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उद्योग: न मशीनों का शोर और न ही कामगारों की आवाजाही -City
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:49 PM IST
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न मशीनों का शोर और न ही कामगारों की आवाजाही
सब हेड... हाशिये पर रहा बुंदेलखंड का औद्योगिक विकास
- औद्योगिक क्षेत्रों की ज्यादातर जमीन पड़ी है खाली
- शासन - प्रशासन के नुमाइंदों के साथ आज होगा विकास पर मंथन
विकास सनाड्य
झांसी। औद्योगिक क्षेत्र का नाम जुबां पर आते ही एक तस्वीर उभर कर सामने आती है, जिसमें कारखानों में मशीनों का शोर सुनाई देता है, सड़कों पर कामगारों की आवाजाही दिखाई देती है और सरपट दौड़ते नजर आते हैं माल से लदे वाहन। लेकिन, औद्योगिक क्षेत्र की यह तस्वीर बुंदेलखंड में कभी हकीकत में नहीं बदल पाई। इसकी बानगी बिजौली ग्रोथ सेंटर को देखकर की जा सकती है, जिसमें कारखानों के हिस्से की ज्यादातर जमीन सपाट पड़ी हुई है और दिन भर यहां सन्नाटा पसरा रहता है। हालांकि, झांसी में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की घोषणा के बाद से औद्योगिक विकास को लेकर हलचल बढ़ी है। स्थानीय उद्यमी भी उत्साहित हैं। इसी की परिणीति है शनिवार को होने वाली बुंदेलखंड इन्वेस्टर समिट, जिसमें शासन और प्रशासन के नुमाइंदों के साथ क्षेत्र के उद्यमी औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे।
बिजौली ग्रोथ सेंटर: 298 प्लाट में से सिर्फ 39 में ही उद्योग
शहर से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थिति बिजौली ग्रोथ सेंटर की स्थापना 1999 में हुई थी। 341 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में बनाए गए इस औद्योगिक क्षेत्र के पहले फेज में 90 औद्योगिक भूखंड विकसित किए गए थे। इनमें से 79 आवंटित भी कर दिए गए थे। लेकिन, इनमें से महज 29 में ही इकाइयां काम कर रही हैं। बाकी जमीन खाली पड़ी हुई है। इसी प्रकार ग्रोथ सेंटर के दूसरे फेज में 208 औद्योगिक भूखंड विकसित किए गए थे और इनमें से 127 का आवंटन भी हो गया था, लेकिन केवल 10 इकाइयां ही स्थापित हो पाई हैं।
औद्योगिक क्षेत्र बिजौली: 256 प्लाटों में से सिर्फ 72 में इकाई
पैंतीस साल पहले शहर से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर औद्योगिक क्षेत्र बिजौली की स्थापना हुई थी। 200 एकड़ के इस औद्योगिक क्षेत्र में 256 औद्योगिक प्लाट विकसित किए गए थे। इनमें से 255 आवंटित भी किए जा चुके हैं। लेकिन, यहां वर्तमान में यहां 72 प्लाटों का ही उपयोग हो रहा है। बाकी सारे खाली पड़े हुए हैं।
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ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र: 23 इकाई कार्यरत होने का दावा
ग्वालियर रोड पर जिले का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र है। पंद्रह एकड़ के क्षेत्रफल में इसकी स्थापना 1961 में हुई थी। यहां 30 औद्योगिक भूखंड विकसित कर उद्यमियों को आवंटित कर दिए गए थे। उद्योग विभाग का दावा है कि इनमें से ज्यादातर में औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। जबकि, हकीकत इससे इतर है। इनमें से कई प्लाटों का इस्तेमाल अन्य कारोबारी गतिविधियों में किया जा रहा है।
फिर भी ‘फास्ट मूविंग’ जोन
सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों की तीन अलग-अलग कैटेगिरी वेरी फास्ट मूविंग, फास्ट मूविंग और स्लो मूविंग बना रखी हैं। इसी कैटेगिरी के मुताबिक जमीन की कीमतें तय होती हैं। बिजौली ग्रोथ सेंटर उद्योगों के लिए तरस रहा है। बावजूद, इसे फास्ट मूविंग जोन में डाल रखा है। यहां औद्योगिक भूमि की कीमत 2,975 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। जबकि, पांच साल पहले यह दर 800 रुपये प्रति वर्गमीटर थी।
एमपी पहली पसंद
स्थानीय उद्यमियों के लिए पहली पसंद मध्य प्रदेश बना हुआ है। टीकमगढ़ के प्रतापपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां झांसी के उद्यमियों की हैं। इसके अलावा यहां एक और औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें यहां से और भी उद्यमियों के जाने की संभावना है। इस बारे में चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि एमपी में कारोबार स्थापित करना और चलाना बेहद आसान है। एक ही स्थान पर सारे काम हो जाते हैं और सरकारी तंत्र का रवैया सहयोगात्मक होता है। यही वजह है कि उद्यमी वहां जा रहे हैं।
