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‘लेमन’ और ‘रोजा’ की प्रजाति बढ़ाएगी किसानों की आय
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‘लेमन’ और ‘रोजा’ की प्रजाति बढ़ाएगी किसानों की आय
झांसी। बुंदेलखंड परिक्षेत्र की भौगोलिक विषमताओं और आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ललितपुर के नाराहट में औषद्यीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन के हब के रूप में विकसित करने की परियोजना भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने स्वीकृत कर दी है। साढ़े छह करोड़ रुपये की इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को दी गई है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायो मेडिकल साइंस विभाग के डॉ. रामवीर सिंह ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए बीयू, लखनऊ और जम्मू के सीएसआईआर विभाग और कन्नौज के एमएसएमई- एफएफडीसी की तरफ से लेमन और रोजा घास की प्रजाति को विकसित करने का प्रशिक्षण शुरू हुआ। नाराहट गांव में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें दर्जनों किसानों ने हिस्सा लिया। इसके लिए इसी गांव में दो क्लस्टर विकसित होंगे जहां, दोनों प्रजातियों को रोपा जाएगा। इसके लिए स्थान और किसान को चिह्नित करने का कार्य प्रगति पर है।
जम्मू आईआईआईएम के वैज्ञानिक सभाजीत ने प्रशिक्षण शिविर में किसानों को लेमन और रोजा ग्रास की किस्मों, भूमि प्रकार, पानी की आवश्यकता तथा संभावित बाजार के बारे में तकनीकी जानकारी प्रदान की तथा बताया कि इच्छुक उनसे संपर्क कर सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जानकी, हरीराम, जोलु, मंसुखी, भागवती, ज्ञानबाई आदि उपस्थित रहीं।
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झांसी। बुंदेलखंड परिक्षेत्र की भौगोलिक विषमताओं और आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ललितपुर के नाराहट में औषद्यीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन के हब के रूप में विकसित करने की परियोजना भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने स्वीकृत कर दी है। साढ़े छह करोड़ रुपये की इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को दी गई है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायो मेडिकल साइंस विभाग के डॉ. रामवीर सिंह ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए बीयू, लखनऊ और जम्मू के सीएसआईआर विभाग और कन्नौज के एमएसएमई- एफएफडीसी की तरफ से लेमन और रोजा घास की प्रजाति को विकसित करने का प्रशिक्षण शुरू हुआ। नाराहट गांव में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें दर्जनों किसानों ने हिस्सा लिया। इसके लिए इसी गांव में दो क्लस्टर विकसित होंगे जहां, दोनों प्रजातियों को रोपा जाएगा। इसके लिए स्थान और किसान को चिह्नित करने का कार्य प्रगति पर है।
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जम्मू आईआईआईएम के वैज्ञानिक सभाजीत ने प्रशिक्षण शिविर में किसानों को लेमन और रोजा ग्रास की किस्मों, भूमि प्रकार, पानी की आवश्यकता तथा संभावित बाजार के बारे में तकनीकी जानकारी प्रदान की तथा बताया कि इच्छुक उनसे संपर्क कर सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जानकी, हरीराम, जोलु, मंसुखी, भागवती, ज्ञानबाई आदि उपस्थित रहीं।
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