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आवारा जानवर
Updated Sat, 25 Aug 2018 02:16 AM IST
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सड़कें बनी अन्ना जानवराें का बसेरा
तालबेहट। नगर की खस्ता हाल सड़कें के बाद उन पर आवारा जानवरों का बसेरा होने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़कों से अफसरों के निकलने के बाद भी अधिकारी इस समस्या से बेपरवाह बने है।
वर्तमान में नगर की सड़कों की हालत काफी जर्जर है। सड़कों में हर जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी का करना पड़ता है। इस बीच सड़कों पर बैठे आवारा जानवरों के झुंड उनकी समस्याओं को और बड़ा दिया है। प्रतिदिन माताटीला मोड़, कोतवाली के समीप, पानी की टंकी, पेट्रोल पंप की पुलिया, ओने के पुल, सब्जी मंडी, डाक बंगला के सामने आदि स्थानों पर आवारा जानवर झुंड के रूप में खड़े रहते है। इन जानवरों में कभी कभी इतना तेज संघर्ष होता है। वहीं, आसपास से गुजर रहे पैदल और वाहन चालकों को अपनी सुरक्षा करने में पसीना आ जाता है। इनके संघर्ष में कई लोग चोटिल हो चुके है। नगर में इन आवारा जानवरों के लिए कोई कांजी हाउस तक नहीं है। उच्चाधिकारियों के नगर में आने पर कुछ विभागीय लोग अपने कर्मचारियों को उनके आगमन से पहले सड़कों से उन्हें हटवा देते है। गौरतलब है कि जिन स्थानों पर आवारा जानवरों के झुंड अधिकांश समय मौजूद रहते है वहां से प्रशासनिक अधिकारियों को प्रति दिन निकलना होता है। इसके बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बॉक्स में
नगर की सड़कों पर आवारा जानवरों की धमाचौकड़ी के संबंध में एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि सड़कों पर आवारा जानवरों के झुंड लगना उचित नहीं है। शीघ्र ही इस संबंध में एक बैठक बुला कर इस समस्या का निदान किया जाएगा।
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तालबेहट। नगर की खस्ता हाल सड़कें के बाद उन पर आवारा जानवरों का बसेरा होने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़कों से अफसरों के निकलने के बाद भी अधिकारी इस समस्या से बेपरवाह बने है।
वर्तमान में नगर की सड़कों की हालत काफी जर्जर है। सड़कों में हर जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी का करना पड़ता है। इस बीच सड़कों पर बैठे आवारा जानवरों के झुंड उनकी समस्याओं को और बड़ा दिया है। प्रतिदिन माताटीला मोड़, कोतवाली के समीप, पानी की टंकी, पेट्रोल पंप की पुलिया, ओने के पुल, सब्जी मंडी, डाक बंगला के सामने आदि स्थानों पर आवारा जानवर झुंड के रूप में खड़े रहते है। इन जानवरों में कभी कभी इतना तेज संघर्ष होता है। वहीं, आसपास से गुजर रहे पैदल और वाहन चालकों को अपनी सुरक्षा करने में पसीना आ जाता है। इनके संघर्ष में कई लोग चोटिल हो चुके है। नगर में इन आवारा जानवरों के लिए कोई कांजी हाउस तक नहीं है। उच्चाधिकारियों के नगर में आने पर कुछ विभागीय लोग अपने कर्मचारियों को उनके आगमन से पहले सड़कों से उन्हें हटवा देते है। गौरतलब है कि जिन स्थानों पर आवारा जानवरों के झुंड अधिकांश समय मौजूद रहते है वहां से प्रशासनिक अधिकारियों को प्रति दिन निकलना होता है। इसके बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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नगर की सड़कों पर आवारा जानवरों की धमाचौकड़ी के संबंध में एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि सड़कों पर आवारा जानवरों के झुंड लगना उचित नहीं है। शीघ्र ही इस संबंध में एक बैठक बुला कर इस समस्या का निदान किया जाएगा।
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