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गांव में बनेंगे वाटर यूजर ग्रुप-Cordination
Updated Wed, 30 May 2018 08:12 PM IST
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फोटो- हाफ कालम
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प्रत्येक गांव में बनेंगे वाटर यूजर ग्रुप: प्रमुख सचिव उद्यान
- जिलाधिकारी ब्लाक मुख्यालयों पर पानी के नक्शे पहुंचाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग ने कहा कि पानी का दिनोंदिन संकट गहराता जा रहा है। इसलिए अब प्रत्येक गांव में वाटर यूजर ग्रुप बनाकर लोगों को पानी का महत्व बताया जाए तथा गांव में उपलब्ध पानी का कैसे उपयोग किया जाए कि उतने ही पानी में सबकी जरूरतें पूरी हो जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में कितना भूजल है, इसका नक्शा जिलाधिकारियों के पास है। इस नक्शे के आधार पर प्रत्येक गांव में पानी का कितना उपयोग किया जा सकता है, यदि यह प्लान तैयार कर काम किया गया तो पानी की उतनी किल्लत नहीं होगी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ऑडीटोरियम में झांसी और चित्रकूटधाम मंडल की खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में उन्होंने कहा कि सभी ब्लाक मुख्यालयों पर यदि यह नक्शे उपलब्ध करा दिए जाएं तो ब्लाक स्तरीय अधिकारी नक्शों के आधार पर काम कर सकेंगे। वाटर यूजर ग्रुप बनाने का मकसद यह है कि गांवों के लोग सीधे पानी संबंधी जानकारी से जुड़ जाएंगे और कितना पानी कहां पर खर्च करना है, इसका प्लान अपने गांव की जरूरतों के हिसाब से बना सकेंगे। इससे गांवों में पानी के लिए इतना हाहाकार नहीं होगा और गांव वालों को पता रहेगा कि उन्हें कितना पानी खर्च करना है। भूमिगत जल का कितना दोहन करना है।
उन्होंने कहा कि अभी किसान स्प्रिंकलर सेट का सही उपयोग नहीं कर रहा है। यदि किसानों को समझाया जाए तो इसका असर पड़ेगा। पहले इस पर जीएसटी 12 प्रतिशत था, अब घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। प्रयास किया जा रहा है कि और कम हो जाए।
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प्रत्येक गांव में बनेंगे वाटर यूजर ग्रुप: प्रमुख सचिव उद्यान
- जिलाधिकारी ब्लाक मुख्यालयों पर पानी के नक्शे पहुंचाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग ने कहा कि पानी का दिनोंदिन संकट गहराता जा रहा है। इसलिए अब प्रत्येक गांव में वाटर यूजर ग्रुप बनाकर लोगों को पानी का महत्व बताया जाए तथा गांव में उपलब्ध पानी का कैसे उपयोग किया जाए कि उतने ही पानी में सबकी जरूरतें पूरी हो जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में कितना भूजल है, इसका नक्शा जिलाधिकारियों के पास है। इस नक्शे के आधार पर प्रत्येक गांव में पानी का कितना उपयोग किया जा सकता है, यदि यह प्लान तैयार कर काम किया गया तो पानी की उतनी किल्लत नहीं होगी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ऑडीटोरियम में झांसी और चित्रकूटधाम मंडल की खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में उन्होंने कहा कि सभी ब्लाक मुख्यालयों पर यदि यह नक्शे उपलब्ध करा दिए जाएं तो ब्लाक स्तरीय अधिकारी नक्शों के आधार पर काम कर सकेंगे। वाटर यूजर ग्रुप बनाने का मकसद यह है कि गांवों के लोग सीधे पानी संबंधी जानकारी से जुड़ जाएंगे और कितना पानी कहां पर खर्च करना है, इसका प्लान अपने गांव की जरूरतों के हिसाब से बना सकेंगे। इससे गांवों में पानी के लिए इतना हाहाकार नहीं होगा और गांव वालों को पता रहेगा कि उन्हें कितना पानी खर्च करना है। भूमिगत जल का कितना दोहन करना है।
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उन्होंने कहा कि अभी किसान स्प्रिंकलर सेट का सही उपयोग नहीं कर रहा है। यदि किसानों को समझाया जाए तो इसका असर पड़ेगा। पहले इस पर जीएसटी 12 प्रतिशत था, अब घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। प्रयास किया जा रहा है कि और कम हो जाए।
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