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15 जून तक शुरू हो जाएगी फोरेंसिक लैब
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15 जून तक शुरू हो जाएगी फोरेंसिक लैब
झांसी। राजगढ़ में बनने वाली फोरेंसिक लैब के जून तक शुरू होने की पूरी संभावना है। इस संबंध में विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा के डिप्टी डायरेक्ट भूरी सिंह ने निरीक्षण कर 15 जून तक शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हालांकि, लैब अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है. लेकिन उसके कुछ विभागों में जांच शुरू हो जाएगी। लैब शुरू होने के बाद बुंदेलखंड के सात जिलों की पुलिस को फायदा मिलेगा।
सरकार ने जनवरी 2016 में जिले के राजगढ़ स्थित पीएसी में फोरेंसिक लैब खोलने का निर्णय लिया था। 35 करोड़ की लागत से बनने वाली लैब का काम 2018 तक पूरा होना था, लेकिन बजट जारी न होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। एक साल तक काम ठप भी रहा। जैसे तैसे बजट जारी होता रहा, तब तक कुल 21 करोड़ रुपये ही जारी हो सके। इस कारण यूपी राजकीय निर्माण निगम लैब की चार मंजिला इमारत को पूरा नहीं कर सका।
फोरेंसिक लैब तैयार नहीं होने से बुंदेलखंड पुलिस को परेशानी हो रही है। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही हैं। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इसे देखते हुए विधि विज्ञान प्रयोगशाला के डिप्टी डायरेक्टर भूरी सिंह ने बुधवार को फोरेंसिक लैब का निरीक्षण कर कार्र्य देखा। उन्होंने अधिकारियोें को 15 जून तक फोरेंसिक लैब शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि लैैब के कुछ सेक्शन शुरू हो जाने चाहिए। अब जून माह में कुछ विभागों में यहां जांच शुरू हो जाएगी।
ऐसे होती है फोरेंसिक जांच
पोस्टमॉर्टम होने के बाद बिसरा संभाल कर रख लिया जाता है, जबकि नमूनों को जांच के लिए भेज दिया जाता है। विसरा का विश्लेषण अलग से होता है। जैसे जहर दिए जाने की वारदात हुई है तो इसमें सामान रखने के कंटेनर्स को भी लिया जाता है। गैस्ट्रिक लावास नाम का एक नमूना लिया जाता है और इन सभी का रासायनिक विश्लेषण किया जाता है। मान लीजिए कि भोजन में कीटनाशक मिले होने का शक हो तो फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी वाले रासायनिक विश्लेषण करते हैं तो विशेषज्ञ जहर की जांच करते हैं। जांच में सारी सच्चाई सामने आने के बाद ही रिपोर्ट तैयार होती है।
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झांसी। राजगढ़ में बनने वाली फोरेंसिक लैब के जून तक शुरू होने की पूरी संभावना है। इस संबंध में विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा के डिप्टी डायरेक्ट भूरी सिंह ने निरीक्षण कर 15 जून तक शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हालांकि, लैब अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है. लेकिन उसके कुछ विभागों में जांच शुरू हो जाएगी। लैब शुरू होने के बाद बुंदेलखंड के सात जिलों की पुलिस को फायदा मिलेगा।
सरकार ने जनवरी 2016 में जिले के राजगढ़ स्थित पीएसी में फोरेंसिक लैब खोलने का निर्णय लिया था। 35 करोड़ की लागत से बनने वाली लैब का काम 2018 तक पूरा होना था, लेकिन बजट जारी न होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। एक साल तक काम ठप भी रहा। जैसे तैसे बजट जारी होता रहा, तब तक कुल 21 करोड़ रुपये ही जारी हो सके। इस कारण यूपी राजकीय निर्माण निगम लैब की चार मंजिला इमारत को पूरा नहीं कर सका।
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फोरेंसिक लैब तैयार नहीं होने से बुंदेलखंड पुलिस को परेशानी हो रही है। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही हैं। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इसे देखते हुए विधि विज्ञान प्रयोगशाला के डिप्टी डायरेक्टर भूरी सिंह ने बुधवार को फोरेंसिक लैब का निरीक्षण कर कार्र्य देखा। उन्होंने अधिकारियोें को 15 जून तक फोरेंसिक लैब शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि लैैब के कुछ सेक्शन शुरू हो जाने चाहिए। अब जून माह में कुछ विभागों में यहां जांच शुरू हो जाएगी।
ऐसे होती है फोरेंसिक जांच
पोस्टमॉर्टम होने के बाद बिसरा संभाल कर रख लिया जाता है, जबकि नमूनों को जांच के लिए भेज दिया जाता है। विसरा का विश्लेषण अलग से होता है। जैसे जहर दिए जाने की वारदात हुई है तो इसमें सामान रखने के कंटेनर्स को भी लिया जाता है। गैस्ट्रिक लावास नाम का एक नमूना लिया जाता है और इन सभी का रासायनिक विश्लेषण किया जाता है। मान लीजिए कि भोजन में कीटनाशक मिले होने का शक हो तो फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी वाले रासायनिक विश्लेषण करते हैं तो विशेषज्ञ जहर की जांच करते हैं। जांच में सारी सच्चाई सामने आने के बाद ही रिपोर्ट तैयार होती है।