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सारे प्रयास फेल, चल रहा पॉलिथीन का ‘खेल’
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सारे प्रयास फेल, चल रहा पॉलिथीन का ‘खेल’
झांसी। शहर में प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग दुकानों में बेरोकटोक हो रहा है। प्रदेश में प्रतिबंधित पॉलिथीन बेचने पर पाबंदी के बाद दुकानदार मध्य प्रदेश से ला रहे हैं। फल और सब्जी बेचने वाले भी इसका खूब उपयोग कर रहे हैं। इसी वजह से नाली, नालों और सड़कों पर प्लास्टिक कचरा दिख जाता है। इसी से नाले और नालियां जाम हो रहीं हैं। नगर निगम की तरफ से अभियान तो चलाया जाता है लेकिन उसका असर कुछ ही दिन दिखाई देता है।
सबसे अधिक नुकसान जानवरों को हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले में हर महीने दो सौ से अधिक जानवरों की मौतें पॉलिथीन खाने से हो रही हैं। प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग से कई तरह की बीमारियां बढ़ने लगी हैं। वहीं पॉलिथीन कचरे से हर दिन नालियां चोंक हो रही हैं। नगर में इन दिनों पॉलिथीन का उपयोग व बिक्री ज्यादा हो रहा है। लोग सामान निकालकर इनको कूड़े के ढेर में डाल देते हैं। वह नाले और नालियों में समा जाती हैं। इससे शहर के हर छोटे व बड़े नाले चोंक हो गए हैं।
महानगर में अलग-अलग मोटाई और किस्म की पॉलिथीन रोजाना बिक रही है। पॉलिथीन के थोक विक्रेताओं का कहना है अलग-अलग तरह के दुकानदार अपनी जरूरत के अनुसार मोटाई और साइज की पॉलिथीन का प्रयोग करते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खपत कम मोटाई वाली पॉलिथीन की हो रही है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध का सरकारी आदेश आने के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि नगर में नगर निगम ने कई बार कार्रवाई की लेकिन इसका खास असर नहीं पड़ा। व्यापारियों ने बताया ग्राहक घर से थैली लेकर नहीं आते हैं। इससे उन्हें पॉलिथीन में सामान देना पड़ता है।
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नहीं हो रहा नियम का पालन
पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कई नियम व कानून बने हैं, लेकिन प्रशासन इस नियम का पालन नहीं करा सका है। नियमों के तहत 50 माइक्रोन से कम घनत्व के पॉलिथीन बैग की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगी है। बावजूद इसके शहर में इस तरह की पॉलिथीन का उपयोग हो रहा है। ज्यादातर दुकानदार इसी तरह की पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हैं। सब्जी, फल, किराना दुकानें पॉलिथीन बिक्री का सबसे बड़े केंद्र हैं।
जानवरों को अधिक नुकसान
जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पॉलिथीन, प्लास्टिक व थर्माकोल सबसे अधिक जानवरों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। लोग पॉलिथीन में भर कर खाद्य सामग्री को फेंकते हैं, जिसको खाने से जानवरों के शरीर में पॉलिथीन पहुंच जाती है जिससे ये आंतों में फंस जाती है व पाचन क्रिया को नष्ट कर देती है। इससे जानवरों का पेट फूलने लगता है और मौत हो जाती है।
यहां होता है अधिक उपयोग
सब्जी मंडी के साथ ही फलों के ठेले, फुटकर सब्जी विक्रेता, किराना दुकान, कपड़ा व अन्य दुकानों पर, प्रसाद व मिठाई दुकानों आदि स्थानों पर पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है।
जुर्माना व सजा का प्रावधान
100 ग्राम तक 1000 रुपये, 101 से 500 ग्राम तक 2000 रुपये, 501 ग्राम से 1 किलोग्राम तक 5000 रुपये, 5 किलोग्राम से अधिक होने पर 25000 रुपये से 50000 तक का जुर्माने के साथ ही छह महीने तक की सजा हो सकती है।
कागज और कपड़ों के थैलों का नहीं बढ़ा प्रचलन
नगर में पॉलिथीन के उपयोग के रोकने के लिए नगर निगम ने कई तरह के प्रयास किए, लेकिन वे सभी नाकाम सिद्ध हुए। पिछले वर्ष नगर निगम ने कपड़े व कागज के पैकेज एवं थैली चलाने की पहल की थी। इस पर कई दिनों तक तो अमल किया गया लेकिन नगर निगम की अनदेखी व लापरवाही से शहर में हर जगह प्रतिबंधित पॉलिथीन, थर्माकोल व प्लास्टिक से बने सामान आसानी से कई दुकानों पर देखे जा रहेे हैं।
कईविकल्प हैं मौजूद
नगर में पॉलिथीन के कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार कागज के लिफाफे, प्रसाद और पूजन सामग्री के लिए डलिया, नष्ट होने वाले बैग बाजार में उपलब्ध हैं। पिछले साल चली मुहिम में इनका उपयोग हुआ था। सब्जी, फल विक्रेताओं व होटल संचालकों ने भी पॉलिथीन देना बंद कर दिया था, लेकिन धीरे-धीरे वही हालत देखने को मिल रहे हैं। पॉलिथीन के दुष्परिणाम देखते हुए बंद करने में प्रशासन के साथ जनता की सजगता भी जरूरी है।
