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गुमनावारा में बनने लगा ‘पानी का रास्ता’
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गुमनावारा में बनने लगा ‘पानी का रास्ता’
झांसी। सालों से पानी की समस्या का दंश झेल रहे मेडिकल कॉलेज के पास गुमनावारा व आसपास क्षेत्र के लोगों को उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है। जल निगम ने इस क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का काम शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में बराठा बेसिन पेयजल योजना से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारी अगस्त तक पानी देने का दावा कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल गर्मियों में इस क्षेत्र के लोगों को टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पेयजल महायोजना के अंतर्गत माताटीला से झांसी तक नई पाइपलाइन से पानी लाने में कम से कम तीन से चार साल लग जाएंगे। चूंकि, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के आसपास क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, करगुवां, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, डॉक्टर्स, वकील कॉलोनी, कैमासन नगर, कोछाभांवर आदि में भीषण जलसंकट रहता है। इन क्षेत्रों में न तो कोई सरकारी पाइप लाइन है और न कोई दूसरा इंतजाम। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। हैंडपंप भी अधिक देर तक चलाने पर पानी उगलना बंद कर देते हैं। जलसंस्थान के टैंकरों के भरोसे लोग एक- एक दिन काटने को मजबूर रहते हैं।
उक्त क्षेत्रों को पानी मिल सके, इसके लिए जलनिगम ने महायोजना के बजट से ही बंद पड़ी बराठा बेसिन पेयजल योजना को चालू कर लिया है। 2800 मीटर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को बदल लिया गया है। इस योजना के तहत बड़ागांव क्षेत्र के बराठा के नजदीक लगे छह ट्यूबवेलों की मदद से करीब छह एमएलडी (साठ लाख लीटर) पानी प्रतिदिन मिल सकेगा। अतिरिक्त पानी के लिए नजदीक ही दो नए ट्यूबवेल भी लगाए जा रहे हैं।
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जल निगम ने कोछाभांवर में पहले चरण में पानी देना शुरू किया है। इसके बाद मेडिकल क्षेत्र के करगुवां, गुमनावारा, वीरांगना नगर, महाराणा प्रताप नगर और आसपास के क्षेत्रों में पाइप लाइन डालकर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए गुमनावारा व आसपास क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का काम शुरू हो गया है। कुल 40 किलोमीटर पाइप लाइन डाली जानी है, जिसमें आठ किलोमीटर पाइप डालने का काम हो गया है। इस काम में दो महीने का वक्त लगने की उम्मीद है।
‘बराठा बेसिन पेयजल योजना से कोछाभांवर को एक दो दिन में सुचारु रूप से पानी मिलने लगेगा। लीकेज पाइपों को बदल दिया गया है। साथ ही गुमनावारा व आसपास क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। अगस्त तक जहां- जहां पाइप डल जाएगा, वहां पानी देना शुरू कर दिया जाएगा।’
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
गर्मियों में घर पर रहना मुश्किल हो जाता है। पाइप लाइन डलने से एक बड़ी परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी।
हेमंत सिंह, गुमनावारा।
अभी मुझे एक किलोमीटर दूर पानी भरने जाना पड़ता है। आसपास के हैंडपंप सूख गए हैं। बस अब तो जल्दी पाइप लाइन से पानी मिलने लगे।
प्रिंस दुबे, गुमनावारा।
हैंडपंप से जो पानी पी रहे हैं वह बहुत भारी है। पीने में अच्छा नहीं लगता। बीमारी शुरू हो गई है। कम से कम अब यह समस्याएं तो नहीं रहेंगी।
मनीषा, पिछोर।
पानी को लेकर पूरा परिवार परेशान रहता है। गर्मियों में तो टैंकर के इंतजार में पूरी दिनचर्या ही बिगड़ी रहती है। पाइप लाइन से पानी मिलने पर जीवन तो व्यवस्थित हो जाएगा।
सुलेखा, पिछोर ।
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झांसी। सालों से पानी की समस्या का दंश झेल रहे मेडिकल कॉलेज के पास गुमनावारा व आसपास क्षेत्र के लोगों को उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है। जल निगम ने इस क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का काम शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में बराठा बेसिन पेयजल योजना से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारी अगस्त तक पानी देने का दावा कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल गर्मियों में इस क्षेत्र के लोगों को टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पेयजल महायोजना के अंतर्गत माताटीला से झांसी तक नई पाइपलाइन से पानी लाने में कम से कम तीन से चार साल लग जाएंगे। चूंकि, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के आसपास क्षेत्र में स्थित गुमनावारा, शिवाजी नगर, वीरांगना नगर, करगुवां, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, डॉक्टर्स, वकील कॉलोनी, कैमासन नगर, कोछाभांवर आदि में भीषण जलसंकट रहता है। इन क्षेत्रों में न तो कोई सरकारी पाइप लाइन है और न कोई दूसरा इंतजाम। अधिकांश घरों की बोरिंग सूख चुकी हैं। हैंडपंप भी अधिक देर तक चलाने पर पानी उगलना बंद कर देते हैं। जलसंस्थान के टैंकरों के भरोसे लोग एक- एक दिन काटने को मजबूर रहते हैं।
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उक्त क्षेत्रों को पानी मिल सके, इसके लिए जलनिगम ने महायोजना के बजट से ही बंद पड़ी बराठा बेसिन पेयजल योजना को चालू कर लिया है। 2800 मीटर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को बदल लिया गया है। इस योजना के तहत बड़ागांव क्षेत्र के बराठा के नजदीक लगे छह ट्यूबवेलों की मदद से करीब छह एमएलडी (साठ लाख लीटर) पानी प्रतिदिन मिल सकेगा। अतिरिक्त पानी के लिए नजदीक ही दो नए ट्यूबवेल भी लगाए जा रहे हैं।
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जल निगम ने कोछाभांवर में पहले चरण में पानी देना शुरू किया है। इसके बाद मेडिकल क्षेत्र के करगुवां, गुमनावारा, वीरांगना नगर, महाराणा प्रताप नगर और आसपास के क्षेत्रों में पाइप लाइन डालकर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए गुमनावारा व आसपास क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का काम शुरू हो गया है। कुल 40 किलोमीटर पाइप लाइन डाली जानी है, जिसमें आठ किलोमीटर पाइप डालने का काम हो गया है। इस काम में दो महीने का वक्त लगने की उम्मीद है।
‘बराठा बेसिन पेयजल योजना से कोछाभांवर को एक दो दिन में सुचारु रूप से पानी मिलने लगेगा। लीकेज पाइपों को बदल दिया गया है। साथ ही गुमनावारा व आसपास क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। अगस्त तक जहां- जहां पाइप डल जाएगा, वहां पानी देना शुरू कर दिया जाएगा।’
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
गर्मियों में घर पर रहना मुश्किल हो जाता है। पाइप लाइन डलने से एक बड़ी परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी।
हेमंत सिंह, गुमनावारा।
अभी मुझे एक किलोमीटर दूर पानी भरने जाना पड़ता है। आसपास के हैंडपंप सूख गए हैं। बस अब तो जल्दी पाइप लाइन से पानी मिलने लगे।
प्रिंस दुबे, गुमनावारा।
हैंडपंप से जो पानी पी रहे हैं वह बहुत भारी है। पीने में अच्छा नहीं लगता। बीमारी शुरू हो गई है। कम से कम अब यह समस्याएं तो नहीं रहेंगी।
मनीषा, पिछोर।
पानी को लेकर पूरा परिवार परेशान रहता है। गर्मियों में तो टैंकर के इंतजार में पूरी दिनचर्या ही बिगड़ी रहती है। पाइप लाइन से पानी मिलने पर जीवन तो व्यवस्थित हो जाएगा।
सुलेखा, पिछोर ।