{"_id":"5ba54f99867a55013e75c4a3","slug":"171537560473-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुहर्रम-City","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुहर्रम-City
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
आंखें नम, जुबां पर हुसैन का गम
मोहर्रम पर निकला मातमी जुलूस, अखाड़ों ने दिखाई कलाबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। यौम-ए-आशूरा पर गम में डूबे हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले, हर ओर जिक्र-ए-शहादत, शहर की तंग गलियों से कर्बला तक गूंजी या हुसैन की सदाएं। हर आंख नम और चेहरे पर हुसैन का गम था। इंसानियत और सच्चाई के लिए लड़ते-लड़ते कर्बला के मैदान में हसन और हुसैन प्यासे शहीद हुए थे। उनकी शहादत में शुक्रवार को ताजिये, बुर्राकों ओर अखाड़ों का जुलूस निकाला गया। मातमी धुनों के साथ निकाले गए ताजियों को लक्ष्मीताल स्थित कर्बला में ठंडा किया गया। जुलूस में शामिल अखाड़ों में युवाओं ने कई स्थानों पर कला का प्रर्दशन किया।
दसवीं मोहर्रम पर शहर भर में ताजियों, बुर्राकों के साथ अखाड़ों का जुलूस निकाला गया। सुबह से ही शहर के गंदीगर के टपरा पर ताजियों, बुर्राकों और अखाड़े जमा होना शुरू हो गए। ताजिया कमेटी के जिलाध्यक्ष याकूब अहमद मंसूरी और ताजिया कमेंटी के सदस्यों के द्वारा मिसिलबद्घ हुए, जो जुलूस के रूप में ढोल, और बैंड की मातमी धुन के बीच सराफा बाजार, मानिक चौक, सिटी पोस्ट ऑफिस, सिंधी तिराहे होते हुए रानी महल पहुंचे। यहां से सभी ताजिये और बुर्राक वापस अपने-अपने इमामबाड़े पर लौट गए।
शाम होते ही सभी ताजिये, बुर्राकें ओर मस्जिद गंदीगर के टपरा पर एकत्रित हुए। जो सराफा बाजार, मालिनों के चौराहा, होकर बड़ा बाजार पहुंचे। यहां पर बुर्राकें और अखाड़े अपने मुकाबले कर अपने इमामबाड़ों पर लौट गए, वहीं ताजिये ठंडा करने के लिए लक्ष्मीताल स्थित कर्बला के लिए प्रस्थान हुए, जो फातिहा के बाद कर्बला में ठंडे कर दिए गए। सिंधी तिराहे पर कांग्रेसी नेता प्रदीप जैन आदित्य और इम्तियाज हुसैन ने कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस में लंगर का वितरण किया। इस मौके पर नूर अहमद मंसूरी, तबरेज, आरिफ, मुकेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मोहन नेपाल, सुलेमान अहमद मंसूरी, हाजी महमूद, फहीम, मोहम्मद ताहिर, हनीफ खान, रवीश त्रिपाठी ओर अतुल किलपन मौजूद रहे।
विज्ञापन
शियाओं ने मातम कर निकाला जुलूस
झांसी। कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शिया समुदाय के लोगों ने मातमी जुलूस निकाला। मुहर्रम की दस तारीख को सुबह गमगीन माहौल में जुलूस मेवातीपुरा स्थित हुसैनी इमामबाड़े से शुरू किया गया, जो दरीगरान स्थित नूर मंजिल और नरिया बाजार से होता हुआ गंदीगर का टपरा पर पहुंचा जहां पर मौलानाओं ने तकरीर में बताया कि हजरत इमाम हुसैन इंसानियत की जंग लड़ते हुए मैदान-ए- कर्बला में प्यासे शहीद हुए थे। जुलूस में या हुसैन, शाह हुसैन बादशाह हुसैन की सदाएं गूंज रहीं थी। वहां से मातम करते हुए मातमी जुलूस कर्बला पहुंचा।
सुरक्षा रही चाक चौबंद
मोहर्रम के जुलूस के मद्देनजर शहर में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। जहां एक और शहर कोतवाल उमेंश चंद्र त्रिपाठी अपनी टीम के साथ जुलूस ताजियों, बुर्राकों और अखाड़ोें के साथ हर व्यक्ति पर नजर रखे हुए थे, वहीं बड़ागांव थाना प्रभारी शियाओं के मातमी जुलूस के साथ चल रहे थे। तो पुलिस के आला अधिकारी जूलूस में मौजूद रहे। इस बीच एलआईयू के लोग भी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे।
आकर्षण का केंद्र रहे
मोहर्रम के जुलूस में हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक दयाराम बढ़ई की मस्जिद, बाईसाब का ताजिया, राई का ताजिया, करीम बख्श का ताजिया, चौधरी सिराज का ताजिया, सत्तार बाबा का ताजिया, कासिम उस्ताद व ललइ बजीर की बुर्राक, जुम्मन की बुर्राक, हमीद की बुर्राक, महबूब की बुर्राक आकर्षण का केंद्र रहीं।
ताजियादारोें का सम्मान
झांसी। मेरा भारत सेवा मिशन एवं एएसएन जीनियस इंस्टीट्यूट की ओर से सीपरी बाजार के सभी ताजियादारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तीन सबसे खूबसूरत ताजियों को शील्ड प्रदान की गई। पहला पुरस्कार मोहम्मद सईद को, दूसरा पुरस्कार शकील तथा तीसरा पुरस्कार रईस को दिया गया। इन्हें शील्ड व नकद राशि भी प्रदान की गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों में सीपरी बाजार ताजिया कमेटी के अध्यक्ष चौधरी माबूद कुरैशी, निसार खान गुड्डू के अलावा जकरिया खान, डॉ. फिरोज खान, नसीर मकरानी मौजूद रहे।
