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नौकरी के बिना ही दे दिया वेतन-Lalitpur
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रेलवे से तनख्वाह, नौकरी दूसरी जगह
झांसी। रेलवे के सहायक लोको पायलट के पद पर ट्रेनिंग लेने के बाद एक कर्मचारी ने ज्वाइनिंग (नियुक्ति) नहीं की और इसके बाद भी उसके खाते में तनख्वाह जाती रही। पता चला कि कर्मचारी दूसरी जगह नौकरी करने लगा। कार्मिक विभाग ने जांच में मामला पकड़े जाने के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही तनख्वाह बनाने में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं।
जनवरी 2017 में राजस्थान के दिनेश चंद्र मीना पुत्र कुंदन लाल मीना की भर्ती सहायक लोको पायलट के पद पर हुई थी। भर्ती के बाद उनको ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेज दिया गया। उनको जनवरी 2017 से अप्रैल 2017 तक की अवधि का ट्रेनिंग का स्टाई फंड दिया गया। ट्रेनिंग के बाद परिणाम आ गया मगर दिनेश ने नियुक्ति नहीं ली। इसके बाद संबंधित एलआर विभाग ने मई 2017 से सितंबर 2017 तक उनका वेतन जारी नहीं किया। मगर अक्तूबर 2017 में 26378 रुपये, नवंबर 2017 में 80271 रुपये, दिसंबर 2017 में 26378 रुपये, जनवरी 2018 में 27,142 रुपये व फरवरी 2018 में 27142 रुपये (कुल 1,91,131 रुपये) का वेतन जारी कर दिनेश के खाते में स्थानांतरित कर दिए गए। इस लापरवाही का पता लगने पर संबंधित विभाग ने मामले को दबाने के बाद वेतन जारी करना बंद कर दिया लेकिन अब यह मामला खुलकर सामने आ गया। कार्मिक विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एक टीम दिनेश चंद्र मीना के घर भेजी गई और उनको खाते में भेजे गए रुपयों को वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मामला सही है। जांच चल रही है। साथ ही दिनेश चंद्र को पैसा वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है।
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झांसी। रेलवे के सहायक लोको पायलट के पद पर ट्रेनिंग लेने के बाद एक कर्मचारी ने ज्वाइनिंग (नियुक्ति) नहीं की और इसके बाद भी उसके खाते में तनख्वाह जाती रही। पता चला कि कर्मचारी दूसरी जगह नौकरी करने लगा। कार्मिक विभाग ने जांच में मामला पकड़े जाने के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही तनख्वाह बनाने में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं।
जनवरी 2017 में राजस्थान के दिनेश चंद्र मीना पुत्र कुंदन लाल मीना की भर्ती सहायक लोको पायलट के पद पर हुई थी। भर्ती के बाद उनको ट्रेनिंग के लिए कानपुर भेज दिया गया। उनको जनवरी 2017 से अप्रैल 2017 तक की अवधि का ट्रेनिंग का स्टाई फंड दिया गया। ट्रेनिंग के बाद परिणाम आ गया मगर दिनेश ने नियुक्ति नहीं ली। इसके बाद संबंधित एलआर विभाग ने मई 2017 से सितंबर 2017 तक उनका वेतन जारी नहीं किया। मगर अक्तूबर 2017 में 26378 रुपये, नवंबर 2017 में 80271 रुपये, दिसंबर 2017 में 26378 रुपये, जनवरी 2018 में 27,142 रुपये व फरवरी 2018 में 27142 रुपये (कुल 1,91,131 रुपये) का वेतन जारी कर दिनेश के खाते में स्थानांतरित कर दिए गए। इस लापरवाही का पता लगने पर संबंधित विभाग ने मामले को दबाने के बाद वेतन जारी करना बंद कर दिया लेकिन अब यह मामला खुलकर सामने आ गया। कार्मिक विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एक टीम दिनेश चंद्र मीना के घर भेजी गई और उनको खाते में भेजे गए रुपयों को वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मामला सही है। जांच चल रही है। साथ ही दिनेश चंद्र को पैसा वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है।
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