थान पर रहे।
शिवसहाय अवस्थी ने बताया कि पाठ्यक्रम आधारित तैयारी करने से कक्षा में अच्छे अंक तो हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन जीवन में उच्च मुकाम हासिल करने के लिए जरूरी है कि आपको पाठ्यक्रम से बाहर का भी समसामयिक ज्ञान हो। नंबरों की दौड़ में न पड़ते हुए सर्वांगीण ज्ञान हासिल करना चाहिए।
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बदला लक्ष्य
जीव विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद डीएम शिवसहाय अवस्थी का डाक्टर बनने का इरादा था। इसकी उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी थी। इसमें उन्होंने अपना एक साल दिया। लेकिन, इसके बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया और प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए।
अभिभावक न बनाएं दबाव
बुंदेलखंड महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र तिवारी के अनुसार स्वाभाविक रूप से पढ़ाई करते हुए बच्चा अच्छे अंक हासिल कर रहा है, तो ये अच्छी बात है। लेकिन, इसके लिए उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए। खासतौर पर अभिभावक इस बात का ख्याल रखें। बच्चे की किसी दूसरे बच्चे से तुलना करने से बचें। कई बार देखने में आता है कि दबाव के चलते बच्चे अवसाद में भी चले जाते हैं। बच्चे अपने रुचि के अनुसार पढ़ें, ये ही उनके लिए बेहतर होता है। अभिभावक मार्गदर्शन करें, परंतु अपनी जिद उन पर न थोपें।
झांसी। किसी जमाने में प्रथम श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक होती थी। लेकिन, हाल ही में घोषित हुए दसवीं और बारहवीं कक्षा के नतीजों में विद्यार्थियों के बीच नंबरों की जबरदस्त होड़ नजर आई। जिले के विद्यार्थी भी 99 प्रतिशत तक का आंकड़ा छूने में सफल रहे। इन परिस्थितियों में 70-80 फीसदी जैसे शानदार अंक हासिल करने वाले कई विद्यार्थी अपने को पिछड़ा मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये स्थिति ठीक नहीं है। अच्छे अंकों से परीक्षा पास करना अच्छी बात है, लेकिन जिनके परीक्षा में कम अंक आए हैं, उन्हें भी निराश होने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने ऐसे तमाम उदाहरण मौजूद हैं, जिन्होंने कभी कक्षा या स्कूल में टॉप नहीं किया, लेकिन आज अपने कॅरियर में टॉप पर हैं। इन्हीं में से हैं झांसी के जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी, जो औसत विद्यार्थी रहे, लेकिन अपनी मेहनत और ज्ञान के बलबूते आईएएस की परीक्षा में देश में 34वां स्थान हासिल किया।
किताबी कीड़ा न बनें, सर्वांगीण ज्ञान हासिल करें
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी की स्कूली शिक्षा सीतापुर में सामान्य से हिंदी माध्यम विद्यालय में हुई थी। इंटरमीडिएट के बाद बीए में दाखिला लिया और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में जुट गए। दसवीं से लेकर स्नातक तक की परीक्षाएं उन्होंने 59 से 61 फीसदी अंकों के साथ पास कीं। 2009 में उनका चयन पीसीएस में हुआ और पहली पोस्टिंग जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर हुई। लेकिन, ये महज पड़ाव था, मंजिल अभी दूर थी। नौकरी के साथ- साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। 2011 में 26 साल की उम्र में उनका आईएएस में चयन हुआ। इस परीक्षा में उन्होंने देश में 34वां स्थान हासिल किया। जबकि, हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में वे देश में पहले स्थान पर रहे।
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शिवसहाय अवस्थी ने बताया कि पाठ्यक्रम आधारित तैयारी करने से कक्षा में अच्छे अंक तो हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन जीवन में उच्च मुकाम हासिल करने के लिए जरूरी है कि आपको पाठ्यक्रम से बाहर का भी समसामयिक ज्ञान हो। नंबरों की दौड़ में न पड़ते हुए सर्वांगीण ज्ञान हासिल करना चाहिए।
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बदला लक्ष्य
जीव विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद डीएम शिवसहाय अवस्थी का डाक्टर बनने का इरादा था। इसकी उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी थी। इसमें उन्होंने अपना एक साल दिया। लेकिन, इसके बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया और प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गए।
अभिभावक न बनाएं दबाव
बुंदेलखंड महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र तिवारी के अनुसार स्वाभाविक रूप से पढ़ाई करते हुए बच्चा अच्छे अंक हासिल कर रहा है, तो ये अच्छी बात है। लेकिन, इसके लिए उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए। खासतौर पर अभिभावक इस बात का ख्याल रखें। बच्चे की किसी दूसरे बच्चे से तुलना करने से बचें। कई बार देखने में आता है कि दबाव के चलते बच्चे अवसाद में भी चले जाते हैं। बच्चे अपने रुचि के अनुसार पढ़ें, ये ही उनके लिए बेहतर होता है। अभिभावक मार्गदर्शन करें, परंतु अपनी जिद उन पर न थोपें।