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मकर संक्रांति मूल खबर और सूर्य मंदिर -City
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सूर्य ने किया मकर राशि में प्रवेश, संक्रांति आज
झांसी। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मंगलवार को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के आसपास से निकलने वाली नदियों में श्रद्धालु डुबकी लेकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगे। उनाव के बालाजी सूर्य मंदिर में पर्व की विशेष तैयारियों की गईं हैं।
संक्रांति पर जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि इस त्योहार पर लोग जलाशयों और नदियों में डुबकी लेने पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा भीड़ उनाव में स्थित प्राचीन बालाजी सूर्य मंदिर में उमड़ती है। परंपरानुसार लोग नदी में स्नान कर भीगे बदन भगवान सूर्य को जल अर्पित करने मंदिर जाते हैं। भीड़ के मद्देनजर यहां प्रशासन ने खासी व्यवस्थाएं की हैं। नदी में गोताखोरों की टीम तैनात कर दी गई है। लोग डुबकी लगाने के लिए नदी के गहरे पानी में न उतरें, इसके लिए नदी में तार फेंसिंग कर दी गई है। आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त रखने और सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर मार्ग पर जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों को मंदिर मार्ग से पहले ही रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि जाम की स्थिति न बने।
सोलहवीं शताब्दी का है मंदिर
झांसी से पंद्रह किमी दूर दतिया जिले के उनाव में सूर्य मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया। दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन् 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जाधव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है। ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन नदी में स्नान के बाद मंदिर में सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है।
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सोमवार को भी ली गई डुबकी
मकर संक्रांति पर्व भले ही पिछले दो सालों से 15 जनवरी को मनाया जा रहा है, लेकिन इससे पहले कई दशकों तक 14 जनवरी को मनाया जाता रहा। यही वजह है कि तमाम लोगों ने सोमवार को ये पर्व मनाया। उनाव में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। लोगों ने नदी में स्नान का भगवान सूर्य को जल अर्पित किया। इसके अलावा ओरछा व अन्य स्थानों पर भी लोग डुबकी लेते नजर आए।
17 से वैवाहिक लग्न
सूर्य के उत्तरायण में आने के साथ ही 17 जनवरी से वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि मकर संक्रांति सभी राशियों के लिए बेहतर है। यह पर्व वृष, कन्या को लाभकारी, मिथुन को आत्मशांति, कर्क को धन, तुला को इष्ट सिद्धि, मकर को सम्मान, मीन को ज्ञान वृद्धि प्रदान करने वाला होगा। जबकि मेष, सिंह, धनु, कुंभ राशि वालों के लिये सामान्य रहेगा।
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झांसी। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मंगलवार को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के आसपास से निकलने वाली नदियों में श्रद्धालु डुबकी लेकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगे। उनाव के बालाजी सूर्य मंदिर में पर्व की विशेष तैयारियों की गईं हैं।
संक्रांति पर जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि इस त्योहार पर लोग जलाशयों और नदियों में डुबकी लेने पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा भीड़ उनाव में स्थित प्राचीन बालाजी सूर्य मंदिर में उमड़ती है। परंपरानुसार लोग नदी में स्नान कर भीगे बदन भगवान सूर्य को जल अर्पित करने मंदिर जाते हैं। भीड़ के मद्देनजर यहां प्रशासन ने खासी व्यवस्थाएं की हैं। नदी में गोताखोरों की टीम तैनात कर दी गई है। लोग डुबकी लगाने के लिए नदी के गहरे पानी में न उतरें, इसके लिए नदी में तार फेंसिंग कर दी गई है। आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त रखने और सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर मार्ग पर जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों को मंदिर मार्ग से पहले ही रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि जाम की स्थिति न बने।
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सोलहवीं शताब्दी का है मंदिर
झांसी से पंद्रह किमी दूर दतिया जिले के उनाव में सूर्य मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया। दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन् 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जाधव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है। ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन नदी में स्नान के बाद मंदिर में सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है।
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सोमवार को भी ली गई डुबकी
मकर संक्रांति पर्व भले ही पिछले दो सालों से 15 जनवरी को मनाया जा रहा है, लेकिन इससे पहले कई दशकों तक 14 जनवरी को मनाया जाता रहा। यही वजह है कि तमाम लोगों ने सोमवार को ये पर्व मनाया। उनाव में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। लोगों ने नदी में स्नान का भगवान सूर्य को जल अर्पित किया। इसके अलावा ओरछा व अन्य स्थानों पर भी लोग डुबकी लेते नजर आए।
17 से वैवाहिक लग्न
सूर्य के उत्तरायण में आने के साथ ही 17 जनवरी से वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि मकर संक्रांति सभी राशियों के लिए बेहतर है। यह पर्व वृष, कन्या को लाभकारी, मिथुन को आत्मशांति, कर्क को धन, तुला को इष्ट सिद्धि, मकर को सम्मान, मीन को ज्ञान वृद्धि प्रदान करने वाला होगा। जबकि मेष, सिंह, धनु, कुंभ राशि वालों के लिये सामान्य रहेगा।