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ठंड में खुले आसमान के नीचे रखे गए हैं बीस हजार गोवंश
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झांसी। पारा लगातार नीचे गिरता जा रहा, लेकिन जनपद की अस्थाई गोशालाओं में ठंड से निपटने के इंतजाम अब तक नहीं हुए। बीस हजार से अधिक गोवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
जनपद में 27 हजार आवारा गोवंश हैं। इनको ढाई सौ से अधिक गोशालाओं में रखा गया है। 204 अस्थाई गोशालाएं हैं। यहां पशुओं के लिए कोई भी इंतजाम नहीं हैं। यहां बीस हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। पिछले वर्ष तक इनको ठंड से बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था की गई थी. लेकिन इस बार अभी तक यह इंतजाम नहीं किए गए। कुछ जगह तिरपाल के बजाय पतली पॉलिथीन लगाई गई है। नतीजतन, गोवंशों को ठंड में खुले आसमान के नीचे बांधा जा रहा है। ठंड से बचाव के लिए यहां कोई दूसरे इंतजाम भी नहीं किए गए।
चिरगांव, बंगरा, बबीना, बड़ागांव, मोंठ आदि इलाकों में स्थित बड़ी अस्थाई गोआश्रय स्थलों में यही हाल है। इन सभी जगहों पर गोवंश बाहर ठंड में रखे गए हैं जबकि रात में न्यूनतम दस डिग्री तक पारा पहुंच चुका। तिरपाल आदि न होने से गोवंश के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। यहां तिरपाल की व्यवस्था ग्राम पंचायतों को करनी है लेकिन, बजट न होने के बहाने पंचायत इसके लिए खर्च करने में हीलाहवाली कर रही हैं।
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जिला गोवंश समिति की बैठक बुलाई गई है। उसके जरिए सभी जगहों पर तिरपाल आदि की व्यवस्था कराई जाएगी। इसकी व्यवस्था ग्राम पंचायत निधि के माध्यम से ही होती है।
डा.योगेंद्र तोमर, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
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जनपद में 27 हजार आवारा गोवंश हैं। इनको ढाई सौ से अधिक गोशालाओं में रखा गया है। 204 अस्थाई गोशालाएं हैं। यहां पशुओं के लिए कोई भी इंतजाम नहीं हैं। यहां बीस हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। पिछले वर्ष तक इनको ठंड से बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था की गई थी. लेकिन इस बार अभी तक यह इंतजाम नहीं किए गए। कुछ जगह तिरपाल के बजाय पतली पॉलिथीन लगाई गई है। नतीजतन, गोवंशों को ठंड में खुले आसमान के नीचे बांधा जा रहा है। ठंड से बचाव के लिए यहां कोई दूसरे इंतजाम भी नहीं किए गए।
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चिरगांव, बंगरा, बबीना, बड़ागांव, मोंठ आदि इलाकों में स्थित बड़ी अस्थाई गोआश्रय स्थलों में यही हाल है। इन सभी जगहों पर गोवंश बाहर ठंड में रखे गए हैं जबकि रात में न्यूनतम दस डिग्री तक पारा पहुंच चुका। तिरपाल आदि न होने से गोवंश के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। यहां तिरपाल की व्यवस्था ग्राम पंचायतों को करनी है लेकिन, बजट न होने के बहाने पंचायत इसके लिए खर्च करने में हीलाहवाली कर रही हैं।
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जिला गोवंश समिति की बैठक बुलाई गई है। उसके जरिए सभी जगहों पर तिरपाल आदि की व्यवस्था कराई जाएगी। इसकी व्यवस्था ग्राम पंचायत निधि के माध्यम से ही होती है।
डा.योगेंद्र तोमर, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी