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जगन्नथ जी की रथयात्रा-City
Updated Sun, 25 Jun 2017 07:03 PM IST
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भक्तों का करने कल्याण, रथ पर निकले भगवान
सब हेड: बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र संग प्रभु जगन्नाथ स्वामी की निकली यात्रा
क्रासर
रथ की रस्सियां खींचने के लिए उत्साहित रहे भक्त
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भक्तों का कल्याण करने के लिए भगवान जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा और उनके भाई बलभद्र जी के विग्रह रथ में सवार होकर शहर में निकले। भगवान की यात्रा के रथ की रस्सियों को खींचने के लिए भक्त उत्साहित नजर आए। जगन्नाथ स्वामी के जयकारों और हरीनाम संकीर्तन की धुनों के बीच शहर में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकाली गई।
रविवार शाम को गोलाकुआं स्थित जगन्नाथ मंदिर में आरती के बाद बैंडबाजों की भक्ति धुनों के साथ रथयात्रा प्रारंभ हुई। केसरिया धर्म ध्वज लहराते युवा भक्त जय जगन्नाथ के जयकारे लगा रहे थे। गंधीगर का टपरा, सराफा बाजार, मानिक चौक, बड़ा बाजार, कोतवाली की ढाल से होती हुई रथयात्रा वापस मंदिर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रसाद में जामुन, चना व मूंग की दाल का प्रसाद वितरण किया गया। वहीं शहर के कई व्यापारी संगठनों व श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया। लोगों ने शरबत और ठंडा पानी पिलाकर जुलूस में शामिल भक्तों का स्वागत किया।
इस अवसर पर शिवा नौराही, संजय नौराही, राकेश लक्षकार, मनोज नीखरा, हर्ष वर्धन, भरत सेठ, अन्नू गुप्ता, प्रदीप सरावगी, आलोक कनकने आदि मौजूद रहे। महानगर के कई मंदिरों में जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा के उपलक्ष्य में आकर्षक झांकियां सजाई गई और लोगों में चना, मूंग की दाल व जामुन का प्रसाद वितरण हुआ।
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कई पुराणों में है महिमा का उल्लेख
पद्म पुराण, स्कंद पुराण, नारद पुराण में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी की महिमा का उल्लेख है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति रथयात्रा में शामिल होता है, रथयात्रा की रस्सी पकड़ कर खींचता है तथा रथ के आगे-आगे सफाई का काम करता है। उस पर भगवान की असीम कृपा होती है। भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर सेवा समिति के शिवा नौराही ने बताया कि गोलाकुआं स्थित मंदिर लगभग 171 वर्ष पुराना है और प्रतिवर्ष मंदिर से रथयात्रा निकलती है।
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भक्तों का करने कल्याण, रथ पर निकले भगवान
सब हेड: बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र संग प्रभु जगन्नाथ स्वामी की निकली यात्रा
क्रासर
रथ की रस्सियां खींचने के लिए उत्साहित रहे भक्त
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भक्तों का कल्याण करने के लिए भगवान जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा और उनके भाई बलभद्र जी के विग्रह रथ में सवार होकर शहर में निकले। भगवान की यात्रा के रथ की रस्सियों को खींचने के लिए भक्त उत्साहित नजर आए। जगन्नाथ स्वामी के जयकारों और हरीनाम संकीर्तन की धुनों के बीच शहर में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकाली गई।
रविवार शाम को गोलाकुआं स्थित जगन्नाथ मंदिर में आरती के बाद बैंडबाजों की भक्ति धुनों के साथ रथयात्रा प्रारंभ हुई। केसरिया धर्म ध्वज लहराते युवा भक्त जय जगन्नाथ के जयकारे लगा रहे थे। गंधीगर का टपरा, सराफा बाजार, मानिक चौक, बड़ा बाजार, कोतवाली की ढाल से होती हुई रथयात्रा वापस मंदिर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रसाद में जामुन, चना व मूंग की दाल का प्रसाद वितरण किया गया। वहीं शहर के कई व्यापारी संगठनों व श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया। लोगों ने शरबत और ठंडा पानी पिलाकर जुलूस में शामिल भक्तों का स्वागत किया।
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इस अवसर पर शिवा नौराही, संजय नौराही, राकेश लक्षकार, मनोज नीखरा, हर्ष वर्धन, भरत सेठ, अन्नू गुप्ता, प्रदीप सरावगी, आलोक कनकने आदि मौजूद रहे। महानगर के कई मंदिरों में जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा के उपलक्ष्य में आकर्षक झांकियां सजाई गई और लोगों में चना, मूंग की दाल व जामुन का प्रसाद वितरण हुआ।
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कई पुराणों में है महिमा का उल्लेख
पद्म पुराण, स्कंद पुराण, नारद पुराण में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी की महिमा का उल्लेख है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति रथयात्रा में शामिल होता है, रथयात्रा की रस्सी पकड़ कर खींचता है तथा रथ के आगे-आगे सफाई का काम करता है। उस पर भगवान की असीम कृपा होती है। भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर सेवा समिति के शिवा नौराही ने बताया कि गोलाकुआं स्थित मंदिर लगभग 171 वर्ष पुराना है और प्रतिवर्ष मंदिर से रथयात्रा निकलती है।