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बबीना नहर प्रणाली परियोजना के प्रभावित किसानों का प्रदर्शन-City
Updated Sat, 30 Dec 2017 08:17 PM IST
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बिना मुआवजा खुदी जमीन तो भड़के किसान
बेतवा भवन में बबीना नहर प्रणाली के प्रभावितों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बबीना नहर प्रणाली परियोजना के अंतर्गत जमीन अधिग्रहण होने के बाद भी मुआवजा न मिलने पर शनिवार को प्रभावित किसानों ने सिंचाई विभाग के बेतवा भवन कार्यालय में प्रदर्शन किया। हालांकि, देर शाम कुछ किसानों को चेक बांट दी गई।
शनिवार को बुंदेलखंड किसान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रभावित किसानों ने बकाया मुआवजे की मांग को लेकर परिवार की महिलाओं के साथ बेतवा भवन कार्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिशासी अभियंता अरविंद सचान द्वारा शीघ्र मुआवजा राशि देने का आश्वासन मिलने पर किसान वापस लौट गए। प्रदर्शन में मुन्ना, खुमान, राजाराम, प्रकाश, बालमुकुंद, बलवीर, महेश, हरनाम, भागीरथ, धीर सिंह राजपूत, मुलायम सिंह, रामसिंह राजपूत शामिल थे।
ये है मामला
सिंचाई विभाग ने पंद्रह गांवों के सैकड़ों लोगों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बबीना नहर प्रणाली 2014 में शुरू की थी। इस योजना में अभी तक सैकर और पृथ्वीपुर नया खेड़ा के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। करीब 11 किलोमीटर में खुदाई का काम भी हो गया है। मगर, बजट के अभाव में सिंचाई विभाग प्रभावित किसानों को दो साल बाद भी पूरा मुआवजा नहीं दे सका है। पिछले दिनों दस करोड़ बजट आने के बाद से किसान लगातार मुआवजे की बकाया राशि लेने के लिए सिंचाई विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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यह है योजना
शासन ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत बबीना नहर प्रणाली को पूरा करने के लिए 24 सितंबर 2014 को 187.06 करोड़ की स्वीकृति दी थी। वर्तमान में यह योजना 236 करोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार ने प्रथम किस्त 21.68 करोड़ रुपये और दूसरी में दस करोड़ रुपये जारी भी कर दिए। इस धन से आवश्यक 161 हेक्टेयर जमीन के सापेक्ष किसानों की 37 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। करीब 11 किलोमीटर में खुदाई का काम हो गया है।
ये हैं मांगे
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- जिन किसानों की जमीन पर सहमति बन गईं हैं उनको तत्काल मुआवजा मिले।
- नहर निर्माण में अलग- अलग जगह बन रही पुलिया की गुणवत्ता की जांच हो।
- खुदाई कर रहे ठेकेदारों से किसानों का उत्पीड़न रोका जाए।
- अभी जो बजट आया है उसे मुआवजे में बांटा जाए।
- छोटी माइनर नहरें किसानों की सहमति पर बनें।
- जौनपुर घिसौली में मुआवजा दिए बिना खोदी जा रही जमीन।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
बबीना ब्लाक में सिंचाई हेतु कोई नहर नहीं है। जमीन ऊंची-नीची है। यहां नलकूप भी सफल नहीं हैं। इस योजना से बबीना ब्लाक के नौहरा, बड़ौरा, बघौरा, बैदोरा, घिसौली, बबीना, पुरा, पृथ्वीपुरा नया खेरा, सुकुवां, सिमिरिया, लहर ठकुरपुरा, रसीना, मानपुरा, कोटी व सैकर गांव की 4400 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। योजना से तीन हजार किसान लाभान्वित होंगे। योजना के तहत 161 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें सात सौ काश्तकारों की जमीन आ रही है।
फोटो
रजिस्ट्री हो चुकी
मेरी चार एकड़ भूमि की दो साल पहले रजिस्ट्री हो चुकी है। शुरूआत में 14 लाख मिले थे। अभी 45 लाख और मिलना है, लेकिन दो साल से सिर्फ कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं।
भागीरथ, सैकर गांव।
फोटो
मजदूरी करनी पड़ रही
मेरी जमीन की दो साल पहले रजिस्ट्री हो चुकी है। मुआवजा न मिलने के कारण मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। बच्चों को भी नहीं पढ़ा पा रहा हूं।
रामप्रसाद, पृथ्वीपुर नया खेड़ा गांव।
