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जलती रही पराली और प्रशिक्षण संस्थान दबाए रहा 16.50 लाख रुपये
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झांसी। पराली जलाने में झांसी पूरे सूबे में इस बार नंबर एक पर आ गया। जबकि किसानों को पराली प्रबंधन में प्रशिक्षित करने के लिए सरकार ने चार माह पहले ही मोटी रकम चिरगांव स्थित राजकीय कृषि महाविद्यालय को दी थी। लेकिन संस्थान प्रबंधन की नींद ही नहीं टूटी। नतीजतन, पराली प्रबंधन मामले में झांसी सबसे फिसड्डी साबित हुआ।
सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी की ओर से फसल अवशेष को जलाने पर सख्ती से रोक लगाने के के आदेश दिए गए हैं। सरकार ने कोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए प्रत्येक स्तर पर पराली प्रबंधन के निर्देश दिए थे। झांसी में यह जिम्मा चिरगांव प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया। संस्थान को प्रशिक्षण मद में कुल 16.50 लाख रुपये की रकम भी दी गई। निर्देश दिया कि इसके जरिए माेंठ, समथर आदि इलाकों में किसानों को पराली प्रबंधन के तरीके समझाए जाएं। करीब पौने तीन सौ किसान भी चयनित हुए। लेकिन, प्रभारी प्राचार्य राजित राम वर्मा की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। वहीं, जेडीए सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यह पैसा खर्च क्यूं नहीं हुआ, अभी उनको इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में संबंधित से जवाब -तलब किया जाएगा।
मंडलायुक्त से हो चुकी दफ्तर में न बैठने की शिकायत
प्रभारी प्राचार्य राजितराम वर्मा के पास मूल रूप से उपनिदेशक शोध के तौर पर तैनात हैं। लेकिन, यह बहुत कम दिन ही कार्यालय में बैठते हैं। इस वजह से यहां चल रहे कई बीज शोध संबंधी कार्य भी लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। इनके कार्यालय में न बैठने की शिकायत भी जेडीए को मिली। उनकी ओर से बिना बताए मुख्यालय न छोड़ने के निर्देश भी दिए गए। लेकिन, आरोप है उपनिदेशक शोध बिना उच्चधिकारियों को बताए अकसर लखनऊ चले जाते हैं। कई बार हफ्तों लखनऊ में ही डेरा डाले रहते हैं। किसान प्रतिनिधियों ने उनकी कार्यशैली की शिकायत मंडलायुक्त से भी की है।
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सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी की ओर से फसल अवशेष को जलाने पर सख्ती से रोक लगाने के के आदेश दिए गए हैं। सरकार ने कोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए प्रत्येक स्तर पर पराली प्रबंधन के निर्देश दिए थे। झांसी में यह जिम्मा चिरगांव प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया। संस्थान को प्रशिक्षण मद में कुल 16.50 लाख रुपये की रकम भी दी गई। निर्देश दिया कि इसके जरिए माेंठ, समथर आदि इलाकों में किसानों को पराली प्रबंधन के तरीके समझाए जाएं। करीब पौने तीन सौ किसान भी चयनित हुए। लेकिन, प्रभारी प्राचार्य राजित राम वर्मा की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। वहीं, जेडीए सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यह पैसा खर्च क्यूं नहीं हुआ, अभी उनको इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में संबंधित से जवाब -तलब किया जाएगा।
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मंडलायुक्त से हो चुकी दफ्तर में न बैठने की शिकायत
प्रभारी प्राचार्य राजितराम वर्मा के पास मूल रूप से उपनिदेशक शोध के तौर पर तैनात हैं। लेकिन, यह बहुत कम दिन ही कार्यालय में बैठते हैं। इस वजह से यहां चल रहे कई बीज शोध संबंधी कार्य भी लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। इनके कार्यालय में न बैठने की शिकायत भी जेडीए को मिली। उनकी ओर से बिना बताए मुख्यालय न छोड़ने के निर्देश भी दिए गए। लेकिन, आरोप है उपनिदेशक शोध बिना उच्चधिकारियों को बताए अकसर लखनऊ चले जाते हैं। कई बार हफ्तों लखनऊ में ही डेरा डाले रहते हैं। किसान प्रतिनिधियों ने उनकी कार्यशैली की शिकायत मंडलायुक्त से भी की है।
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