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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   क्राइम - जेल का ओवरलोड कम करने की तैयारी-City

संगीन मामलों के कैदियों को भेजा जाएगा दूसरी जेल

Sat, 05 Jan 2019 02:18 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 05 Jan 2019 02:18 AM IST
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क्राइम - जेल का ओवरलोड कम करने की तैयारी-City
प्रतीकात्मक तस्वीर

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झांसी। जेल में बंद आजीवन और संगीन मामलों में सजा काट रहे कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। इन कैदियों की सूची बननी शुरू हो गई है। लगभग तीन सौ कैदी यहां से दूसरे जेल भेजे जाएंगे। फर्रुखाबाद, गाजीपुर, इलाहाबाद समेत अन्य जनपदों में इन कैदियों को भेजा जाएगा। इससे कैदियों से ओवर लोड जेल को कुछ राहत मिलेगी।

वर्तमान में जिला कारागार की क्षमता 450 कैदियों की है, लेकिन अभी 1250 कैदी बंद हैं। ऐसे में तीन गुना से अधिक कैदी होने के कारण जेल प्रशासन के सामने चौबीस घंटे चुनौती बनी रहती है। मानक के अनुरूप स्टाफ की किल्लत और क्षमता से ज्यादा बंदी-कैदियों के होने की वजह से जेल की सुरक्षा को भी खतरा बना रहता था। जेल में लोड कम करने के लिए जेल प्रशासन कई महीने से उच्च स्तर पर लिखा-पढ़ी करके ऐसे कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने की मांग कर रहा था, जिनको सजा हो चुकी है और उनके खिलाफ कोई दूसरा मुकदमा भी विचाराधीन नहीं है।
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उच्च स्तर पर आखिर जेल प्रशासन की इस फरियाद को भी सुन लिया गया है। वर्तमान में जिला कारागार में आजीवन कारावास के 300 कैदी हैं। इनमें से सौ कैदी ज्यादा खतरनाक हैं। ऐसे ही दो सौ और कैदियों को छांटा जा रहा है जिनका आपराधिक इतिहास काफी खतरनाक है। इनसे हर समय झगड़े की भी संभावना रहती है। ऐसे सभी कैदियों को दूसरी जेल भेजने की तैयारी है।
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सोने के लिए होती है मारामारी
क्षमता से तीन गुना बंदियों की तादाद से पटी जेल में चैन से सोने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। ज्यादातर बंदियों को जैसे-तैसे रात गुजारनी पड़ती है। कम सोने की वजह से बंदी बीमार भी पड़ते हैं। कई बार तो सोेने के चक्कर में झगड़ा भी हो जाता है। ऐसे में जेल प्रशासन को ही हस्तक्षेप कर मामला संभालना पड़ता है।

व्यवस्था ठीक रखने की बनी रहती चुनौती
क्षमता से ज्यादा बंदियों और कैदियों का बोझ ढो रही जिला जेल में संगीन धाराओं के कैदी भी बंद हैं। ऐसे में सीमित सुरक्षा संसाधनों के बीच इनकी सुरक्षा और निगरानी में जेल प्रशासन के चुनौती भरा होता है। यह गैंग न बना लें, इसको लेकर भी अलग से टीम नजर बनाए रखती है। इसके अलावा, कैदियों से मुलाकात करने वालों की संख्या भी अधिक होने के कारण जेल प्रशासन परेशान रहता है।

बनी रहती है आशंका
जेल में हत्या, डकैती, दुष्कर्म, लूट व अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के बंदी भी हैं। अधिक संख्या के चलते आपसी संघर्ष होने और साजिश रचने और बंदियों के गुट बनाने की आशंका रहती है। प्रत्येक दिन पेशी पर आने-जाने के दौरान बंदियों की जांच में चूक होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन जेल प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से जेल में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं।


कई कैदियों को अन्य जेलों में में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में अधिकारियों के साथ ही शासन को पत्र भी लिखा गया है। सूची भी तैयारी की जा रही है। जल्द ही कैदियों को अन्य जेलों में शिफ्ट किया जाएगा।
राजीव शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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