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बिना मुआवजा खुदी जमीन तो भड़के किसान
बेतवा भवन में बबीना नहर प्रणाली के प्रभावितों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बबीना नहर प्रणाली परियोजना के अंतर्गत जमीन अधिग्रहण होने के बाद भी मुआवजा न मिलने पर शनिवार को प्रभावित किसानों ने सिंचाई विभाग के बेतवा भवन कार्यालय में प्रदर्शन किया। हालांकि, देर शाम कुछ किसानों को चेक बांट दी गई।
शनिवार को बुंदेलखंड किसान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रभावित किसानों ने बकाया मुआवजे की मांग को लेकर परिवार की महिलाओं के साथ बेतवा भवन कार्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिशासी अभियंता अरविंद सचान द्वारा शीघ्र मुआवजा राशि देने का आश्वासन मिलने पर किसान वापस लौट गए। प्रदर्शन में मुन्ना, खुमान, राजाराम, प्रकाश, बालमुकुंद, बलवीर, महेश, हरनाम, भागीरथ, धीर सिंह राजपूत, मुलायम सिंह, रामसिंह राजपूत शामिल थे।
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ये है मामला
सिंचाई विभाग ने पंद्रह गांवों के सैकड़ों लोगों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बबीना नहर प्रणाली 2014 में शुरू की थी। इस योजना में अभी तक सैकर और पृथ्वीपुर नया खेड़ा के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। करीब 11 किलोमीटर में खुदाई का काम भी हो गया है। मगर, बजट के अभाव में सिंचाई विभाग प्रभावित किसानों को दो साल बाद भी पूरा मुआवजा नहीं दे सका है। पिछले दिनों दस करोड़ बजट आने के बाद से किसान लगातार मुआवजे की बकाया राशि लेने के लिए सिंचाई विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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यह है योजना
शासन ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत बबीना नहर प्रणाली को पूरा करने के लिए 24 सितंबर 2014 को 187.06 करोड़ की स्वीकृति दी थी। वर्तमान में यह योजना 236 करोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार ने प्रथम किस्त 21.68 करोड़ रुपये और दूसरी में दस करोड़ रुपये जारी भी कर दिए। इस धन से आवश्यक 161 हेक्टेयर जमीन के सापेक्ष किसानों की 37 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। करीब 11 किलोमीटर में खुदाई का काम हो गया है।
ये हैं मांगे
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- जिन किसानों की जमीन पर सहमति बन गईं हैं उनको तत्काल मुआवजा मिले।
- नहर निर्माण में अलग- अलग जगह बन रही पुलिया की गुणवत्ता की जांच हो।
- खुदाई कर रहे ठेकेदारों से किसानों का उत्पीड़न रोका जाए।
- अभी जो बजट आया है उसे मुआवजे में बांटा जाए।
- छोटी माइनर नहरें किसानों की सहमति पर बनें।
- जौनपुर घिसौली में मुआवजा दिए बिना खोदी जा रही जमीन।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
बबीना ब्लाक में सिंचाई हेतु कोई नहर नहीं है। जमीन ऊंची-नीची है। यहां नलकूप भी सफल नहीं हैं। इस योजना से बबीना ब्लाक के नौहरा, बड़ौरा, बघौरा, बैदोरा, घिसौली, बबीना, पुरा, पृथ्वीपुरा नया खेरा, सुकुवां, सिमिरिया, लहर ठकुरपुरा, रसीना, मानपुरा, कोटी व सैकर गांव की 4400 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। योजना से तीन हजार किसान लाभान्वित होंगे। योजना के तहत 161 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें सात सौ काश्तकारों की जमीन आ रही है।
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रजिस्ट्री हो चुकी
मेरी चार एकड़ भूमि की दो साल पहले रजिस्ट्री हो चुकी है। शुरूआत में 14 लाख मिले थे। अभी 45 लाख और मिलना है, लेकिन दो साल से सिर्फ कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं।
भागीरथ, सैकर गांव।
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मजदूरी करनी पड़ रही
मेरी जमीन की दो साल पहले रजिस्ट्री हो चुकी है। मुआवजा न मिलने के कारण मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। बच्चों को भी नहीं पढ़ा पा रहा हूं।
रामप्रसाद, पृथ्वीपुर नया खेड़ा गांव।