ये हैं समस्याएं
- मध्य प्रदेश के मुकाबले यहां बिजली की दरें हैं अधिक
- जमीन की कीमत भी है अधिक
- उद्यमियों को नहीं मिल पाती है सब्सिडी
- लंबे समय तक बिजली की समस्या रही
- सरकारी विभागों से आसानी से नहीं मिल पाती एनओसी
- कुशल श्रमिकों का बना रहता है अभाव
- बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में बैंक तक नहीं
- उद्योगों के लिए पानी की भी है कमी
- उद्यम के लिए आसानी से नहीं मिल पाता है ऋण
अब होगा बदलाव
पूर्व में क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी का नतीजा है कि तमाम खूबियों के बाद भी यह इलाका पिछड़ गया। लेकिन, प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति में बुंदेलखंड विशेष तरजीह दी गई है। इससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव दिखेगा।
- सुधीर श्रीवास्तव, उपायुक्त - उद्योग विभाग
नये उद्यमियों को मिलेंगे प्लाट
उद्योग न लगाने पर सौ से अधिक भूखंडों के आवंटन निरस्त किए जा चुके हैं। जमीन का औद्योगिक उपयोग न करने वालों के प्रति सरकार का रवैया सख्त है। खाली हुए प्लाट नये उद्यमियों को आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य सहूलियतें भी बढ़ा दी गई हैं।
- गिरीश कुमार शाक्या, क्षेत्रीय प्रबंधक - यूपीएसआईडीसी
यह बोले उद्यमी
.........................
सस्ती हो बिजली
एमपी में उद्योगों को साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है, जबकि यहां 7-8 रुपये प्रति यूनिट बिजली है। बिजली का खर्च बढ़ने से लागत बढ़ जाती है और मुनाफा कम हो जाता है। दरें कम करनी चाहिए, वरना उद्यमी लगातार एमपी की ओर रुख करते रहेंगे।
- अशोक आनंदानी, उद्यमी
आसानी से मिलें प्लाट
औद्योगिक क्षेत्रों में प्लाट आवंटन की प्रक्रिया बेहद जटिल है। यह आसान बनाई जाए। इसके अलावा बिजली, पानी की सहूलियतें बढ़ाई जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्र का बिजली का अलग से फीडर हो। इसे आबादी से न जोड़ा जाए। कारोबार शुरू करना और चलाना आसान होने पर ही उद्यमी आएंगे।
- मनोज परिहार, उद्यमी
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न मशीनों का शोर और न ही कामगारों की आवाजाही
सब हेड... हाशिये पर रहा बुंदेलखंड का औद्योगिक विकास
- औद्योगिक क्षेत्रों की ज्यादातर जमीन पड़ी है खाली
- शासन - प्रशासन के नुमाइंदों के साथ आज होगा विकास पर मंथन
विकास सनाड्य
झांसी। औद्योगिक क्षेत्र का नाम जुबां पर आते ही एक तस्वीर उभर कर सामने आती है, जिसमें कारखानों में मशीनों का शोर सुनाई देता है, सड़कों पर कामगारों की आवाजाही दिखाई देती है और सरपट दौड़ते नजर आते हैं माल से लदे वाहन। लेकिन, औद्योगिक क्षेत्र की यह तस्वीर बुंदेलखंड में कभी हकीकत में नहीं बदल पाई। इसकी बानगी बिजौली ग्रोथ सेंटर को देखकर की जा सकती है, जिसमें कारखानों के हिस्से की ज्यादातर जमीन सपाट पड़ी हुई है और दिन भर यहां सन्नाटा पसरा रहता है। हालांकि, झांसी में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की घोषणा के बाद से औद्योगिक विकास को लेकर हलचल बढ़ी है। स्थानीय उद्यमी भी उत्साहित हैं। इसी की परिणीति है शनिवार को होने वाली बुंदेलखंड इन्वेस्टर समिट, जिसमें शासन और प्रशासन के नुमाइंदों के साथ क्षेत्र के उद्यमी औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे।
बिजौली ग्रोथ सेंटर: 298 प्लाट में से सिर्फ 39 में ही उद्योग
शहर से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थिति बिजौली ग्रोथ सेंटर की स्थापना 1999 में हुई थी। 341 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में बनाए गए इस औद्योगिक क्षेत्र के पहले फेज में 90 औद्योगिक भूखंड विकसित किए गए थे। इनमें से 79 आवंटित भी कर दिए गए थे। लेकिन, इनमें से महज 29 में ही इकाइयां काम कर रही हैं। बाकी जमीन खाली पड़ी हुई है। इसी प्रकार ग्रोथ सेंटर के दूसरे फेज में 208 औद्योगिक भूखंड विकसित किए गए थे और इनमें से 127 का आवंटन भी हो गया था, लेकिन केवल 10 इकाइयां ही स्थापित हो पाई हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र बिजौली: 256 प्लाटों में से सिर्फ 72 में इकाई