मोहर्रम पर निकला मातमी जुलूस, अखाड़ों ने दिखाई कलाबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। यौम-ए-आशूरा पर गम में डूबे हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले, हर ओर जिक्र-ए-शहादत, शहर की तंग गलियों से कर्बला तक गूंजी या हुसैन की सदाएं। हर आंख नम और चेहरे पर हुसैन का गम था। इंसानियत और सच्चाई के लिए लड़ते-लड़ते कर्बला के मैदान में हसन और हुसैन प्यासे शहीद हुए थे। उनकी शहादत में शुक्रवार को ताजिये, बुर्राकों ओर अखाड़ों का जुलूस निकाला गया। मातमी धुनों के साथ निकाले गए ताजियों को लक्ष्मीताल स्थित कर्बला में ठंडा किया गया। जुलूस में शामिल अखाड़ों में युवाओं ने कई स्थानों पर कला का प्रर्दशन किया।
दसवीं मोहर्रम पर शहर भर में ताजियों, बुर्राकों के साथ अखाड़ों का जुलूस निकाला गया। सुबह से ही शहर के गंदीगर के टपरा पर ताजियों, बुर्राकों और अखाड़े जमा होना शुरू हो गए। ताजिया कमेटी के जिलाध्यक्ष याकूब अहमद मंसूरी और ताजिया कमेंटी के सदस्यों के द्वारा मिसिलबद्घ हुए, जो जुलूस के रूप में ढोल, और बैंड की मातमी धुन के बीच सराफा बाजार, मानिक चौक, सिटी पोस्ट ऑफिस, सिंधी तिराहे होते हुए रानी महल पहुंचे। यहां से सभी ताजिये और बुर्राक वापस अपने-अपने इमामबाड़े पर लौट गए।
विज्ञापन
शाम होते ही सभी ताजिये, बुर्राकें ओर मस्जिद गंदीगर के टपरा पर एकत्रित हुए। जो सराफा बाजार, मालिनों के चौराहा, होकर बड़ा बाजार पहुंचे। यहां पर बुर्राकें और अखाड़े अपने मुकाबले कर अपने इमामबाड़ों पर लौट गए, वहीं ताजिये ठंडा करने के लिए लक्ष्मीताल स्थित कर्बला के लिए प्रस्थान हुए, जो फातिहा के बाद कर्बला में ठंडे कर दिए गए। सिंधी तिराहे पर कांग्रेसी नेता प्रदीप जैन आदित्य और इम्तियाज हुसैन ने कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस में लंगर का वितरण किया। इस मौके पर नूर अहमद मंसूरी, तबरेज, आरिफ, मुकेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मोहन नेपाल, सुलेमान अहमद मंसूरी, हाजी महमूद, फहीम, मोहम्मद ताहिर, हनीफ खान, रवीश त्रिपाठी ओर अतुल किलपन मौजूद रहे।
विज्ञापन
शियाओं ने मातम कर निकाला जुलूस
झांसी। कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शिया समुदाय के लोगों ने मातमी जुलूस निकाला। मुहर्रम की दस तारीख को सुबह गमगीन माहौल में जुलूस मेवातीपुरा स्थित हुसैनी इमामबाड़े से शुरू किया गया, जो दरीगरान स्थित नूर मंजिल और नरिया बाजार से होता हुआ गंदीगर का टपरा पर पहुंचा जहां पर मौलानाओं ने तकरीर में बताया कि हजरत इमाम हुसैन इंसानियत की जंग लड़ते हुए मैदान-ए- कर्बला में प्यासे शहीद हुए थे। जुलूस में या हुसैन, शाह हुसैन बादशाह हुसैन की सदाएं गूंज रहीं थी। वहां से मातम करते हुए मातमी जुलूस कर्बला पहुंचा।
सुरक्षा रही चाक चौबंद
मोहर्रम के जुलूस के मद्देनजर शहर में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। जहां एक और शहर कोतवाल उमेंश चंद्र त्रिपाठी अपनी टीम के साथ जुलूस ताजियों, बुर्राकों और अखाड़ोें के साथ हर व्यक्ति पर नजर रखे हुए थे, वहीं बड़ागांव थाना प्रभारी शियाओं के मातमी जुलूस के साथ चल रहे थे। तो पुलिस के आला अधिकारी जूलूस में मौजूद रहे। इस बीच एलआईयू के लोग भी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे।
आकर्षण का केंद्र रहे
मोहर्रम के जुलूस में हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक दयाराम बढ़ई की मस्जिद, बाईसाब का ताजिया, राई का ताजिया, करीम बख्श का ताजिया, चौधरी सिराज का ताजिया, सत्तार बाबा का ताजिया, कासिम उस्ताद व ललइ बजीर की बुर्राक, जुम्मन की बुर्राक, हमीद की बुर्राक, महबूब की बुर्राक आकर्षण का केंद्र रहीं।
ताजियादारोें का सम्मान
झांसी। मेरा भारत सेवा मिशन एवं एएसएन जीनियस इंस्टीट्यूट की ओर से सीपरी बाजार के सभी ताजियादारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तीन सबसे खूबसूरत ताजियों को शील्ड प्रदान की गई। पहला पुरस्कार मोहम्मद सईद को, दूसरा पुरस्कार शकील तथा तीसरा पुरस्कार रईस को दिया गया। इन्हें शील्ड व नकद राशि भी प्रदान की गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों में सीपरी बाजार ताजिया कमेटी के अध्यक्ष चौधरी माबूद कुरैशी, निसार खान गुड्डू के अलावा जकरिया खान, डॉ. फिरोज खान, नसीर मकरानी मौजूद रहे।