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झांसी। शहर में प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग दुकानों में बेरोकटोक हो रहा है। प्रदेश में प्रतिबंधित पॉलिथीन बेचने पर पाबंदी के बाद दुकानदार मध्य प्रदेश से ला रहे हैं। फल और सब्जी बेचने वाले भी इसका खूब उपयोग कर रहे हैं। इसी वजह से नाली, नालों और सड़कों पर प्लास्टिक कचरा दिख जाता है। इसी से नाले और नालियां जाम हो रहीं हैं। नगर निगम की तरफ से अभियान तो चलाया जाता है लेकिन उसका असर कुछ ही दिन दिखाई देता है।
सबसे अधिक नुकसान जानवरों को हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले में हर महीने दो सौ से अधिक जानवरों की मौतें पॉलिथीन खाने से हो रही हैं। प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग से कई तरह की बीमारियां बढ़ने लगी हैं। वहीं पॉलिथीन कचरे से हर दिन नालियां चोंक हो रही हैं। नगर में इन दिनों पॉलिथीन का उपयोग व बिक्री ज्यादा हो रहा है। लोग सामान निकालकर इनको कूड़े के ढेर में डाल देते हैं। वह नाले और नालियों में समा जाती हैं। इससे शहर के हर छोटे व बड़े नाले चोंक हो गए हैं।
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महानगर में अलग-अलग मोटाई और किस्म की पॉलिथीन रोजाना बिक रही है। पॉलिथीन के थोक विक्रेताओं का कहना है अलग-अलग तरह के दुकानदार अपनी जरूरत के अनुसार मोटाई और साइज की पॉलिथीन का प्रयोग करते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खपत कम मोटाई वाली पॉलिथीन की हो रही है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध का सरकारी आदेश आने के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि नगर में नगर निगम ने कई बार कार्रवाई की लेकिन इसका खास असर नहीं पड़ा। व्यापारियों ने बताया ग्राहक घर से थैली लेकर नहीं आते हैं। इससे उन्हें पॉलिथीन में सामान देना पड़ता है।
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नहीं हो रहा नियम का पालन
पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कई नियम व कानून बने हैं, लेकिन प्रशासन इस नियम का पालन नहीं करा सका है। नियमों के तहत 50 माइक्रोन से कम घनत्व के पॉलिथीन बैग की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगी है। बावजूद इसके शहर में इस तरह की पॉलिथीन का उपयोग हो रहा है। ज्यादातर दुकानदार इसी तरह की पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हैं। सब्जी, फल, किराना दुकानें पॉलिथीन बिक्री का सबसे बड़े केंद्र हैं।
जानवरों को अधिक नुकसान
जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पॉलिथीन, प्लास्टिक व थर्माकोल सबसे अधिक जानवरों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। लोग पॉलिथीन में भर कर खाद्य सामग्री को फेंकते हैं, जिसको खाने से जानवरों के शरीर में पॉलिथीन पहुंच जाती है जिससे ये आंतों में फंस जाती है व पाचन क्रिया को नष्ट कर देती है। इससे जानवरों का पेट फूलने लगता है और मौत हो जाती है।
यहां होता है अधिक उपयोग
सब्जी मंडी के साथ ही फलों के ठेले, फुटकर सब्जी विक्रेता, किराना दुकान, कपड़ा व अन्य दुकानों पर, प्रसाद व मिठाई दुकानों आदि स्थानों पर पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है।
जुर्माना व सजा का प्रावधान
100 ग्राम तक 1000 रुपये, 101 से 500 ग्राम तक 2000 रुपये, 501 ग्राम से 1 किलोग्राम तक 5000 रुपये, 5 किलोग्राम से अधिक होने पर 25000 रुपये से 50000 तक का जुर्माने के साथ ही छह महीने तक की सजा हो सकती है।
कागज और कपड़ों के थैलों का नहीं बढ़ा प्रचलन
नगर में पॉलिथीन के उपयोग के रोकने के लिए नगर निगम ने कई तरह के प्रयास किए, लेकिन वे सभी नाकाम सिद्ध हुए। पिछले वर्ष नगर निगम ने कपड़े व कागज के पैकेज एवं थैली चलाने की पहल की थी। इस पर कई दिनों तक तो अमल किया गया लेकिन नगर निगम की अनदेखी व लापरवाही से शहर में हर जगह प्रतिबंधित पॉलिथीन, थर्माकोल व प्लास्टिक से बने सामान आसानी से कई दुकानों पर देखे जा रहेे हैं।
कईविकल्प हैं मौजूद
नगर में पॉलिथीन के कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार कागज के लिफाफे, प्रसाद और पूजन सामग्री के लिए डलिया, नष्ट होने वाले बैग बाजार में उपलब्ध हैं। पिछले साल चली मुहिम में इनका उपयोग हुआ था। सब्जी, फल विक्रेताओं व होटल संचालकों ने भी पॉलिथीन देना बंद कर दिया था, लेकिन धीरे-धीरे वही हालत देखने को मिल रहे हैं। पॉलिथीन के दुष्परिणाम देखते हुए बंद करने में प्रशासन के साथ जनता की सजगता भी जरूरी है।