पैंतीस साल पहले शहर से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर औद्योगिक क्षेत्र बिजौली की स्थापना हुई थी। 200 एकड़ के इस औद्योगिक क्षेत्र में 256 औद्योगिक प्लाट विकसित किए गए थे। इनमें से 255 आवंटित भी किए जा चुके हैं। लेकिन, यहां वर्तमान में यहां 72 प्लाटों का ही उपयोग हो रहा है। बाकी सारे खाली पड़े हुए हैं।
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ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र: 23 इकाई कार्यरत होने का दावा
ग्वालियर रोड पर जिले का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र है। पंद्रह एकड़ के क्षेत्रफल में इसकी स्थापना 1961 में हुई थी। यहां 30 औद्योगिक भूखंड विकसित कर उद्यमियों को आवंटित कर दिए गए थे। उद्योग विभाग का दावा है कि इनमें से ज्यादातर में औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। जबकि, हकीकत इससे इतर है। इनमें से कई प्लाटों का इस्तेमाल अन्य कारोबारी गतिविधियों में किया जा रहा है।
फिर भी ‘फास्ट मूविंग’ जोन
सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों की तीन अलग-अलग कैटेगिरी वेरी फास्ट मूविंग, फास्ट मूविंग और स्लो मूविंग बना रखी हैं। इसी कैटेगिरी के मुताबिक जमीन की कीमतें तय होती हैं। बिजौली ग्रोथ सेंटर उद्योगों के लिए तरस रहा है। बावजूद, इसे फास्ट मूविंग जोन में डाल रखा है। यहां औद्योगिक भूमि की कीमत 2,975 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। जबकि, पांच साल पहले यह दर 800 रुपये प्रति वर्गमीटर थी।
एमपी पहली पसंद
स्थानीय उद्यमियों के लिए पहली पसंद मध्य प्रदेश बना हुआ है। टीकमगढ़ के प्रतापपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां झांसी के उद्यमियों की हैं। इसके अलावा यहां एक और औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें यहां से और भी उद्यमियों के जाने की संभावना है। इस बारे में चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि एमपी में कारोबार स्थापित करना और चलाना बेहद आसान है। एक ही स्थान पर सारे काम हो जाते हैं और सरकारी तंत्र का रवैया सहयोगात्मक होता है। यही वजह है कि उद्यमी वहां जा रहे हैं।
ये हैं समस्याएं
- मध्य प्रदेश के मुकाबले यहां बिजली की दरें हैं अधिक
- जमीन की कीमत भी है अधिक
- उद्यमियों को नहीं मिल पाती है सब्सिडी
- लंबे समय तक बिजली की समस्या रही
- सरकारी विभागों से आसानी से नहीं मिल पाती एनओसी
- कुशल श्रमिकों का बना रहता है अभाव
- बिजौली औद्योगिक क्षेत्र में बैंक तक नहीं
- उद्योगों के लिए पानी की भी है कमी
- उद्यम के लिए आसानी से नहीं मिल पाता है ऋण
अब होगा बदलाव
पूर्व में क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी का नतीजा है कि तमाम खूबियों के बाद भी यह इलाका पिछड़ गया। लेकिन, प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति में बुंदेलखंड विशेष तरजीह दी गई है। इससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव दिखेगा।
- सुधीर श्रीवास्तव, उपायुक्त - उद्योग विभाग
नये उद्यमियों को मिलेंगे प्लाट
उद्योग न लगाने पर सौ से अधिक भूखंडों के आवंटन निरस्त किए जा चुके हैं। जमीन का औद्योगिक उपयोग न करने वालों के प्रति सरकार का रवैया सख्त है। खाली हुए प्लाट नये उद्यमियों को आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य सहूलियतें भी बढ़ा दी गई हैं।
- गिरीश कुमार शाक्या, क्षेत्रीय प्रबंधक - यूपीएसआईडीसी
यह बोले उद्यमी
.........................
सस्ती हो बिजली
एमपी में उद्योगों को साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है, जबकि यहां 7-8 रुपये प्रति यूनिट बिजली है। बिजली का खर्च बढ़ने से लागत बढ़ जाती है और मुनाफा कम हो जाता है। दरें कम करनी चाहिए, वरना उद्यमी लगातार एमपी की ओर रुख करते रहेंगे।
- अशोक आनंदानी, उद्यमी
आसानी से मिलें प्लाट
औद्योगिक क्षेत्रों में प्लाट आवंटन की प्रक्रिया बेहद जटिल है। यह आसान बनाई जाए। इसके अलावा बिजली, पानी की सहूलियतें बढ़ाई जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्र का बिजली का अलग से फीडर हो। इसे आबादी से न जोड़ा जाए। कारोबार शुरू करना और चलाना आसान होने पर ही उद्यमी आएंगे।
- मनोज परिहार, उद्यमी